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अजीत सिंह (जन्म: २४ जून १७२४ लाहौर, पाकिस्तान) राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के शासक थे। वे महाराजा जसवंत सिंह के पुत्र थे।अजीत सिंह के जन्म से पहले ही उसके पिता की मृत्यु हो चुकी थी। कुछ समय पश्चात अजीत सिंह को दिल्ली लाया गया, जहाँ पर मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब उन्हें मुस्लिम बना लेना चाहता था।राठौड़ सरदार दुर्गादास व रुपसिंह तथा रघुनाथ भाटीने बड़े साहस के साथ अजीत सिंह को दिल्ली से निकाल कर मारवाड़ लाया।

अजीत सिंह
Ajit Singh.jpg
अजीत सिंह
कार्यकाल१६९९- १७२४
जन्मल. 1679
लाहौर
निधन24 June 1724
मेहरानगढ़, जोधपुर
संतानअभय सिंह
बख्त सिंह
पूरा नाम
मारवाड़ के अजीत सिंह
पिताजसवन्त सिंह
माताजादम
धर्महिन्दू धर्म

युद्धसंपादित करें

अजीत सिंह के मामले को लेकर मारवाड़ के राठौड़ सरदारों और मेवाड़ के राणा तथा औरंगज़ेब में एक लम्बा युद्ध छिड़ गया, जो १७०९ ई. तक चला। जब औरंगज़ेब की मृत्यु हो गई तब उसके लड़के और मुग़ल साम्राज्य के अगले उत्तराधिकारी बादशाह बहादुर शाह (प्रथम) ने राजपूतों से सुलह कर ली। अजीत सिंह ने अपनी कन्या का विवाह बादशाह फ़र्रुख़सियर से किया और उससे सुलह कर ली, मुगल बादशाह फर्रखुसियर ने उनकी किसी पुत्री से सादी करने की बात पर जोधपुर राज्य देना स्वीकार किया।तो महाराजा अजीत सिंह ने एक दासी को इंद्र कंवर नाम देकर और उसका कन्यादान करके उसकी शादी मुगल बादशाह से करादी । और विदाई के वक्त इंद्र कंवर से वादा किया की एक दिन वह उसे जरूर मुगल बादशाह से मुक्त कराऐंगे। और उन्होंने बाद में यह वादा निभाए भी बाद में अजीत सिंह ने दिल्ली जाकर मुगल बादशाह की हत्या की और भरे दरबार में उनकी आंखें फोड़ डाली और आदेश दिया जितनी भी हिंदू औरतें हैं उनको आजाद कर दिया जाए और उन्होंने इंद्र कुमारी को भी आजाद कराकर जोधपुर ले आए और उसे पुन शुद्ध करके हिंदू धर्म मे लाया उन्होंने सैयद बंधुओं को जबरदस्ती मालवा और गुजरात की सुबेदारी देने के लिए बाध्य किया इस प्रकार मालवा गुजरात और संपूर्ण मारवाड़ के स्वामी महाराजा अजीतसिंह हो गए और इस प्रकार अजमेर से पश्चिमी समुद्र तट तक का सारा प्रदेश अजीत सिंह के अधीन हो गया। उनके पुत्र भक्तसिंह ने रहस्यमय अंदाज़ से उनकी हत्या कर दी। जसवन्त सिंह के दो रानि थी। जसवंत सिंह के मृृत्यु समय में वह गृभवती थी।


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