धार्मिक आस्था में अवशेष (relic) किसी संत के शरीर के अंश (जैसे कि बाल, नख, अस्तियाँ, इत्यादी) या उनकी व्यक्तिगत प्रयोग की वस्तुएँ होती हैं, जो भक्तगणों के लिये संत की स्मृति बनाए रखने का साधन होती हैं। बौद्ध धर्म, हिन्दू धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म, और अन्य कई धर्मों में अवशेषों का महत्व माना जाता है।[1][2] मार्क्सवाद जैसी कुछ विचारधाराओं में भी अवशेष रखे जाते हैं, मसलन सोवियत संघ के संस्थापक व्लादिमीर लेनिन का शरीर आज भी मास्को में क्रेमलिन के बाहर एक स्मृति-स्थल में और चीन के माओ ज़ेदोंग का शरीर बेइजिंग में प्रदर्शित है।[3]

श्रीलंका के इस मंदिर में महात्मा बुद्ध का दंत अवशेष श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. The Catholic Source Book A Comprehensive Collection of Information about the Catholic Church ISBN 0-15-950653-0
  2. Aymard, Orianne (2014). When a Goddess Dies: Worshipping Ma Anandamayi after Her Death. Oxford University Press. p. 71. ISBN 0199368635.
  3. "A letter from China: the pickled dictator tour Archived 2016-03-13 at the Wayback Machine: 30 years after death, Mao's cured corpse beckons the curious," Josh Green, September 10, 2008; San Francisco Chronicle