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वेद के श्लोकों (मंत्रों) को ऋचा कहते हैं। 'ऋचा' की व्युत्पत्ति 'ऋक्' से हुई है जिसका अर्थ 'प्रशंसा करना' है। (ऋचाओं के सार को व्यक्त करने वाला "ऋचांत" होता है)