पद्य में रचे हुए वेद के श्लोकों (मंत्रों) को ऋचा कहते हैं। 'ऋचा' की व्युत्पत्ति 'ऋक्' से हुई है जिसका अर्थ 'प्रशंसा करना' है। जैसे ऋग्वेद ऋचाओं का संग्रह हैं, इसमें 10462 ऋचाएं हैं, ऋचाओं से अभिप्राय मंत्रो से होता हैं। (ऋचाओं के सार को व्यक्त करने वाला "ऋचांत" होता है)