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निर्देशांक: 23°22′N 79°34′E / 23.37°N 79.57°E / 23.37; 79.57 'चूना पत्थर के शहर' के नाम से लोकप्रिय उत्तरी मध्य प्रदेश का कटनी 4950 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यह कटनी जिला का मुख्यालय है। विजयराघवगढ़, ढीमरखेड़ा, बहोरीबंद, मुड़वारा और करोन्दी यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं। मुडवारा, कटनी, छोटी महानदी और उमदर यहां से बहने वाली प्रमुख नदियां हैं। कटनी का स्लिमनाबाद गांव संगमरमर के पत्थरों के लिए प्रसिद्ध है।

कटनी
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
ज़िला कटनी
महापौर श्री शशांक श्रीवास्तव

altitude = 304

जनसंख्या 93,783 (2001 के अनुसार )
आधिकारिक जालस्थल: katni.nic.in

कटनी नगर का नामकरण कटनी नदी के नाम पर हुआ है। इस नदी पर नगर पश्चिम में 2किमी दूर कटाए घाट है। वास्तव में यह 'कटाव घाट' है, उस कटाव पहाड़ी का जो बहोरीबंद में है। घाट का आशय चढ़ाव है। डॉ॰ शिवप्रसाद सिंह के उपन्यास 'नीला चाँद' में इस कटाव घाट के रास्ते से होकर युद्ध के लिए जाने की सलाह काशी नरेश को दी जाती है। 'मध्यप्रदेश की बारडोली ' कटनी - यह गौरवशाली उपाधि इसलिए मिली कि नगर एवं पचासों गाँव गँवइयों के लोगोँ ने देश की आज़ादी की लड़ाई में बापू का साथ दिया था। प्रदेश में सबसे बढ़कर संख्या बल जेल जाने वालोँ का यहाँ के लोगों का था। माता कस्तूरबा से मुलाकात करने यहाँ के रेल्वे प्लेटफार्म पर उनके बड़े पुत्र यहाँ आए थे। साहित्य में उल्लेखनीय है विजयराघवगढ़ रियासत के ठाकुर जगमोहन सिंह के काव्य-उपन्यास 'श्यामा स्वप्न' की भारतेंदुकालीन परंपरा। आगे गाँधीवादी कवि राममनोहर बृजपुरिया सम्राट के बाद कथा कविता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लेखक कटनी में हुए। कहानी उपन्यास एवँ व्यंग्य लेखन में सर्वाधिक उल्लेखनीय हैँ - सुबोधकुमार श्रीवास्तव, देवेन्द्र कुमार पाठक। कविता की गीत नवगीत लेखन परंपरा को समृद्ध करने वाले सुरेंद्र पाठक, राम सेंगर, राजा अवस्थी आदि के अलावा ओम रायजादा, अनिल खंपरिया ग़ज़ल गीत के सशक्त हस्ताक्षर हैँ। मंचके कवियोँ की परंपरा भी यहाँ खूब समृद्ध है। 'किरण' यहाँ पर कला संगीत का सक्रिय मंच है। बघेली, बुँदेली और गोंडी बोलियों की त्रिधारा कटनी को बोलियों का प्रयाग बनाती है। किन्नर प्रत्याशी कमला जान ने नगर महापौर बनकर पूरे देश में कटनी की धूम मचा दी थी। करमा, राई, फाग, भगत आदि लोकनृत्य लोकगीत यहाँ नाचे गाए जाते हैँ

मुख्य आकर्षणसंपादित करें

झिंझरीसंपादित करें

कटनी जिले के जबलपुर रोड पर कटनी से 3 किलोमीटर दूर झिंझरी शैलाश्रय है। यहां चूना पत्थर की 14 विशाल मेंढकाकार चट्टानें देखी जा सकती है। इन प्रागैतिहासिक कालीन चट्टानों में तत्कालीन मानव के औजारों, हथियारोँ, पशु पक्षी, मानवाकृतियाँ, पेड़ और पत्तों आदि के शैलचित्रोँ को देखा जा सकता है। ये शैलचित्र 10000 ईसा पूर्व से 4000 ईसा पूर्व के माने जाते हैं। सरकारी संरक्षण के बावज़ूद अब ये समाप्तप्राय हैँ।

रूपनाथसंपादित करें

यह तीर्थस्थल बहोरीबंद से 3 किलोमीटर दूर है। भगवान शिव की पंचलिंग की आकर्षक प्रतिमा यहीं स्थापित है। यह एक-दूसर के ऊपर बने तीन कुंड देखे जा सकते हैं। सबसे निचले कुंड को सीताकुंड, बीच के कुंड को लक्ष्मण कुंड और सबसे ऊपर वाले कुंड को राम कुंड के नाम से जाना जाता है।

विजयराघवगढ़संपादित करें

यह ऐतिहासिक स्थल कटनी से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। यह शहर बहुत ही खूबसूरत है।राजा प्रयागदास के काल में यह एक विशाल और लोकप्रिय नगर था। विजयराघवगढ़ किला यहां का मुख्य आकर्षण है। भगवान विजयराघव को समर्पित एक मंदिर भी यहां देखा जा सकता है। मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर विजयराघवगढ़-बरही सड़क मार्ग पर पूर्व में कटनी की जीवनरेखा ' छोटी महानदी ' बहती है। जिसके किनारे पर एक छोटा सा पार्क है। यहाँ देवी शारदा का मंदिर है। जिसका महत्व मैहर की देवी शारदा के समान माना जाता है। रियासत के किशोर राजा सरयू प्रताप सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ़ विद्रोह कर दिया था। प्रमुख सहायक सरदार बहादुर ख़ान को लेकर मुड़वारा कटनी में अंग्रेजोँ से मुक़ाबला किया। किशोर राजा को सुरक्षित कर बहादुरखान ने अपने प्राणोँ का बलिदान कर वफ़ादारी की मिसाल कायम की . आज भी कटनी में महिला महाविद्यालय के बाजू में शहीद की मज़ार है। यह युद्ध प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की अवधि में हुआ। मूड़ वारे यानी सिर काटे थे अंग्रेजोँ ने यहाँ भारतीयोँ के इसलिए कटनी का पश्चिमी दक्षिणी भाग ' मुड़वारा' के नाम से राजस्व अभिलेखोँ में लिखा जाने लगा था। ठाकुर जगमोहनसिंह इसी राजपरिवार के कवि थे। इनका लिखा काव्य उपन्यास ' श्यामा स्वप्न ' भारतेंदुकालीन महत्वपूर्ण काव्यकृति है। विजयराघवगढ़ का किला आज अपने अवशेष रूप में भी अपने गौरवशाली अतीत की शौर्य गाथा सुनाता पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

बिलहेरीसंपादित करें

बिलहेरी कटनी से करीब 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्राचीन काल में पशुपति नगरी के नाम से विख्यात इस नगर में अनेक प्राचीन मूर्तियां देखी जा सकती हैं। यहां से प्राप्त अनेक ऐतिहासिक और प्राचीन वस्तुओं को नागपुर संग्रहालय में रखा गया है।यह संत तारण की जन्म भूमि है।यहाँ आकृषित मंदिर है। मुख्य लेख - पुष्पावति बिल्हेरी

बहोरीबंदसंपादित करें

बहोरीबंद गांव के आसपास अनेक ऐतिहासिक स्मारकों को देखा जा सकता है। जैन तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की 12 फीट ऊंची प्रतिमा, भगवान विष्णु और सूर्य की प्रतिमाएं यहां का मुख्य आकर्षण हैं। यहां एक कुंड के निकट स्थित एक पत्थर में भगवान विष्णु के दस अवतारों को प्रदर्शित किया गया है। यहां स्टोन पार्क की स्थापना के बाद इस गांव का महत्व और बढ़ गया है।

तिगावनसंपादित करें

कटनी जिले का यह छोटा-सा गांव प्रारंभ में झांझरागढ़ के नाम से जाना जाता था। सपाट छत वाला 1500 साल पुराना मंदिर यहां देखा जा सकता है। तिगावन में 30 से भी अधिक मंदिरों को अवशेष हैं। इस गांव के चारों तरफ अनेक मूर्तियां देखी जा सकती हैं। भगवान नरसिंह और पार्श्‍वनाथ की प्रतिमा काफी लोकप्रिय है।

आवागमनसंपादित करें

वायु मार्ग

जबलपुर विमानक्षेत्र, कटनी का नजदीकी एयरपोर्ट है। यह एयरपोर्ट भारत के अनेक शहरों से वायुमार्ग द्वारा जुड़ा है। जबलपुर यहां से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर है।

रेल मार्ग

कटनी शहर में ४ स्टेशन हैं,मुख्य कटनी जंक्शन रेलवे स्टेशन मध्य भारत का प्रमुख रेलवे स्टेशन है। देश के अनेक हिस्सों से यहां के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं। अन्य स्टेशन में मुड़वारा स्टेशन,कटनी साउथ और न्यू कटनी जंक्शन हैं।

सड़क मार्ग

राष्ट्रीय राजमार्ग 7 कटनी को राज्य और पड़ोसी राज्यों के अनेक शहरों से जोड़ता है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के अनेक शहरों से यहां के लिए राज्य परिवहन निगम की नियमित बसों की व्यवस्था है।

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

आदर्श कुमार पाण्डेय -सीधी

. barhi katni jile ki sundar si tahsil hai basant panchmi ke shubh awsar par har varsh yaha vijaynath dham me mela lagta hai

  • कमला जान किन्नर महापौर रही हैं (भारत की पहली किन्नर महापौर)
  • बल्थारी की पान-काफी प्रसिद्ध है (अबुल फजल की पुस्तक आईने-ए-अकबरी मे उल्लेख है)

सन्दर्भसंपादित करें

katni ke pass nitarra village he. janha par pracheen kila tha. us kile ki murtiya bahut fames he.