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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारत के खिलाफ नारे लगाने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने का आरोप अखिल भारतीय छात्र परिषद (AISF) के छात्र नेता कन्हैया पर था। ये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की स्टूडैंट विंग A I S F के नेता हैैं। वह 2015 में जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) छात्रसंघ के अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे। फरवरी 2016 में   जेएनयू में एक कश्मीरी अलगाववादी, 2001 में भारतीय संसद पर हमले के दोषी, मोहम्मद अफजल गुरु को फांसी के खिलाफ एक छात्र रैली में राष्‍ट्रविरोधी नारे लगाने के आरोप में देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। zee news की वीडियो क्लिप के आधार पर उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जिसमे सुप्रीम कोर्ट ने Zee news का वीडियो क्लिप edited(फ़र्ज़ी) पाया। [1] उसे 2 मार्च 2016 में अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया था, क्योंकि राष्ट्र विरोधी नारों में भाग लेने का पुलिस द्वारा कुमार का कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया।[2][3] इसके इलावा जेएनयू के कुलपति द्वारा गठित एक अनुशासन समिति भी विवादास्पद घटना की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर, कन्हैया कुमार और सात अन्य छात्रों को अकादमिक तौर पर वंचित कर दिया गया।[4] विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने कन्हैया कुमार का विरोध किया था। उसके ऊपर देशद्रोह का मुकादमा चल रहा है। कन्हैया कुमार की हालही में एक किताब छपी है जिसका नाम बिहार टू तिहार (Bihar to tihar) है।

कन्हैया कुमार
Kanhaiya Kumar.jpg
कन्हैया कुमार
जन्म बेगूसराय, बिहार, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
शिक्षा पीएचडी, (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली)

जनवरी 2019 में जी न्यूज वीडियो जिसमे कन्हैया कुमार को दोषी पाया गया दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दिया। बाद में पाया गया कि ज़ी न्यूज़ ने जो वीडियो जारी किया था उसमें कुछ जगहों पर छेड़छाड़ की गयी है। अतः कन्हैया कुमार को न्यायालय द्वारा रिहा कर दिया गया।

विवादसंपादित करें

कन्हैया कुमार पर देश विरोधी प्रवृत्ति के आरोप लगे थे जिसके कारण काफ़ी विवाद में रहा। ९ फरवरी २०१६ को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कन्हैया कुमार की अगवानी में 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' और 'अफ़ज़ल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं' के नारे लगाने के आरोप लगे थे मीडिया द्वारा दिखाये गए वीडियो को कांट छांट कर फैलाया गया जिस कारण पुलिस द्वारा न्यायालय में उचित सबूतों के अभाव में उन्हें छोड़ दिया गया । कन्हैया के विरुद्ध राजद्रोह का गुनाह दाखिल किया गया।[5]

राजनीतिक कैरियरसंपादित करें

17 वीं लोकसभा चुनाव में बेगूसराय लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चार लाख 22 हजार मतों के बड़े अंतर से कन्हैया कुमार को हराकर संसद पहुंचने वाले भाजपा के नेता गिरिराज सिंह केंद्र में दोबारा मंत्री बने।[6]


सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Why an Indian student has been arrested for sedition". बीबीसी न्यूज़. अभिगमन तिथि 17 February 2016.
  2. JNU row: Kanhaiya Kumar gets bail and a lesson on thoughts that ‘infect… (like) gangrene’, Indian Express, 3 March 2016.
  3. JNUSU president Kanhaiya Kumar gets clean chit in AAP government appointed probe, Economic Times, 3 March 2016.
  4. Kanhaiya Had Objected to Cancellation of Permission for Afzal Guru Event: JNU Registrar, Indian Express, 8 March 2016.
  5. समाचार. टाइम्स नाउ. २०१९ https://hindi.timesnownews.com/india/video/jnu-anti-national-slogans-charge-sheet-delhi-police-kanhaiya-kumar-umar-khalid-anirban-bhattacharya-terrorist-afzal-guru/347460. अभिगमन तिथि 13 अप्रैल 2019. गायब अथवा खाली |title= (मदद)
  6. "Begusarai Lok Sabha Election Result 2019: गिरिराज सिंह को मिली जीत".