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कोटा

कोटा राजस्थान, उत्तरी भारत में चंबल नदी पर बना एक शहर है
कोटा
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य राजस्थान
ज़िला को look
जनसंख्या
घनत्व
1,001,694[1] (2011 के अनुसार )
• 1,900/किमी2 (4,921/मील2)
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
527[1] कि.मी² ( वर्ग मील)
• 271 मीटर (889 फी॰)
आधिकारिक जालस्थल: kota.nic.in

निर्देशांक: 25°11′N 75°50′E / 25.18°N 75.83°E / 25.18; 75.83 कोटा राजस्थान का एक प्रमुख औद्योगिक एवं शैक्षणिक शहर है। यह चम्बल नदी के तट पर बसा हुआ है। कोटा राजधानी जयपुर से सडक एवं रेलमार्ग से लगभग २४० किलोमीटर की दूरी पर है। यह नगर जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग १२ पर स्थित है। दक्षिण राजस्थान में चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित कोटा उन शहरों में है जहां औद्योगीकरण बड़े पैमाने पर हुआ है। कोटा अनेक किलों, महलों, संग्रहालयों, मंदिरों और बगीचों के लिए लोकप्रिय है। यह शहर नवीनता और प्राचीनता का अनूठा मिश्रण है। जहां एक तरफ शहर के स्मारक प्राचीनता का बोध कराते हैं वहीं चंबल नदी पर बना हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लान्ट, न्यूक्लियर पावर प्लान्ट, डी सीएम और मल्टी मेटल आधुनिकता का एहसास कराता है। कोटा भारत का एक मात्र ऐसा शहर है जहां पर देश के हर कोने के लोग रह्ते हैं। ये शहर हाल ही मे वर्ल्ड ट्रेड फोरम की सूची में दुनिया का सातवा सबसे ज्यादा भीड भाड़ वाला शहर बना है। कोटा अपने बागों के लिये भी प्रसिद्ध है। यहाँ के मॉल पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं। कोटा राजस्थान का बहुत ही सुंदर शहर है कोटा को राजस्थान में शिक्षा नगरी के रूप में याद किया जाता है इसको राजस्थान का कानपुर कहते हैं कोटा शहर की जनसंख्या जयपुर के बाद में सबसे ज्यादा है।।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

अनुक्रम

भूगोलसंपादित करें

कोटा चम्बल नदी के पूर्वी तट पर स्थित है। यह राजस्थान के दक्षिणी भाग में आता है। यहां का भूगोलिक निर्देशांक है 25°11′N 75°50′E / 25.18°N 75.83°E / 25.18; 75.83.[2]। यहां का क्षेत्रफल है 12,436 कि॰मी॰² (राजस्थान राज्य का 3.63 % भूभाग).[3] यहां की औसत ऊंचाई है 271 मीटर (889 फीट).

परिधानसंपादित करें

 
कोटा की सूती साड़ी गोटा पत्ती बॉर्डर सहित

कोटा की विशेष सूती व कोटा डोरीया साड़ियां,कोटा स्टोन,कचोरी के लिए प्रसिद्ध हैं। कोटा को शिक्षा नगरी के नाम से भी जाना जाता हे।

इतिहाससंपादित करें

कोटा का इतिहास कोटिया भील से शुरू होता है। प्रारंभ में कोटा बूंदी राज्य का एक हिस्सा था। मुगल शासक जहांगीर ने जब बूंदी के शासकों को पराजित किया तो कोटा 1624 ई. में एक स्वतंत्र राज्य के रूप में स्थापित हुआ। राव माधो सिंह यहां के प्रथम स्वतंत्र शासक के रूप में गद्दी पर बैठे। 1818 ई. में कोटा ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया।

Princely City: कोटा
क्षेत्र हाड़ौती
ध्वज 19वीं शती  
स्वतंत्र: बूंदी राज्य
रियासत का अस्तित्व: 1579-1949
राजवंश राजपूत चौहान हाड़ा
राजधानीrnodiya कोटा

प्रमुख आकर्षणसंपादित करें

सिटी फोर्ट पैलेससंपादित करें

चंबल नदी के पूर्वी तट पर 17 वीं शताब्दी में बना यह किला कोटा का मुख्य आकर्षण है। इस किले का परिसर राजस्थान के सबसे विशाल किले परिसरों में है। 17 वीं शताब्दी में बना हाथी पोल किले में प्रवेश का खूबसूरत प्रवेश द्वार है। किले के बुर्ज, बालकनी, गुम्बद, परकोटे बेहद आकर्षक ह

राव माधो सिंह संग्रहालयसंपादित करें

यह संग्रहालय पुराने महल में स्थित है और इसे राजस्थान के सबसे बेहतरीन संग्रहालयों में माना जाता है। कोटा राज्य के प्रथम शासक राव माधो सिंह के नाम पर संग्रहालय का नाम रखा गया है। संग्रहालय में कोटा की खूबसूरत पेटिन्ग, मूर्तियों, तस्वीरें, हथियार और शाही वंश से संबंधित अनेक वस्तुएं देखी जा सकती हैं।

जगमंदिर महलसंपादित करें

 
उम्मेद भवन

यह महल कोटा की एक रानी द्वारा 1740 ई. में बनवाया गया था। खूबसूरत किशोर सागर झील के मध्य बना यह महल राजाओं के आमोद प्रमोद का स्थान था। झील के पारदर्शी जल में महल का प्रतिबिम्ब बेहद सुन्दर लगता है। किशोर सागर झील बूंदी के राजकुमार धी देह ने 1346 ई. में बनवाई थी। झील में नौकायन का आनन्द भी लिया जा सकता है।

सरकारी संग्रहालयसंपादित करें

किशोर सागर झील के समीप किशोर बाग में बने ब्रिजविलास महल में यह संग्रहालय स्थित है। संग्रहालय में दुर्लभ सिक्कों, हस्तलिपियों और चुनिन्दा हडोटी मूर्तियों का विस्तृत संग्रह है। यहां बरोली के मंदिरों से कुछ आकक और ऐतिहासिक मूर्तियां लाकर रखी गई हैं। शुक्रवार और राष्ट्रीय अवकाश के दिन संग्रहालय बन्द रहता है।

चम्बल गार्डनसंपादित करें

यह एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है और यहां मगरमच्छों का तालाब देखा जा सकता है। यह गार्डन चम्बल नदी और अमर निवास के समीप स्थित है।

देवताजी की हवेलीसंपादित करें

देवताजी की हवेली राजस्थान के सबसे सुन्दर भवनों में है। कोटा की यह हवेली अनोखे भित्तिचित्रों और चित्रकारी के लिए प्र सिद्ध है।

गणेश उद्यान (खड़े गणेश जी)संपादित करें

गणेश उद्यान कोटा का दूसरा सबसे मुख्य उद्यान है। यह उद्यान खड़े गणेश जी मंदिर के पास ही है। इसमे गणेश पवर्त भी है।

-- सी. वी गार्डन -- यह कोटा का ऎतिहसिक गार्डन है जहां आज भी कोटा के ऎतिहेसिक सौंदर्य को महसूस किया जा सकता है।

निकटवर्ती स्थलसंपादित करें

दड़ा वन्य जीव अभयारण्यसंपादित करें

कोटा से 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय चम्बल वन्य जीव अभयारण्य है जो घड़ियालों और पतले मुंह वाले मगरमच्छों के लिए बहुत लोकप्रिय है। यहां चीते, वाइल्डबोर, तेंदुए और हिरन भी पाए जाते हैं। बहुत कम जगह दिखाई देने वाला दुर्लभ कराकल भी यहां देखा जा सकता है।

केशव राय पाटनसंपादित करें

श्री केशव राय जी हडोती और हाडा के शासकों के इष्टदेव हैं। केशोरईपाटन भगवान श्री केशव का निवास स्थल है। श्री केशव का मध्यकालीन मंदिर चंबल नदी के किनार स्थित है। नदी की ओर वाली मंदिर की दीवार किले की दीवार के समान है। कार्तिक माह में आयोजित होने वाले मेले में यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। इस अवसर पर भक्तजन चम्बल नदी में डुबकी लगाते हैं और श्री कृष्ण के आशीर्वाद की कामना करते हैं। केशव राय पाटन कोटा से 22 किलोमीटर दूर उत्तर पूर्व में स्‍थित है।

गेपरनाथ मंदिरसंपादित करें

कोटा से 22 किलोमीटर दूर दक्षिण पश्चिम में शिव को समर्पित गेपरनाथ मंदिर चम्बल नदी के किनारे पर स्थित है। यह मंदिर 1569 ई. में बना था। यह स्थान प्राचीन काल से शिवभक्तों का प्रमुख तीर्थस्थल रहा है। यहां कुछ प्राचीन अभिलेख प्राप्त हुए हैं जो इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। सन् 2008 में एक बङी ही विस्मयी घटना ने समस्त कोटा वासीयो का दिल दहला दिया। करीब 250 व्यक्ति जो कि शिव मन्दिर में दर्शन करने वास्ते गये थे वो सीढिया टुट जाने बाबत् अन्दर ही फस गये। प्रशासन ने 2 दिन में कङी मेहनत कर उन्हे बाहर निकाला। गेपरनाथ में करीब 470 सीढिया है। करीब 350मीटर की गहरी खाई है।

बाड़ोलीसंपादित करें

यहां 9 वीं और 12 वीं शताब्दी के बीच बने अनेक प्राचीन मंदिर है। यह स्थान कदम, आम, जामुन और पीपल के पेड़ों से घिरा हिन्दुओं का पवित्र धार्मिक स्थल है। घाटेश्वर यहां का मुख्य मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर के सभा मंडप विशेषकर स्तम्भों में आकर्षक नक्काशियां की गई हैं। महिषासुरमर्दिनी और त्रिदेव मंदिर अन्य दो प्रमुख मंदिर है। इन मंदिरों की कुछ प्रतिमाएं कोटा के सरकारी संग्रहालय में रखी र्गइ हैं।

शिक्षासंपादित करें

कोटा की ख़ास पहचान यहां के कोचिंग संस्थान हैं। कोटा को भारत की "कोचिंग राजधानी" भी कहा जाता है।[4] हर साल इस शहर में लाखों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए आते हैं। पिछले कुछ सालों में कोटा एक प्रसिद्ध कोचिंग नगरी के रूप में उभरा है। शहर का शैक्षणिक क्षेत्र यहां की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है।[5] यहां कई कोचिंग संस्थान है जो विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे कि NEET/AIPMT, AIIMS, IIT की तैयारी करवाते हैं।[6][7]

प्रमुख विश्वविद्यालय और कॉलेजसंपादित करें

  • राजकिय वाणिज्य महाविद्यालय, कोटा
  • गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा
  • राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा
  • वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय
  • कोटा विश्वविद्यालय, कोटा
  • राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कोटा

प्रमुख कोचिंग संस्थानसंपादित करें

  • एलेन करियर इंस्टिट्यूट
  • मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड[8]
  • रेजोनेंस कोटा
  • करियर पॉइंट
  • बंसल क्लासेज
  • आकाश इंस्टिट्यूट
  • वाइब्रेंट अकादमी
  • " सर्वोत्तम इंस्टिट्यूट"*

आवागमनसंपादित करें

वायु मार्ग

नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर का सांगानेर विमानक्षेत्र है जो कोटा से 240 किलोमीटर दूर है। भारत के महानगरों से संगनेर के लिए प्रतिदिन उड़ानों की व्यवस्था है। वैसे कोटा में भी हवाईअड़ा है, किंतु वहां हाल में ही जयपुर के लिए उड़ानें उपलब्ध हैं। कोटा से जयपुर के लिए नियमित उड़ाने शुरू हो चुकी है

रेल मार्ग

कोटा जंक्शन भारतीय रेलवे की पश्चिम मध्य रेलवे इकाई के कोटा संभाग का संभागीय मुख्यालय है। कोटा सेन्ट्रल रेलवे हे निजामुद्दीन-उदयपुर एक्सप्रेस, जनशताब्दी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली से जुड़ा हुआ है। मुम्बई अगस्त क्रान्ति और त्रिवेन्द्रम राजधानी सुपरफास्ट ट्रेनों से भी कोटा पहुंचा जा सकता है। जयपुर से जयपुर-कोटा फास्ट पेसेन्जर और जयपुर- बॉम्बे सेन्ट्रल सुपरफास्ट ट्रैनों से कोटा जाया जा सकता है। कोटा ट्रेन रूट से दो रेलवे लाइन निकलती हे। चितौड़ के लिए एक भोपाल जबलपुर के लिए।

सड़क मार्ग

जयपुर से राष्ट्रीय राजमार्ग 12 से टोंक, देवली और बूंदी होते हुए कोटा पहुंचा जा सकता है। मुम्बई से राष्ट्रीय राजमार्ग 8 और 76 से चित्तौड़गढ़, भातेश्वर, भदौरा, बिचोर और बिलोजियां होते हुए कोटा पहुंचा जा सकता है।

मीडियासंपादित करें

रेडियोसंपादित करें

कोटा में कुल पाँच रेडियो स्टेशन हैं, जिनमें से चार का प्रसारण आवृत्ति मॉड्यूलेशन (एफएम) बैंड पर होता है और एक आकाशवाणी स्टेशन जो कि एम्प्लीट्यूड मोड्यूलेशन बैंड पर प्रासारित होता है।

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Kota District Census 2011 Handbook: VILLAGE AND TOWN WISE PRIMARY CENSUS ABSTRACT (PCA)" (PDF). Censusofindia.gov.in. पृ॰ 29 (pdf) Urban Section. अभिगमन तिथि 19 April 2016.
  2. Falling Rain Genomics, Inc - Kota
  3. Statistics by Govt. of Rajasthan
  4. Anjali Puri (31 December 2015). "How Kota became India's capital for educational coaching". Business Standard. अभिगमन तिथि 11 January 2016.
  5. "Kota: Where education is an industry". Entrepreneurindia.in. 2010-05-04. अभिगमन तिथि 2013-09-27.
  6. "The Sunday Tribune - Spectrum". Tribuneindia.com. अभिगमन तिथि 2013-09-27.
  7. "Home tips cut Kota JEE rush". Telegraphindia.com. 2013-04-29. अभिगमन तिथि 2013-09-27.
  8. "मोशन एजुकेशन के छात्रों ने किया पौधरोपण". दैनिक भास्कर. 27 अगस्त 2016. अभिगमन तिथि 17 जून 2017.

विस्तृत पठनसंपादित करें

  • Tod James Annals and Antiquities of Rajasthan: Or, The Central and Western Rajpoot States of India Published 2001 Asian Educational Services ISBN 81-206-1289-2 pp. 407–690