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राजस्थानी भाषा प्रमुख रूप से भारत में राजस्थान प्रदेश में बोली जाने वाली भाषा है। राजस्थानी भाषा भारत में लगभग नौ करोङ लोगो के द्वारा बोली जाती है। इस भाषा की कई उप बोलियाँ है। इस भाषा की सर्वाधिक बङी उप बोली मारवाङी है, जो लगभग 4.5 करोङ से 5 करोङ लोगो द्वारा बोली जाती है।

राजस्थानी
राजस्थानी
बोलने का  स्थान भारत, पाकिस्तान
मातृभाषी वक्ता २,००,००,०००
भाषा परिवार
लिपि देवनागरी
भाषा कोड
आइएसओ 639-2 raj
आइएसओ 639-3 raj

हिन्दी, ब्रजभाषा, मेवाती, मारवाड़ी,शेखावाटी, हाड़ौती जैसी कई भाषाओं के मिश्रित झुंड को राजस्थानी भाषा का नाम दिया गया इसे पहले हूङिया लिपि मे लिखते थे।इसे वर्तमान में देवनागरी में लिखा जाता है।

राजस्थानी भाषा भारत के राजस्थान प्रान्त व मालवा क्षेत्र तथा पाकिस्तान के कुछ भागों में करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा है। इस भाषा का इतिहास बहुत पुराना है। इस भाषा में प्राचीन साहित्य विपुल मात्रा में उपलब्ध है। इस भाषा में विपुल मात्रा में लोक गीत, संगीत, नृत्य, नाटक, कथा, कहानी आदि उपलब्ध हैं। इस भाषा को सरकारी मान्यता प्राप्त नहीं है। इस कारण इसे स्कूलों में पढाया नहीं जाता है। इस कारण शिक्षित वर्ग धीरे धीरे इस भाषा का उपयोग छोड़ रहा है, परिणामस्वरूप, यह भाषा धीरे धीरे ह्रास की और अग्रसर है। कुछ मातृभाषा प्रेमी अच्छे व्यक्ति इस भाषा को सरकारी मान्यता दिलाने के प्रयास में लगे हुए हैं।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

राजस्थानी भाषा के लेखक और कविसंपादित करें

चंदरबरदाई

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें