जनता पार्टी

भारत का एक राजनैतिक दल


प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लागू आपातकाल (1975-1976) के बाद जनसंघ सहित भारत के प्रमुख राजनैतिक दलों का विलय कर के एक नए दल जनता पार्टी का गठन किया गया। जनता पार्टी ने 1977 से 1980 तक भारत सरकार का नेतृत्व किया। आंतरिक मतभेदों के कारण जनता पार्टी 1980 में टूट गयी।

जनता पार्टी
Morarji Desai 1978.jpg
भारतीय प्रधान मंत्री मोरारजी देसाई (1977-1979)
जनता पार्टी
संक्षेपाक्षर JNP
गठन 23 जनवरी 1977; 46 वर्ष पहले (1977-01-23)
मुख्यालय G-42, East Vinod Nagar, New Delhi - 110091
विचारधारा Indian nationalism
Populism
Factions:
Gandhian socialism
Social justice
Anti-corruption
रंग    Orange, Green
युवा शाखा Janata Yuva Morcha
जालस्थल www.janataparty.co.in
Election symbol
भारत की राजनीति
राजनैतिक दल
चुनाव

भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी एवं अन्य महान दिवंगत नेताओं की जनता पार्टी का स्थापना दिवस समारोह लखनऊ उत्तर प्रदेश में 23 जनवरी 2022 को मनाया गया जिसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे और जनता पार्टी को फिर से चलाने का निर्णय लिया गया है, जनता पार्टी का इतिहास पूर्व से ही अच्छा रहा है यह देश हित में कार्य करने वाली पार्टी है, नवनिर्वाचित जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विजयकुमार रामकिंकर झा जी हैं, जो राष्ट्र भ्रमण कर जनता पार्टी के उत्थान में लगे हुए हैं और देश के युवाओं को जो देश की राजनीति को पुनः यथोचित करने का साहस रखते हैं।

वर्ष 1954 में भारत सरकार ने चार प्रकार के सम्मान प्रारंभ किए भारत रत्न, पदम विभूषण ,पदम भूषण एवं पदम श्री आलोचकों ने इसका तीव्र विरोध करते हुए कहा कि यह उद्देशिका में वर्णित प्रतिष्ठा एवं समता के अधिकार के विरुद्ध है परिणाम स्वरूप वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने इन सम्मान को समाप्त कर दिया परंतु इंदिरा गांधी सरकार ने वर्ष 1980 में इस सम्मान को प्रारंभ कर दिया जिसे न्यायपालिका में चुनौती दी गई जिसमें न्यायपालिका महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि उपाधियों में अंतर होता है भारत रत्न पुरस्कार सामंतवादी उपाधियां नहीं है न्यायालय के अनुसार समानता का अभिप्राय नहीं है की विशिष्टता या गुणवत्ता का सम्मान न किया जाए बालाजी राघव वाद वर्ष 1994 मे न्यायपालिका ने पुरस्कार एवं उपाधि दोनों में अंतर बताया इस बाद में न्यायपालिका ने पदम विभूषण पदम भूषण एवं पदम श्री को उचित ठहराया तथा कहा कि यह पुरस्कार है उपाधि नहीं न्यायालय के अनुसार इसका प्रयोग किसी व्यक्ति के नाम के पहले नहीं होना चाहिए

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