डांगी राजस्थान के मुख्य रूप से उदयपुर और इसके आसपास के जिलों में रहने वाला किसान वर्ग है। जो अपना उद्भव गुजरात के पावागढ़ क्षेत्र को मानते हैं।[1] सरकार ने डांगी वर्ग को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में वर्गीकृत किया है।

डाँगी अपने वर्ग में शिक्षा और खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहन कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।[2]

पहनावासंपादित करें

पुरुष धोती, अंगरखा,पहनते हैं तथा महिलाएं घाघरा, कांछली, चुंदड़ी या पोमछा ओढ़तीं है।

आभूषणों में महिलाएं कड़ियां, नेवरियां, जांजरियां, सड़प, गाणी, नथ, बोर कंदोरा, हांली, ओगनिया, गाला, फोलरी, दामणा आदि पहनतीं हैं तो पुरुष मिरकी, लंगर, कंदोरा, मुंदरी आदि पहनते हैं।

लोक नृत्य व रीति रिवाजसंपादित करें

होली के समय पुरुषों का गैर नृत्य उल्लेखनीय तो महिलाओं का गणगौर, घूमर आदि।

वहीं मृत्यु भोज और पंचायती जैसी कुुुरीतियां मौजूद है। तो शादियां में भेरू पूजन, रोड़ी नूतन, हेवरा,तोरण,डोरडा खोलना आदि परंपराएं मौजूद है साथ ही बैंड-बाजे पर सामाजिक प्रतिबंध है।

संदर्भसंपादित करें

  1. "डांगी समाज के हर घर से एक सदस्य हार्दिक से मिलेगा". Dainik Bhaskar. अभिगमन तिथि 2021-05-31.
  2. Rao, Surendra. "डांगी समाज की प्रतिभाएं सम्मानित". Patrika News. अभिगमन तिथि 2021-05-31.