तैत्तिरीय ब्राह्मण कृष्णयजुर्वेदीय तैत्तिरीय शाखा का ब्राह्मण ग्रन्थ है। इसमें तीन काण्ड हैं। इसका पाठ स्वरयुक्त उपलब्ध होता है। इससे इसकी प्राचीनता सिद्ध होती है। तैत्तिरीय ब्राह्मण के प्रथम एवं द्वितीय कांड में बारह प्रपाठक एवं तृतीय कांड में तेरह प्रपाठक हैं। प्रपाठक अनुवाकों में विभक्त हैं। कुल अनुवाकों की संख्या ३०८ हैं। कृष्ण यजुर्वेदीय तैत्तिरीय संहिता में जिन यज्ञों का प्रतिपादन हुआ है उनकी विधियों का इस ब्राह्मण ग्रन्थ में विस्तारपूर्वक वर्णन है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें