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यशवंतपुर, बंगलौर से दिल्लि के बीच चलने वाली दुरन्त एक्सप्रेस

दुरन्त एक्सप्रेस (बांग्ला: দুরন্ত "तुरंत"), भारतीय रेल की लंबी दूरी की गाड़ियों का एक वर्ग है। इन गाड़ियों की विशेषता यह है कि, तकनीकी विरामों को छोड़कर यह स्रोत से गंतव्य तक का सफर बिना रुके (अविराम) तय करती हैं।[1] सभी दुरन्त एक्सप्रेस गाड़ियों को आसानी से उनके विशेष पीले हरे रंग के यात्री डिब्बों (परिच्छद) द्वारा पहचाना जा सकता है। कई दुरन्त एक्सप्रेस सेवायें भारत के महानगरों और प्रमुख राज्यों की राजधानियों के बीच संचालित होती। अधिकतर समय, किन्हीं दो शहरो के बीच दुरन्त एक्सप्रेस गाड़ियां सबसे तेज परिवहन उपलब्ध कराती हैं, हालांकि यह जरूरी नहीं कि यह तथ्य सभी सेवाओं के लिए सच हो।

पृष्ठभूमिसंपादित करें

 
दुरन्त एक्सप्रेस मानचित्र

भारत सरकार का रेल मंत्रालय पिछले कई वर्षों से भारत में तेजगति की रेल सेवा आरंभ करने का प्रयास कर रहा है। 2007 में, रेल मंत्रालय ने दिल्ली और अमृतसर के बीच एक व्यवहार्यता-पूर्व अध्ययन के लिए 500 किलोमीटर का फ़ासला चुना। दिल्ली-अमृतसर गलियारे के निर्माण में 25,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। 19 जनवरी 2009 को, पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने कहा कि उनका मंत्रालय कुछ चुनिंदा मार्गों पर तेज गति की रेल सेवा आरंभ करने के लिए वैश्विक सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरु करने जा रहा है। दिल्ली-अमृतसर रेलमार्ग के अतिरिक्त योजना में पुणे-मुंबई-अहमदाबाद, हैदराबाद-दोरनाकल-विजयवाड़ा-चेन्नई, चेन्नई-बंगलौर-कोयम्बटूर-एरणाकुलम और हावड़ा-हल्दिया भी शामिल हैं, हालाँकि भारत में तेज गति की रेल सेवायें अपने निर्माण में एक लंबा समय लेंगी। इस बीच, भारत की नयी रेल मंत्री ममता बनर्जी ने 2009-10 के भारतीय रेल बजट में अविराम दुरन्त एक्सप्रेस गाड़ियों की घोषणा कर भारत में तेज गति की रेल सेवा आरंभ करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया।


सन्दर्भसंपादित करें

  1. "रेल सेवायें: पूर्वी रेलवे". भारतीय रेलवे. अभिगमन तिथि 15 नवम्बर 2013.

इन्हें भी देखेंसंपादित करें