नवयान

बौद्ध धर्म की शाखा/सम्प्रदाय

नवयान बौद्ध धर्म का एक सम्प्रदाय हैं, जो भारतीय बौद्ध नेता भीमराव आम्बेडकर द्वारा निर्मीत हैं। नवयान का अर्थ है - "नया मार्ग"। इस बौद्ध धर्म के सारे अनुयायि "आम्बेडकरवादी बौद्ध" होते हैं, इन बौद्धों का आम्बेडकर द्वारा निर्धारीत बाईस प्रतिज्ञाओं का पालन अनिवार्य तथा महत्वपूर्ण माना जाता हैं, जो आम्बेडकर ने 14 अक्तुबर 1956 के धर्म परिवर्तन समारोह दी थी। आम्बेडकर के इन धर्म परिवर्तीत बौद्ध अनुयायिओं को भारत सरकार तथा अन्य राज्य राज्य सरकारों ने "नवबौद्ध" नामक संज्ञा दी हैं। नवयान संप्रदाय महायान, थेरवाद और वज्रयान आदी कुछ मामलों में भिन्न हैं। 2011 के अनुसार, कुल भारतीय बौद्धों में अधिकांश यानी 87% हिस्सा नवयानी बौद्धों (नवबौद्ध) का हैं। अन्य अनुमानो के अनुसार, भारत में भारत में नवयानी बौद्धों की आबादी 5 से 7 करोड़ तक हैं।[1]

नवयान बौद्ध आम्बेडकर जी के तस्वीर के साथ

आम्बेडकर व पत्रकार वार्तासंपादित करें

आम्बेडकर को बौद्ध धर्म का स्वीकार करने से एक दिन पूर्व पत्रकार ने पूछा की, ‘आप जो बौद्ध धर्म अपनाने वाले है वो महायान बौद्ध धर्म होगा या हीनयान बौद्ध धर्म ?’ उत्तर में आम्बेडकर ने कहा की, ‘‘मेरा बौद्ध धर्म न तो महायान होगा और न ही हीनयान होगां, इन दोनों संप्रदायों में कुछ अंधविश्वासी बातें हैं इसलिए मेरा ये बौद्ध धर्म नवयान बौद्ध धर्म होंगा। जिसमें किसी बुद्ध के मूल सिद्धांत और केवल विवेकवादी सिद्धांत ही होंगे, कोई भी कुरीतियों या अंधविश्वास नहीं होंगा। यह एक ‘शुद्ध बौद्ध धर्म’ होंगा।’’ पत्रकार ने फिर पूछां, “क्या हम इसे 'भीमयान' कह सकते हैं?” आम्बेडकर ने कहा की, आप कह सकते हैं किंतु मैं नहीं कहुंगा। क्योंकि मैं खुद को गौतम बुद्ध के समान नहीं लाना चाहता।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

भारत के नवयानी बौद्ध बोधिसत्व भीमराव आम्बेडकर और गौतम बुद्ध को ही समान ही सम्मान देते है, क्योंकि वे भीमराव आम्बेडकर को अपने आध्यात्मिक बौद्ध नेता तथा बुद्ध को अपने मार्गदाता मानते है।

शुरूवातसंपादित करें

वर्तमान भारत में जब-जब भगवान बुद्ध को स्मरण किया जाता है, तब-तब स्वाभाविक रूप से भीमराव आम्बेडकर का भी नाम लिया जाता है। भारतीय स्वतंत्रता के बाद बहुत बड़ी संख्या में एक साथ डॉ॰ आंबेडकर के नेतृत्व में सामूदायिक बौद्ध धम्म परिवर्तन हुआ था। 14 अक्तूबर, 1956 को नागपुर में यह दीक्षा सम्पन्न हुई, जिसमें आम्बेडकर के 5,00,000 समर्थक बौद्ध बने है, अगले दिन 2,00,000 एवं तिसरे दिन 16 अक्टूबर को चन्द्रपुर में 3,00,000 अनुयायी बौद्ध बने। इस तरह 10 लाख से भी अधिक लोगों तो आम्बेडकर ने केवल तीन दिन में बौद्ध बनाया था।[कृपया उद्धरण जोड़ें] इस घटना से भारत में बौद्ध धर्म का पुनरूत्थान या पुनर्जन्म हुआ। एक अनुमान के अनुसार मार्च 1959 तक 1.5 से 2 करोड़ लोग बौद्ध बने थे। बौद्ध धर्म भारत के प्रमुख धर्मों में से एक है तथा अनौपचारिक रूप से भारत का तिसरा सबसे बड़ा धर्म है।

धम्म ग्रंथसंपादित करें

सिद्धांतसंपादित करें

मैं स्वीकार करता हूँ और बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करूंगा। मैं हीनयान और महायान, दो धार्मिक आदेशों की अलग अलग राय से मेरे लोगों को दूर रखूंगा। हमारा बौद्ध धर्म एक नया बौद्ध धर्म, नवयान है।
डॉ॰ भीमराव आम्बेडकर, शाम होटल, नागपुर में 13 अक्टूबर 1956 को प्रेस साक्षात्कार[2]

बौद्धों का विकाससंपादित करें

बीते सालों में नवबौद्धों की हालत सुधरी है। 125वी आंबेडकर जयंती पर रोहित वेमुला की मां और भाई ने भी बौद्ध धर्म स्वीकार किया है।

बौद्धों का जीवन सुधारसंपादित करें

सन 2001 की जनगणना के मुताबिक देश में बौद्धों की जनसंख्या अस्सी लाख है जिनमें से अधिकांश बौद्ध (नवबौद्ध) यानि हिंदू दलितों से धर्म बदल कर बने हैं।

सबसे अधिक 59 लाख बौद्ध महाराष्ट्र में बने हैं। उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 लाख के आसपास नवबौद्ध हैं। पूरे देश में 1991 से 2001 के बीच बौद्धों की आबादी में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। [3]

1. लिंग अनुपात

बौद्धों के बीच महिला और पुरुष का लिंग अनुपात 921 प्रति हजार है। हिन्दुओं (952), मुसलमानों (896), सिख (940) और जैन (944)

2. बच्चों का लिंग अनुपात (0-6 वर्ष)

2001 की जनगणना के अनुसार बौद्धों के बीच लड़कियों और लड़कों का लिंग अनुपात 928 हैं। हिन्दुओं (942), सिख (935) और जैन (940)।

3. साक्षरता दर

बौद्ध अनुयायिओं की साक्षरता दर 52.7 प्रतिशत हैं। इस दर में भी हिंदुओं (72.1), मुसलमानों (62.1) और सिखों (69.4)

4. महिलाओं की साक्षरता

बौद्ध महिलाओं की साक्षरता दर 41.9 प्रतिशत है। हिंदुओं (66.7) और मुसलमानों (50.1)

5. काम में भागीदारी दर

बौद्धों के लिए यह दर 30.6 हैं। यह दर हिंदुओं (46.4), मुसलमानों (31.3) ईसाई (32.0), सिख (42.4) जैन (45.7)।

जनसंख्यासंपादित करें

भारतीय बौद्धों में 95% से अधिक नवयानी बौद्ध हैं। 2011 की भारतीय जनगनणा के अनुसार भारत में ‘अधिकृत’ बौद्ध करीब 85 लाख 0.7% हैं, लेकिन अन्य सर्वेक्षण और बौद्ध विद्वानों ने अनुसार भारत में 5% से 7% या 6 करोड़ से ८ करोड़ बौद्ध हैं।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. https://m.navbharattimes.indiatimes.com/india/buddhists-to-benefit-the-government-will-change-the-format-of-caste-certificate/articleshow/52872090.cms
  2. https://web.archive.org/web/20110208224554/http://www.navayan.com/navayan.php?about-navayan
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 21 दिसंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 16 दिसंबर 2016.

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें