उत्तरप्रदेश ललितपुर जिलान्तर्गत महरौनी तहसील के सौजना थाना में 78.80 देशान्तर एवं 24.34 पर स्थित राजस्व ग्राम नवाई में प्रागैतिहासिक क्षेत्र नवागढ़ है,  ज्वालामुखी लावे से निर्मिति चट्टानों के मध्य कई प्राकृतिक गुफायें है, यहाँ  लघु पहाड़ियों की श्रृंखलाये है जिनमें रॉक आर्ट सोसायटी भारत के महासचिव डॉ.गीरिराजकुमार, दयाल बाग़ इंस्टिट्यूशन आगरा  कई दिन तक सतत सर्वेक्षण करके पाषाणकालीन औजारों एवं कल्प मार्ग 10000 वर्ष प्राचीन का अन्वेषण किया है ।

नवागढ़
नवागढ
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नवागढ़ में भगवान अरहनाथ, चंदेल कालीन
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धतादिगंबर जैन
देवताअरहनाथ
त्यौहारमहावीर जयंती
अवस्थिति जानकारी
अवस्थितिललितपुर, उत्तर प्रदेश
भौगोलिक निर्देशांक24°33′22″N 78°56′06″E / 24.556°N 78.935°E / 24.556; 78.935निर्देशांक: 24°33′22″N 78°56′06″E / 24.556°N 78.935°E / 24.556; 78.935
वास्तु विवरण
स्थापित12वीं शताब्दी
मंदिर संख्या1

इस अन्वेषण में प्रीमैचुलियन(२ लाख से ५ वर्ष प्राचीन) मिडिल  मिडिल मैचुलियन (३५ हजार से २ लाख वर्ष) पोस्ट मैचुलियन (१५ हजार से ३५ हजार वर्ष) के औजारों की श्रृंखला प्राप्त हुई है,

डॉ मारुतिनंदन प्रसाद  तिवारी काशी हिन्दु विश्वविद्यालय वाराणसी के अनुसार प्राकृतिक गुफाओं में गुप्तकालीन(तीसरी सदीं) कायोत्सर्ग मुद्रा एवं चरण चिन्ह उत्कीर्ण हैं इससे सिद्ध होता है नवागढ़ प्राचीन नंदपुर की स्थापना गुप्तकाल में हो गई थी । जहाँ निरन्तरजैन संतो का आवागमन तथा  साधना इन गुफाओं में करते थे, जैन पहाड़ियों पर स्थित कच्छप शिला के आधार में संतों का शयन स्थल इसका साक्ष्य है,

कच्छय शिला के आधार एवं छत में चित्रित ब्र. जयनिशांत के द्वारा अन्वेषित ६-८ हजार वर्ष प्राचीन शैल चित्रों की श्रृंखला है जिनके अधिकांश चित्रऋतू क्षरित होकर नष्ट हो चुके हैं, शेष  चित्र भी नष्ट होने की कगार पर है । इन शैल चित्रों में जैन दर्शन के कई रहस्य छुपे हैं, जिनका अन्वेषण डॉ स्नेहरानी जैन सर हरिसिंह गौर विश्व विद्यालयसागर एवं डॉ.भागचन्द्र भागेन्दु सचिव मध्यप्रदेश शासन के द्वारा हो रहा हैं,

पहाडी के निकट प्राप्त मिट्टी एवं पाषाण के  मनके तथा मृद भांड यहाँ मानव संस्कृति के साक्ष्य हैं,  प्रतिहार  कालीन(७२५ ई.) कालीन  मूर्ति शिल्प से सिद्ध होता हैं यहाँ जिनालयों का निर्माण ५वी. ६ वी. सदी में हो चुका था, यहाँ की सांस्कृतिक धार्मिक धरोहरों को चंदेल शासक  शासक धंगदेव (९५० ई.) मदन वर्मन (११२८ ई.) विकास के विशेष आयाम स्थापित हुए है ।

नवागढ़ में प्राप्त विशेष  विभिन्न मुकुटो वाले राजाओं सामन्तों एवं महारानियो के शीर्षों के अन्वेषण डॉ काशीप्रसाद त्रिपाठी श्री हरि विष्णु अवस्थी इतिहास विद टीकमगढ, डॉ एस. के. दुबे संग्रहालय अधिकारी झाँसी, नरेश पाठक पुरातत्वविद ग्वालियर इसे विशेष व्यापारिक केन्द्र समुन्नत नगर विशिष्ट राज्य सत्ता वाला नगर घोषित करते है,

कालिंजर प्रबोध कृति में डॉ हरिओम तत्सत लिखते है चंदेल शासक मदन वर्मन के काल में महोबा, मदनपुर, देवगढ, नवागढ़, पपौरा, सिरोन मदनेशपुर(अहार जी) का विशेष विकास हुआ, नवागढ़ प्राचीन नंदपुर की विशेष ख्याति रही है इसीलिए अहार जी के मूलनायक शांतिनाथ, पपौरा क्षेत्र के आदिनाथ की प्रशस्ति (अभिलेख) में उसका नाम उल्लेख हैं,

डॉ काशीप्रसाद त्रिपाठी ने बुंदेलखंड का वृहद इतिहास में उल्लेख किया है, मदनपुर के अभिलेख अनुसार सन ११८२ ई. में (सम्बत १२३९) में चंदेल शासक परमहृदेव से युद्ध करते हुए पृथ्वीराज चौहान ने महोबा, लासपुर, मदनपुर के साथ नवागढ़ को भी ध्वस्त किया था,

प.गुलाबचंद्र पुष्पजी 'प्रतिष्ठाचार्य' ककरवाहा टीकमगढ़ ने अप्रैल १९५९ में टीले पर स्थित इमली वृक्ष के नीचे भूगर्भ में स्थित जैन धर्म के अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ स्वामी के  अरहरनाथस्वामी के कायोत्सर्ग मूर्ति का अन्वेषण किया खनन कार्य में यहाँ कई जिनालयों के साक्ष्य मिले परन्तु अर्थ भाव में इनका खनन कार्य नहीं हो सका, संग्रहालय में संगठित कायोत्सर्ग एवं पद्माशन  मुद्रा की खंडित विशाल प्रतिमाएं इसका साक्ष्य है

नवागढ़ तीर्थ

तीर्थ का विकास पं गुलाबचंद्र पुष्पा द्वारा किया गया है। जिन्होंने कई जैन मंदिरों की स्थापना के लिए प्रतिष्ठाचार्य के रूप में सेवा की है,

 
Sojna Stambhas with Upadhyaya images
 
Ancient artifacts in the sangrahalaya

सुविधाएँ

यहाँ धर्मशाळा में 20 कमरे उपलब्ध है और साथ ही शुद्ध और स्वादिष्ट भोजन हेतु भोजन शाला भी है.

आस पास के धार्मिक क्षेत्र

अतिशय क्षेत्र: पपौरा जी 30 किमी., सिद्ध क्षेत्र अहारजी 55 किमी., सिद्ध क्षेत्र द्रोंणगिरी 55 किमी., सिद्ध क्षेत्र बड़ागाँव 15 किमी.

तस्वीरें

यह भी देखे

सन्दर्भ

1. https://en.wikipedia.org/wiki/Navagarh

बाहरी कड़ी