स्वतंत्रता के पश्चात हिन्दी साहित्य में जिन नई विचारधाराओं का जन्म हुआ उसमें प्रगतिशील विचारधारा प्रमुख थी। नागार्जुन, शमशेर और त्रिलोचन इस विचारधारा के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं। इन तीनों को प्रगतिशील त्रयी के नाम से संबोधित किया जाता है।