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बांसवाड़ा भारतीय राज्य राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित एक शहर है। यह गुजरात और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों की सीमा के निकट है। बांसवाड़ा की स्‍थापना वाहिया चरपोटा ने की थी, जो एक भील राजा था। वाहिया को राजा बांसिया भील के नाम से भी जाना जाता हैा बांसवाडा के राजा बां‍सिया के नाम पर ही इसका नाम बांसवाड़ा पड़ा। इसे "सौ द्वीपों का नगर" भी कहते हैं क्योंकि यहाँ से होकर बहने वाली माही नदी में अनेकानेक से द्वीप हैं। बांसवाड़ा के आसपास का क्षेत्र अन्य क्षेत्रों की तुलना में समतल और उपजाऊ है, माही बांसवाड़ा की प्रमुख नदी है। मक्का, गेहूँ और चना बांसवाड़ा की प्रमुख फ़सलें हैं। बांसवाड़ा में लोह-अयस्क, सीसा, जस्ता, चांदी और मैंगनीज पाया जाता है। इस क्षेत्र का गठन 1530 में बांसवाड़ा रजवाड़े के रूप में किया गया था और बांसवाड़ा शहर इसकी राजधानी था। 1948 में राजस्थान राज्य में विलय होने से पहले यह मूल डूंगरपुर राज्य का एक भाग था।

बांसवाड़ा
Banswara
नगर
बांसवाड़ा की राजस्थान के मानचित्र पर अवस्थिति
बांसवाड़ा
बांसवाड़ा
राजस्थान में स्थिति
निर्देशांक: 23°33′N 74°27′E / 23.55°N 74.45°E / 23.55; 74.45निर्देशांक: 23°33′N 74°27′E / 23.55°N 74.45°E / 23.55; 74.45
देशFlag of India.svg भारत
राज्यराजस्थान
ज़िलाबांसवाड़ा ज़िला
ऊँचाई302 मी (991 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल1,00,128
भाषाएँ
 • आधिकारिकहिन्दी
समय मण्डलIST (यूटीसी+5:30)
पिन327001
टेलीफोन कोड02962
वाहन पंजीकरणRJ-03
लिंगानुपात954 प्रति 1000 पुरुष /
वेबसाइटbanswara.rajasthan.gov.in

परिचयसंपादित करें

ऐतिहासिक तौर पर वागड़ राज्य की स्थापना के कई तथ्य पाए जाते हैं। एक मान्यता के अनुसार बंसिया भील ने बांसवाड़ा (Banswara) की नीव रखी थी जबकि एक दूसरा मत यह है कि गुहिलोतों ने वागड़ राज्य की स्थापना की थी। इन तथ्यों के बावजूद ज्यादातर यही माना जाता है कि इस राज्य के वास्तिवक संस्थापक सामन्तसिंह थे। उन्होंने 1179 ईस्वी के लगभग वागड़ प्रदेश को अधिकृत किया। सामन्तसिंह के पुत्र सिंहडदेव के पौत्र वीरसिंह देव (विक्रम सम्वत 1343—1349) तक वागड़ के गुहिलवं​शीय राजाओं की राजधानी बड़ौदा—डूंगरपुर थी। जब वीरसिंह के पोते डूंगरसिंह ने डूंगरपुर शहर बसाकर इसे अपनी राजधानी बनाया तब से वागड़ के राज्य का नाम उसकी नई राजधानी के नाम से डूंगरपुर प्रसिद्ध हुआ। कस्बे के पूर्व में प्रतिवेशी पहाड़ियों द्वारा बने एक गर्त में बाई तालाब नाम से ज्ञात एक कृत्रिम तालाब है जो महारावल जगमाल की रानी द्वारा निर्मित बताया जाता है। लगभग 1 किलोमीटर दूर रियासत के शासकों की छतरियां हैं। कस्बे में कुछ हिन्दूजैन मन्दिर व एक पुरानी मस्जिद भी है। अब्दुल्ला पीर दरगाह निकटस्थ ग्राम भवानपुरा में स्थित है। इस स्थान पर प्रतिवर्ष बोहरा जाति के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं। माही परियोजना बांध की नहरों में पानी वितरण के लिए शहर के पास निर्मित कागदी पिक-अप-वियर है जो सैलानियों के लिए आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। बांसवाडा का नामांकरण भील सरदार बांसिया के नाम पर हुआ

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें