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बुड्ढा मिल गया (1971 फ़िल्म)

हिन्दी भाषा में प्रदर्शित चलवित्र

संक्षेपसंपादित करें

अजय (नवीन निश्चल) और भोला (देवेन वर्मा) नौकरी की तलाश में दो दोस्त हैं। एक दिन अख़बार में वे एक ग़ुमशुदा व्यक्ति की तलाश का इश्तिहार पढ़ते हैं जिसमें उस व्यक्ति की करोड़ों की जायदाद का ज़िक्र है। उनको वह व्यक्ति (ओम प्रकाश) मुंबई के हॅन्गिंग गार्डन में मिल जाता है और दोनों दोस्त उसको अपना चाचा बनाकर अपने किराये के घर में ले आते हैं जिसका किराया भी वे अदा नहीं कर पा रहे हैं। यह बुड्ढा गिरधारी लाल अजय की दोस्त दीपा (अर्चना) पर ज़्यादा ही मेहरबान होने लगता है।
इधर अजय और भोला गिरधारी लाल को वापस पहुँचाकर अमीर बनने की जुगत में लगे होते हैं और उधर गिरधारी लाल के व्यवसाय के पुराने साथी एक के बाद एक मारे जा रहे होते हैं और शक़ की सूई इन बेचारे दो दोस्तों पर पड़ रही होती है। हर वारदात के बाद गिरधारी लाल आयो कहाँ से घनश्याम गीत गाता हुआ देखा जाता है। दोनों दोस्तों का यह मानना है कि ये सारी हत्याएँ या तो गिरधारी लाल ख़ुद कर रहा है या किसी से करवा रहा है और दोनों जासूस बनकर गिरधारी लाल का पीछा करने का मन बना लेते हैं।

चरित्रसंपादित करें

मुख्य कलाकारसंपादित करें

दलसंपादित करें

संगीतसंपादित करें

इस फ़िल्म में संगीत दिया है राहुल देव बर्मन ने और गीत लिखे हैं मजरुह सुल्तानपुरी ने। इनमें से कुछ गीत अपने ज़माने में काफ़ी मशहूर हुये थे।

बुड्ढा मिल गया के गीत
गीत गायक
आयो कहाँ से घनश्याम मन्ना डे, अर्चना
भली भली से एक सूरत भला सा एक नाम किशोर कुमार, आशा भोंसले
जिया न लागे मोरा लता मंगेशकर
मैं बुड्ढा लंबो लंबो मन्ना डे, लता मंगेशकर
रात कली एक ख़्वाब में आयी किशोर कुमार

रोचक तथ्यसंपादित करें

परिणामसंपादित करें

बौक्स ऑफिससंपादित करें

यह फ़िल्म हिट रही थी।

समीक्षाएँसंपादित करें

नामांकन और पुरस्कारसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें