बैटरी का इतिहास विद्युतरासायनिक सेलों के विकास का इतिहास है। बैटरियों के विकास से ही विद्युत का औद्योगिक उपयोग आरभ हुआ। उन्नीसवीं शताब्दी के अन्तिम दिनों तक बैटरियाँ ही विद्युत ऊर्जा के मुख्य स्रोत थीं क्योंकि तब तक विद्युत जनित्र का आविष्कार नहीं हुआ था।

काँच के लिंकित संधारित्रों की 'बैटरी'

बैटरी की प्रौद्योगिकी में लगातार विकास हुआ जिनके बिना टेलीग्राफ, टेलीफोन, पोर्टेबल कम्प्यूटर, मोबाइल फोन, विद्युत कारों आदि का विकास नहीं हो सकता था।

सन् 1749 बेंजामिन फ्रैंकलिन ने 'बैटरी' शब्द का इस्तेमाल किया था। विद्युत-सम्बन्धी प्रयोगों के लिये वे जिन 'लिंक्ड कैपेसिटर्स' का प्रयोग करते थे, उनको उन्होने 'बैटरी' की संज्ञा दी। बैटरी की खोज अलेक्जेंडर वोल्टा ने की थी।

कालक्रमसंपादित करें

  • १८०० : वोल्टा का 'पाइल' - विद्युत उत्पन्न करने का पहला व्यावहारिक उपाय था जिसे वोल्टा ने खोजा।
  • 1836 : डेनियल सेल
  • 1839 : ईंधन सेल
  • 1839 से 1842 : बैटरियों में विविध सुधार ; द्रव के बने एलेक्ट्रोड की बैटरियाँ
  • 1859 : पुनर्भरणीय बैटरी - गास्टन प्लान्ते (Gaston Plante) नामक फ्रांसीसी अन्वेषक ने पहला व्यावहारिक लेड-एसिड बैटरी विकसित किया जिसे डिस्चार्ज होने के बाद पुनः चार्ज किया जा सकता था।
  • 1866 : लेक्लांची का कार्बन-जिंक सेल
  • 1881 : कार्ल गैसनर (Carl Gassner) ने व्यावसायिक दृष्टि से सफल पहला शुष्क सेल विकसित किया। यह जिंक-कॉपर सेल था।
  • 1899 : प्रथम निकल-कैडमियम रिचार्जेबल सेल का आविष्कार
  • 1901 : एल्कली स्टोरेज बैटरी (थॉमस अल्वा एडिसन)
  • 1949 : एल्कलाइन-मैंगनीज बैटरी
  • 1954 : सौर सेल (Gerald Pearson, Calvin Fuller और Daryl Chapin)
  • 1964 : ड्यूरासेल (Duracell) की संस्थापना

Parmaanu battery ka aviskar hanery musaley ne kiya