भाई नन्द लाल (फारसी : بھائی نند لال; गुरुमुखी : ਭਾਈ ਨੰਦ ਲਾਲ; 1633–1713), १७वीं शताब्दी के एक सिख कवि थे जो गुरु गोविन्द सिंह के दरबार के ५२ कवियों में से एक थे। फारसी में उन्हें या गोया भी कहते हैं। भाई साहब मुल्तान के निवासी थे।