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भानुभक्त आचार्य (1814 – 1868), नेपाल के कवि थे जिन्होने नेपालीमें रामायण की रचना की। उन्हें खस भाषा का आदिकवि माना जाता है। खस साहित्य के क्षेत्र में प्रथम महाकाव्य रामायण के रचनाकार भानुभक्त का उदय सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना है।[1] पूर्व से पश्चिम तक नेपाल का कोई ऐसा गाँव अथवा कस्वा नहीं है जहाँ उनकी रामायण की पहुँच नहीं हो। भानुभक्त कृत रामायण वस्तुत: नेपाल का 'रामचरित मानस' है।

भानुभक्त आचार्य
Bhanubhakta Acharya.jpg
भानुभक्त आचार्य
जन्म२९ आसाढ़ संवत १८७१
चुँदी-व्याँसी क्षेत्र के रम्घा ग्राम, तनहुँ जिला, नेपाल
व्यवसायकवि
रम्घा ग्राम में भानुभक्त की प्रतिमा

भानुभक्त का जन्म पश्चिमी नेपाल में चुँदी-व्याँसी क्षेत्र के रम्घा ग्राम में २९ आसाढ़ संवत १८७१ तदनुसार १८१४ ई. में हुआ था। संवत् १९१० तदनुसार १८५३ई. में उनकी रामायण पूरी हो गयी थी, किंतु एक अन्य स्रोत के अनुसार युद्धकांड और उत्तर कांड की रचना १८५५ ई. में हुई थी।

भानुभक्त कृत रामायण की कथा अध्यात्म रामायण पर आधारित है। इसमें उसी की तरह सात कांड हैं - बाल, अयोध्या, अरण्य, किष्किंधा, सुंदर, युद्ध और उत्तर।

कृतिसंपादित करें

कविताशंसंपादित करें

रामायण १.बाल काण्ड

एक् दिन् नारद् सत्य लोक् पुगिगया लोक्को गरौ हित् भनि।
ब्रम्ह्ना ताहि थिया पर्या चरणमा खुसि गराया पनि ॥
क्या सोध्छौ तिमी सोध भन्छु म भनि मर्जि भयेथ्यो जसै।
ब्रम्ह्नाको करुणा बुझेर ऋषिले बिन्ति गर्या यो तसै ॥
हे ब्रम्ह्ना जति हुन् सुभा सुभ सबै सुनि रयाछु कछु।
बाकि छइन केही तथापि सुन्न इच्छ्या म यो गर्द्छु ॥
आउ लाज भयो कलि बखतमा प्राणी दुराचार भइ।
गर्न्याछन सब पाप् अनेक तरहका निज्का मतिमा गइ ॥
साच्चो कुरा गरोइनन् अरुकोइ गर्नन् त निन्दा पनि।
अर्कको धन खानलाई अभिलाष् गर्नन् त दियो भनि ॥
कोहि जन् परस्त्रिमा रतहुनन् कोही त हिम्सा महा।
देहलाई त आत्मा जानी रहलान् नास्तिक पसु झहि तहाँ ॥

चित्र दिर्घासंपादित करें


सन्दर्भसंपादित करें

  1. उर्वीजा (अनियतकालिक पत्रिका), सीतामढ़ी, समकालीन खस साहित्य पर केन्द्रित अंक, संपादक : रवीन्द्र प्रभात, लेख : खस साहित्य की विकास यात्रा, पृष्ठ 5

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें