विटामिन, पोषक तत्वों और ऊर्जा अंतर्ग्रहण की गंभीर कमी को भुखमरी कहते हैं। यह कुपोषण का सबसे चरम रूप है। अधिक समय तक भुखमरी के कारण शरीर के कुछ अंग स्थायी रूप से नष्ट हो सकते हैं और[कृपया उद्धरण जोड़ें] अंततः मृत्यु भी हो सकती है। अपक्षय शब्द भुखमरी के लक्षणों और प्रभाव की ओर संकेत करता है।

Starvation or cease of food
वर्गीकरण व बाहरी संसाधन
Starved girl.jpg
A girl during the Nigerian-Biafran war of the late 1960s, shown suffering the effects of severe hunger and malnutrition.
आईसीडी-१० T73.0
आईसीडी- 994.2
रोग डाटाबेस 12415
एमईएसएच D013217
भूख से पीड़ित वियतनामी व्यक्ति, जिसे कि वहाँ के वियत कांग्रेस शिविर में भोजन से वंचित रखा गया था।

विश्व स्वास्थ संगठन के अनुसार, विश्व के संपूर्ण स्वास्थ के लिए भूख स्वयं में ही एक गंभीर समस्या है।[1] डब्लूएचओ (WHO) यह भी कहता है कि अब तक शिशु मृत्यु के कुल में से आधे मामलों के लिए कुपोषण ही उत्तरदायी है।[1] एफएओ (FAO) के अनुसार, वर्तमान में 1 बिलियन से भी ज्यादा लोग, या इस ग्रह पर प्रति छः में से एक व्यक्ति, भुखमरी से प्रभावित है।[2]

आम कारणसंपादित करें

भुखमरी का मूल कारण ऊर्जा व्यय और ऊर्जा अंतर्ग्रहण के बीच असंतुलन है। दूसरे शब्दों में, शरीर भोजन के रूप में ग्रहण की गयी ऊर्जा से अधिक ऊर्जा व्यय करता है। यह असंतुलन एक या कई चिकित्सकीय कारणों से हो सकता है और/या पारिस्तिथिक अवस्थाओं के कारण भी हो सकता है, जिसमे निम्न सम्मिलित हो सकते हैं:

चिकित्सकीय कारण

परिस्थितिजन्य कारण

  • अतिजनसंख्या या युद्ध जैसे कारणों के साथ किसी कारण से अकाल पड़ जाना
  • उपवास, जब बिना उचित चिकित्सकीय देखरेख के किया जाये और एक महीने से अधिक समय तक चले.
  • ग़रीबी

संकेत तथा लक्षणसंपादित करें

भुखमरी से ग्रसित व्यक्ति में चर्बी (वसा) की मात्रा और मांसपेशियों का भार काफी घट जाता है क्यूंकि शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए इन ऊतकों का विघटन करने लगता है। जब शरीर अपने अत्यावश्यक अंगों जैसे तंत्रिका तंत्र और ह्रदय की मांसपेशियों (मायोकार्डियम) की क्रियाशीलता को बनाये रखने के लिए अपनी ही मांसपेशियों और अन्य ऊतकों का विघटन करने लगता है तो इसे केटाबौलिसिस कहते हैं। विटामिन की कमी भुखमरी का सामान्य परिणाम है, जो प्रायः खून की कमी, बेरीबेरी, पेलेग्रा और स्कर्वी का रूप ले लेता है। संयुक्त रूप से यह बीमारियां डायरिया, त्वचा पर होने वाली अन्धौरी, शोफ़ और ह्रदय गति रुकने का कारण भी हो सकती हैं। इसके परिणामस्वरूप इससे ग्रस्त व्यक्ति प्रायः चिड़चिड़ा और आलसी रहता है।

पेट की क्षीणता भूख के अनुभव को कम कर देती है, क्यूंकि अनुभव पेट के उस हिस्से द्वारा नियंत्रित होता है जो कि खाली हो। भुखमरी के शिकार व्यक्ति इतने कमज़ोर हो जाते हैं कि उन्हें प्यास का अनुभव नहीं हो पाता और इसलिए निर्जलीकरण से ग्रस्त हो जाते हैं।

मांसपेशियों के अपक्षय और शुष्क व फटी त्वचा, जो कि गंभीर निर्जलीकरण के कारण होती है, के परिणामस्वरूप सभी क्रियाएं पीड़ादायक हो जाती हैं। कमज़ोर शरीर के कारण बीमारियां होना साधारण है। उदाहरण के लिए, फंगस प्रायः भोजन नली के अन्दर विकसित होने लगता है, जिससे कि कुछ भी निगलना बहुत ही कष्टदायक हो जाता है।

भुखमरी से होने वाली ऊर्जा की स्वाभाविक कमी के कारण थकावट होती है और ऊर्जा की यह कमी लम्बे समय तक रहने पर पीड़ित व्यक्ति को उदासीन बना देती है। क्यूंकि भुखमरी से पीड़ित व्यक्ति इतना कमज़ोर हो जाता है कि वह खाने और हिलने में भी असमर्थ हो जाता है और फिर अपने चारों और के वातावरण से उसका पारस्परिक सम्बन्ध भी कम होने लगता है।

वह व्यक्ति रोगों से लड़ने में भी असमर्थ हो जाता है और महिलाओं में मासिकधर्म भी अनियमित हो जाता है।

जीव रसायनसंपादित करें

जब भोजन ग्रहण करना बंद हो जाता है तो, शरीर द्वारा संचित ग्लाइकोजेन 24 घंटे में समाप्त हो जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] संचारित इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है और ग्लूकागोन का स्तर अत्यधिक बढ जाता है। ऊर्जा उत्पादन का प्रमुख साधन लिपोलिसिस होता है। ग्लुकोजेनेसिस ग्लिसरौल को ग्लुकोज़ में बदल देता है और कोरी साइकिल लेक्टेट को प्रयोग योग्य गुओकोज़ में बदल देता है। ग्लुकोजेनिसिस में दो ऊर्जा प्रणालियां कार्य करती है:प्रोटियोलिसिस, पाइरुवेट द्वारा बनायीं गयी एलानाइन और लेक्टेट देता है, जबकि एसिटिल CoA घुलनशील पोषक तत्त्व (कीटोन समूह) बनता है, जिनकी जांच मूत्र द्वारा की जा सकती है और यह मस्तिष्क द्वारा ऊर्जा के स्रोत के रूप में प्रयोग किये जाते हैं।

इंसुलिन प्रतिरोध की शब्दावली में, भुखमरी की अवस्था में मस्तिष्क के लिए उपलब्ध ग्लुकोज़ से अधिक ग्लुकोज़ बनने लगता है।

प्रयाससंपादित करें

उपचारसंपादित करें

भुखमरी से पीड़ित रोगियों का उपचार संभव है, लेकिन यह अत्यंत सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए जिससे रीफीडिंग सिंड्रोम से बचा जा सके। [3]

रोकथामसंपादित करें

इन्हें भी देखें: खाद्य सुरक्षा

किसी व्यक्ति के लिए, रोकथाम में स्वाभाविक रूप से अधिक भोजन लेना सम्मिलित है, इस भोजन में इतनी विविधता हो कि वह पोषण की दृष्टि से एक संपूर्ण आहार हो। एक संभावित भुखमरी से पीड़ित व्यक्ति के सामने बैठकर उसे भोजन कराना, उन सामाजिक व्यवस्थाओं के प्रति आवाज़ उठाना जिसके कारण लोगों को भोजन से वंचित रखा जाता है, आदि अधिक जटिल मामले हैं।

खाद्य असुरक्षा वाले क्षेत्रों में मुफ्त और अनुदानिक बीज व् खाद उपलब्ध करा कर किसानों की सहायता करने से फसल बढेगी और दामों में कमी आएगी.[4]

मलावी में सफल प्रतिक्रियाओं का उदाहरणसंपादित करें

मलावी में, 13 मिलियन में से लगभग 5 मिलियन लोगों को अविलम्ब भोजन सहायता की ज़रुरत है। हालांकि सरकार द्वारा किये गए फसल आंकलन के अनुसार, 2006 और 2007 में अच्छी वर्षा के द्वारा सहयोग प्राप्त गहन खाद्य अनुदान और बीज अनुदान, जो कि खाद अनुदान की तुलना में कम था, से किसानों को मक्के की अभूतपूर्व फसल उगाने में सहायता मिली। सरकार ने सूचित किया कि मक्के की फसल 2005 में 1.2 मिलियन मीट्रिक टन (mmt) से बढकर 2006 में 2.7 mmt और 2007 में 3.4 mmt हो गयी। इस पैदावार से खाद्य पदार्थों के दाम घट गए और खेतों में मजदूरी करने वाले किसानों की मजदूरी बढ गयी, जिससे गरीबों की मदद हुई। मलावी खाद्य पदार्थों का एक प्रमुख निर्यातक हो गया, वह संयुक्त राष्ट्रों और विश्व खाद्य कार्यक्रम को दक्षिणी अफ्रीका के अन्य किसी भी देश की तुलना में सर्वाधिक मक्का विक्रय करने लगा।

नियमों में किये गए इस परिवर्तन (विश्व बैंक द्वारा बनाया गया कानून) से 20 वर्षों पूर्व तक, मलावी से धनी कुछ देश जोकि विदेशी सहायता पर निर्भर थे, वे मुक्त बाज़ार नियमों के नाम पर बारबार इस पर खाद्य अनुदानों को कम करने या समाप्त करने के लिए दबाव डाल रहे थे। संयुक्त राज्य और यूरोप द्वारा अपने किसानों को व्यापक अनुदान दिए जाने के बावजूद भी यह हो रहा था। हालांकि सब तो नहीं किन्तु फिर भी इसके अधिकांश किसान बाज़ार के दामों पर खाद ले पाने में असमर्थ हैं। किसानों की मदद के प्रस्तावकों में अर्थशास्त्री जेफ्री साक्स भी शामिल हैं, जिन्होनें इस विचार की हिमायत की कि धनी राष्ट्रों को अफ्रीका के किसानों के लिए खाद और बीजों पर निवेश करना चाहिए। ऊन्होने ही मिलेनियम विलेज प्रोजेक्ट (MVP) का विचार रखा, जो योग्य किसानों को बीज, खाद और प्रशिक्षण प्रदान करेगा। केन्या के एक गांव में, इस नियम के अनुप्रयोग के फलस्वरूप उसकी मक्के की फसल तिगुनी हो गयी, जबकि इससे पहले उस गांव में भुखमरी का एक चक्र बीत चुका था।

संगठनसंपादित करें

कई संगठन भिन्न भिन्न क्षेत्रों में भुखमरी को घटाने में अत्यंत प्रभावी रहे हैं। सहायता संस्थाएं लोगों को सीधे मदद देती हैं, जबकि राजनीतिक संगठन राजनीतिज्ञों पर वृहद् स्तरीय नियमों को बनाने के लिए दबाव डालती हैं जोकि अकालों की आवृत्ति को कम कर सकें और सहायता दे सकें.

भूख से सम्बंधित आंकड़ेसंपादित करें

2007 में 923 मिलियन लोग अल्पपोषित के रूप में प्रतिवेदित किये गए, यह 1990-92 की तुलना में 80 मिलियन की बढ़त थी।[5] यह भी सूचित किया गया कि विश्व पहले ही इतने खाद्यान्न का उत्पादन करता है कि जिससे विश्व की पूरी जनसंख्या का पेट भरा जा सकता है-विश्व की कुल जनसंख्या- 6 बिलियन है - जबकि इसके दोगुने लोगों का पेट भरने के लिए खाद्यान्न पैदा होता है- 12 बिलियन लोग.[6] हालांकि कृषि अब काफी हद तक अपूर्य खनिज ईधनों और ताजेपानी के जलायाशों के अधिकाधिक प्रयोग पर निर्भर है; इस्तियुतो नेज़िओनेल देला न्यूट्रीजियोन, रोम के एक वरिष्ठ शोधकर्ता और कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ़ लाइफ साइंस एंड एग्रीकल्चर के एक प्रोफेसर ने, अधिकतम वैश्विक जनसंख्या के लगभग 2 बिलियन होने का अनुमान लगाया, यदि यह विशिष्ट रूप से मात्र नवीकरणीय स्त्रोतों पर निर्भर करे तो.[7] (देखें विश्व जनसंख्या और कृषि संबंधी संकट)

वर्ष 1970 1980 1990 2005 2007
विकासशील विश्व में भूखे लोगों की हिस्सेदारी[8][9] 37% 28% 20% 16% 17%

भूख से होने वाली मृत्युओं के सम्बन्ध में आंकड़ेसंपादित करें

  • भूख के कारण औसतन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रति सेकेंड 1 व्यक्ति की मृत्यु होती है- प्रति घंटे 4000 व्यक्तियों की- प्रतिदिन 100 000 व्यक्तियों की- प्रति वर्ष 36 मिलियन व्यक्तियों की- और सभी मृत्युओं में से 58 प्रतिशत (2001-2004 आंकलन के अनुसार) इसी के कारण होती हैं।[10][11][12]
  • भूख के कारण औसतन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रति 5 सेकेंड में 1 बच्चे की- प्रतिघंटे 700 बच्चों की-प्रतिदिन 16000 बच्चों की- प्रतिवर्ष 6 मिलियन बच्चों की और सभी मृत्युओं में से 60 प्रतिशत (2002-2008 के आंकलन के अनुसार) इसी के कारण होती हैं।[13][14][15][16][17]

मृत्युदंड के रूप मेंसंपादित करें

 
द स्टार्विंग लिविला रिफ्युज़िंग फ़ूड.आन्ड्रे कास्टाग्ने द्वारा एक ड्राइंग

इतिहास के अनुसार, भुखमरी का प्रयोग मृत्युदंड के रूप में किया जाता था। मानव सभ्यता की शुरुआत से लेकर मध्य युग तक, लोगों को बंद कर दिया जाता था या चार दीवारों में कैद कर दिया जाता था और वो भोजन के अभाव में मर जाते थे।

प्राचीन ग्रेको-रोमन सभ्यता में, भुखमरी का प्रयोग कभी कभी ऊंचे दर्जे के दोषी नागरिकों से छुटकारा पाने के लिए भी किया जाता था, खासतौर पर रोम के कुलीन वर्ग की महिलाओं के गलत आचरण के सम्बन्ध में. उदहारण के लिए, 31 वें वर्ष के दौरान, टिबेरियस की भांजी और बहू लिविला को सैजनुस के साथ व्यभिचार पूर्ण सम्बन्ध होने और अपने पति कनिष्ठ द्रुसास की हत्या में सहपराधिता के लिए गुप्त रूप से उसकी मां द्वारा भूख से तड़पा कर मार डाला गया था।

टिबेरियास की एक अन्य बहु, जिसका नाम एग्रिपिना द एल्डर (ज्येष्ठ एग्रिपिना) था (अगस्तस की पोती और कैलिग्युला की मां) भी 33 ईपू (AD) भुखमरी के कारण मर गयी थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि उसने इस प्रकार भूख से मरने का निर्णय स्वयं लिया था।

एग्रिपिना के एक बेटे और बेटी को भी राजनीतिक कारणों के चलते भूख से मार डालने की सजा दी गयी थी; उसका दूसरा बेटा द्रुसास सीज़र, 33 ईपू (AD) में कारागार में डाल दिया गया था और टिबेरियस की आज्ञा द्वारा उसे भूख से तड़पा कर मार डाला गया था (वह 9 दिनों तक अपने बिस्तर में भरे सामान को चबाकर जीवित रहा था); एग्रिपिना की सबसे छोटी बेटी, जूलिया लिविला, को अपने चाचा, सम्राट क्लौडियस, द्वारा 41 वें वर्ष में देशनिकाला देकर एक द्वीप पर छोड़ दिया गया था और इसके कुछ समय बाद ही सम्राज्ञी मेसलिना द्वारा उसे भूख से तड़पा कर मार डालने की व्यवस्था कर दी गयी थी।

यह भी संभव है कि पवित्र कुंवारियों को ब्रह्मचर्य का संकल्प तोड़ने का दोषी पाए जाने पर भुखमरी की सजा दी जाती हो।

19वीं शताब्दी में युगोलिनो डेला घेरार्देस्का, उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को मुदा में, जो कि पीसा का एक बुर्ज़ है, में बंद कर दिया गया था और उन्हें भूख से तड़पा कर मार डाला गया था। उनके समकालीन, डेन्टे, ने अपनी उत्कृष्ट कृति डिवाइन कॉमेडी में घेरार्देस्का के बारे में लिखा है।

1317 में स्वीडेन में, स्वीडेन के राजा बिर्गर ने अपने दोनों भाईयों को एक घातक कार्य, जो उन्होंने कई वर्षों पहले किया था, के लिए कारावास में डलवा दिया था। (Nyköping Banquet) कुछ सप्ताह बाद, वह भूख के कारण मर गए।

1671 में कॉर्नवल में, सेंट कोलम्ब मेजर के जॉन ट्रेहेंबेन को दो लड़कियों की हत्या के लिए कैसल ऍन दिनस में एक पिंजरे में भूख से मरने की सज़ा देकर दण्डित किया गया था।

एक पोलैंड वासी धार्मिक भिक्षु, मेक्सिमिलन कोल्बे, ने औशविज़ केंद्रीकरण शिविर में एक अन्य कैदी, जिसे मृत्यु की सजा दी गई थी, को बचाने के लिए अपनी मृत्यु का प्रस्ताव रखा। उसे अन्य 9 कैदियों के साथ भूख से तड़पा कर मार डाला गया। दो सप्ताह तक भूख से तड़पने के बाद, सिर्फ कोल्बे और दो अन्य कैदी जीवित रह गए थे और उने फिनॉल की सूई लगाकर प्राणदंड दिया गया।

एडगर एलेन पो ने इटली में एक सभ्य व्यक्ति को बंदी बनाये जाने पर एक लघु कथा, द कैस्क्यु ऑफ़ अमौन्तिलेडो लिखी थी।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

  • अकाल के प्रति प्रतिक्रिया
  • अकाल का स्तर
  • उपवास
  • खाद्य सुरक्षा
  • भूख
  • भूख हड़ताल
  • क्वाशिओर्कोर
  • अकालों की सूची
  • भूख से मरने वाले लोगों की सूची
  • कुपोषण
  • मरास्मस
  • मुसलमान
  • अधिक जनसंख्या
  • ग़रीबी
  • रिफीडिंग सिंड्रोम
  • संथारा

सन्दर्भसंपादित करें

  1. कुपोषण Archived 2016-12-31 at the Wayback Machine भुखमरा
  2. "एफएओ के आंकड़े बताते है की भुखमरी के 1 अरब लोग हैं।". मूल से 8 अक्तूबर 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 अगस्त 2010.
  3. Mehanna HM, Moledina J, Travis J (2008). "Refeeding syndrome: what it is, and how to prevent and treat it". BMJ. 336 (7659): 1495–8. PMC 2440847. PMID 18583681. डीओआइ:10.1136/bmj.a301. नामालूम प्राचल |month= की उपेक्षा की गयी (मदद)सीएस1 रखरखाव: एक से अधिक नाम: authors list (link)
  4. "विशेषज्ञों को अनदेखा करके, अकाल समाप्त". मूल से 27 अप्रैल 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जून 2020.
  5. खाद्य और कृषि संगठन के आर्थिक और सामाजिक विकास विभाग. "द स्टेट ऑफ़ फ़ूड इनसेक्युरिटी इन द वर्ल्ड, 2008 : हाई फ़ूड प्राइसेस एण्ड फ़ूड सेक्युरिटी - थ्रेट्स एण्ड औपोर्चुनिटीज़" Archived 2018-06-13 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन, 2008 पृष्ठ 2. "एफएओ के सबसे हाल ही में अनुमान के तहत मिलियन 2007 में 923 लोगों को भूख की संख्या में डाला, 1990-92 के बाद से 80 लाख की वृद्धि से अधिक अवधि के आधार पर बढ़ी.".
  6. जीन ज़ेग्लर. "सभी मानव अधिकार के संवर्धन और संरक्षण के अधिकार, सिविल पॉलीटिकल, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार, द राईट टू डेवेलपमेंट सहित: राईट टू फ़ूड पर स्पेशल रिपोर्ट पर रैपोर्चार, जीन ज़ेग्लर" Archived 2010-08-06 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र के मानव अधिकार परिषद, 10 जनवरी 2008. "संयुक्त राज्य के संगठन फ़ूड एण्ड एग्रीकल्चर और्गानाईज़ेशन के हिसाब से, दुनिया पहले से ही इतना खाद्य प्रदान करती है कि हर बच्चे औरत और आदमी को खिला सके और 12 बिलियन लोगों को या वर्त्तमान के जनसंख्या के डबल को."
  7. "मजबूत टकराव: जनसंख्या, ऊर्जा का उपयोग और कृषि के पारिस्थितिकीय". मूल से 25 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 अगस्त 2010.
  8. खाद्य और कृषि संगठन कृषि और विकास के अर्थशास्त्र विभाग. "द स्टेट ऑफ़ फ़ूड इनसेक्युरिटी इन द वर्ल्ड, 2006 : एरैडीकेटिंग वर्ल्ड हंटर - टेकिंग स्टॉक टेन इयर्स आफ्टर द वर्ल्ड फ़ूड समिट" Archived 2018-06-10 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन, 2006, पृष्ठ. 8. "विकासशील देशों में बढ़ती जनसंख्या के कारण भूखे लोगों की संख्या में अत्यंत न्यून गिरावट आती है पर इसके बावजूद भी वह गिरावट अल्पपोषित व्यक्तियों के अनुपात में कमी के रूप में परिलक्षित होती है और यह गिरावट तीन प्रतिशत अंकों की रही- 1990-92 में 20 प्रतिशत से घटकर यह 2001-03 में 17 प्रतिशत रह गयी। (...) 1969-71 और 1079-81 के बीच अल्पपोषण कि स्थिति में 9 प्रतिशत की गिरावट आई और इसके आगे 1979-81 और 1990-92 में इसमें 8 प्रतिशत अंकों की गिरावट (20 प्रतिशत से) आई."
  9. खाद्य और कृषि संगठन के आर्थिक और सामाजिक विकास विभाग. "द स्टेट ऑफ़ फ़ूड इनसेक्युरिटी इन द वर्ल्ड, 2008 : हाई फ़ूड प्राइसेस एण्ड फ़ूड सेक्युरिटी - थ्रेट्स एण्ड औपोर्चुनिटीज़" Archived 2018-06-13 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन 2008, पृष्ठ 6. "विकासशील देशों ने भूखे लोगों के अनुपात को कम करने में अच्छी प्रगति प्राप्त की है- 1990-92 के 20 प्रतिशत से घटकर 1995-97 में यह प्रतिशत 18 रह गया और 2003-05 में यह 16 प्रतिशत से कुछ ही ऊपर रह गया। आंकड़े यह प्रदर्शित करते हैं कि खाद्य पदार्थों के बढ़ाते हुए मूल्य ने इस प्रगति को पीछे खींचा है, जिससे कि विश्व स्तर पर अल्पपोषित व्यक्तियों का प्रतिशत पुनः 17 पर पहुंच रहा है।"
  10. जीन ज़ेग्लर. "द राईट टू फ़ूड: राईट टू फ़ूड पर स्पेशल रिपोर्ट पर रैपोर्चार, मिस्टर. जीन ज़ेग्लर, ह्युमन राईट रेज़ोल्यूशन पर प्रेषित अनुसार आयोग 2000/10" Archived 2009-04-24 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र, 7 फ़रवरी 2001, पृष्ठ. 5. औसतन, प्रति वर्ष 62 मिलियन व्यक्तियों की मृत्यु होती है, जिसमे से 36 मिलियन (58 प्रतिशत) की मृत्यु प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पोषक तत्वों के अभाव, संक्रमण, महामारी और ऐसी बीमारियों के कारण होती है जो उस समय शरीर पर आक्रमण करती है जब अल्पपोषण और भूख के कारण उसकी प्रतिरोध और प्रतिरक्षा क्षमताएं अत्यंत क्षीण हो चुकी होती हैं।"
  11. मानव अधिकार पर आयोग. "द राईट टू फ़ूड: कमीशन ऑन ह्युमन राइट्स रेज़ोल्यूशन 2002/25" Archived 2010-07-03 at the Wayback Machine. संयुक्त राज्य, मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय, 22 अप्रैल 2002, पेज 2, "एक ऐसे विश्व में जोकि पहले ही इतने खाद्यान्न का उत्पादन करता है कि जिससे पर्याप्त रूप से समस्त वैश्विक जनसंख्या का पेट भरा जा सके, प्रतिवर्ष 36 मिलियन व्यक्तियों की मृत्यु होती है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भूख और अल्प पोषण के फलस्वरूप मरते हैं, जिसमे से कि अधिकतर, विकाशील देशों की महिलाएं और बच्चे होते हैं।"
  12. संयुक्त राष्ट्र सूचना सेवा. "इंडीपेंडेंट एक्सपर्ट ऑन इफेक्ट्स ऑफ़ स्ट्रक्चरल ऐडजस्टमेंट, स्पेशल रैपोर्चार ऑन राईट टू फ़ूड प्रेजेंट रिपोर्ट्स: कमीशन कंटीन्यूज़ जेनरल डीबेट ऑन इकॉनोमिक, सोशियल एण्ड कल्चरल राइट्स" Archived 2009-03-27 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र, 29 मार्च 2004, पृष्ठ 6. "लगभग 36 लाख लोग भूख से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से हर साल मरे हैं।".
  13. खाद्य और कृषि संगठन स्टाफ. "द स्टेट ऑफ़ फ़ूड इनसेक्युरिटी इन द वर्ल्ड, 2002: फ़ूड इनसेक्युरिटी : व्हेन पीपल लीव विथ हंगर एण्ड फियर स्टार्वेशन" Archived 2017-10-15 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन, 2002, पृष्ठ 6 "6 मिलीयन बच्चे जो पांच साल की कम उम्र से हैं, वे भूख के परिणाम हर साल मर जाते हैं।"
  14. युनाइटेड नेशंस इकोनॉमिक एण्ड सोशियल डेप्ट्स के खाद्य और कृषि संगठन. " Archived 2010-08-28 at the Wayback Machineद स्टेट ऑफ़ फ़ूड इनसेक्युरिटी इन द वर्ल्ड, 2004: मोनिटोरिंग प्रोग्रेस टुवर्ड्स द वर्ल्ड फ़ूड सुमिट एण्ड मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल्स" Archived 2010-08-28 at the Wayback Machine. संयुक्त राज्य के खाद्य और कृषि संगठन, 2004, पृष्ठ 8. "आवश्यक विटामिन और खनिज पदार्थों की कमी और अल्पपोषण के कारण प्रतिवर्ष 5 मिलियन बच्चों को अपना जीवन खोना पड़ता है".
  15. जैक डिऔफ़. "द स्टेट ऑफ़ फ़ूड इनसेक्युरिटी इन द वर्ल्ड, 2004: मोनिटोरिंग प्रोग्रेस टुवर्ड्स द वर्ल्ड फ़ूड सुमिट एण्ड मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल्स" Archived 2010-08-28 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन, 2004, पृष्ठ 4. "भूख और कुपोषण के प्रभाव से हर पांच सेकेण्ड में एक बच्चा मरता है"
  16. खाद्य और कृषि संगठन, विभाग के आर्थिक और सामाजिक " Archived 2010-11-04 at the Wayback Machineद स्टेट ऑफ़ फ़ूड सेक्योरिटी इन द वर्ल्ड 2005: इराडीकेटिंग वर्ल्ड हंगर - कीय टू अचीविंग द मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल्स" Archived 2010-11-04 at the Wayback Machine. संयुक्त राज्य के खाद्य और कृषि संगठन, 2005, पृष्ठ 18. बच्चों की होने वाली कुल मौतों में से आधे के पीछे भूख और कुपोषण का ही कारण होता है, जिससे प्रतिवर्ष 6 मिलियन बच्चों की मृत्यु हो जाती है- यह संख्या जापान में स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों की संख्या के बराबर है। अपेक्षाकृत इनमे से कुछ ही बच्चे भूख के कारण मरते हैं। इनमे से अधिकांशतः प्रसवपूर्व विकार और कुछ उपचार के योग्य संक्रामक बीमारियों जिसमे डायरिया, निमोनिया, मलेरिया और खसरा सम्मिलित हैं, के कारण मर जाते हैं। इनमे से अधिकांश की मृत्यु नहीं होगी यदि उनका शरीर और प्रतिरक्षा तंत्र भूख और कुपोषण के कारण क्षीण न हो तो, शरीर के वज़न के कुछ या गंभीर रूप से कम होने पर मृत्यु का खतरा 5 से 8 गुना तक बढ़ जाता है।".
  17. मानवाधिकार परिषद. "संकल्प 7/14. Archived 2011-05-01 at the Wayback Machineभोजन का अधिकार" Archived 2011-05-01 at the Wayback Machine. संयुक्त राष्ट्र, 27 मार्च 2008, पृष्ठ 3. "6 लाख बच्चे अभी भी हर साल भूख के कारण मर जाते हैं-अपने पांचवें जन्मदिन से पहले ही मर जाते हैं।

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें