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याराना (1981 फ़िल्म)

1981 की राकेश कुमार की फ़िल्म

याराना 1981 में बनी हिन्दी भाषा की नाट्य फ़िल्म है। यह अमिताभ बच्चन, अमज़द ख़ान, नीतू सिंह, तनुजा और कादर ख़ान अभिनीत है। यह उन फिल्मों में से एक थी जहां अमज़द ख़ान सकारात्मक भूमिका निभाए। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी लगभग सभी अन्य फिल्मों में वह खलनायक भूमिका निभाए थे। राजेश रोशन के संगीत में अनजान द्वारा गीत भी लोकप्रिय हुए थे।

याराना
याराना1.jpg
याराना का पोस्टर
निर्देशक राकेश कुमार
निर्माता एच॰ ए॰ नाडियाडवाला
लेखक कादर ख़ान (संवाद)
पटकथा विजय कौल
कहानी ज्ञानदेव अग्निहोत्री
अभिनेता अमिताभ बच्चन,
नीतू सिंह,
तनुजा,
अमज़द ख़ान,
कादर ख़ान
संगीतकार राजेश रोशन
प्रदर्शन तिथि(याँ) 23 अक्टूबर, 1981
देश भारत
भाषा हिन्दी

संक्षेपसंपादित करें

किशन और बिशन बचपन के दोस्त हैं। किशन एक अनाथ है, लेकिन आत्मनिर्भर और कड़ी मेहनत कने वाला है, जबकि बिशन एक समृद्ध पृष्ठभूमि से आता है। दोनों के बीच दोस्ती बेहद मजबूत है और बिशन के मामा का सिर दर्द है, जिनका अपनी बहन की संपत्ति पर नजर है। दो दोस्तों को अलग करने के लिए, मामा अपनी बहन से बिशन को आगे शिक्षा के लिए शहर में और फिर विदेश में भिजवा देता है।

जब दो दोस्त बाद में एकजुट हो जाते हैं, तब बिशन (अमज़द खान) ने पता लगाया कि किशन (अमिताभ बच्चन) की आवाज़ बहुत अच्छी है। बिशन अब एक सफल व्यवसायी है और वह किशन की गायन प्रतिभा को बढ़ावा देना चाहता है। किशन अपने दोस्त के साथ शहर जाता है, जहां बिशन ने कोमल (नीतू सिंह) से उसे एक कलाकार और सज्जन बनाने के लिए तैयार करने को कहा। इस बीच, बिशन ने पता लगाया कि पिछले 18 वर्षों में मामा और उसके बेटे द्वारा पारिवारिक संपत्ति को व्यवस्थित रूप से लूट लिया गया है। किशन को एक सफल गायक बनने के लिए उसे अपनी शेष परिसंपत्तियों को गिरवी रखने लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे बिशन और उसकी पत्नी के बीच एक बड़ा झगड़ा होता है, जो इस बात से आश्वस्त है कि किशन सफल होने के बाद बिशन से मुँह मोड़ लेगा। किशन का पहला संगीत कार्यक्रम एक बड़ी सफलता बनता है और वह अपने दोस्त बिशन की गिरवी परिसंपत्ति को बचाने के लिये अपनी आय दान कर देता है। ताकि उसकी भाभी और प्यारा भतीजा (बिशन का 10 वर्षीय बेटा) वापस घर आ जाए।

किशन एक हस्ती बनने के लिए आगे बढ़ता है और कोमल उसके लिए अपने प्यार का इजहार करती है। इस बीच बिशन अपने विश्वासघाती मामा (जीवन) और ममेरे भाई (रंजीत) द्वारा निर्धारित षड्यंत्र में पड़ता है। उसे कई बंधकों के साथ अगवा कर लिया जाता है। वहाँ उत्पीड़न और यातना से बिशन अपनी मानसिक स्थिरता खो देता है और सदमे में चला जाता है।

उसके बाद उसे एक पागलखाने में डाल दिया जाता है और उसके बाद उसे भूलने की बीमारी का अनुभव होता है। किशन मानसिक रूप से बीमार होने का नाटक करता है और अधिकारियों को धोखा देकर पागलखाने में घुस जाता है। वह उसकी याददाश्त को वापिस ले आता है। फिल्म बंधकों के बचने के साथ समाप्त होती है - परिवार एकजुट हो जाता है और विश्वासघाती लोग जेल भेजे जाते हैं।

मुख्य कलाकारसंपादित करें

संगीतसंपादित करें

सभी गीत अनजान द्वारा लिखित; सारा संगीत राजेश रोशन द्वारा रचित।

क्र॰शीर्षकगायकअवधि
1."छूकर मेरे मन को"किशोर कुमार4:16
2."तेरे जैसा यार कहाँ"किशोर कुमार4:38
3."सारा जमाना हसीनों का"किशोर कुमार4:23
4."भोले ओ भोले"किशोर कुमार3:55
5."तू रूठा दिल टूटा"किशोर कुमार3:05
6."बिशन चाचा कुछ गाओ"मोहम्मद रफ़ी4:44

नामांकन और पुरस्कारसंपादित करें

वर्ष नामित कार्य पुरस्कार परिणाम
1982 अमजद ख़ान फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार जीत
किशोर कुमार ("छूकर मेरे मन को") फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक पुरस्कार नामित

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें