रतलाम भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त के मालवा क्षेत्र का एक जिला है। रतलाम शहर समुद्र सतह से १५७७ फीट कि ऊन्चाई पर स्थित है। रतलाम के पहले राजा महाराजा रतन सिंह थे। यह नगर सेव, सोना, सट्टा ,मावा, साडी तथा समोसा , कचोरी ,दाल बाटी के लिये प्रसिद्ध है। रतलाम की सबसे ज्यादा प्रसिद्ध रतलामी सेव हैं जिसका पुराना नाम भीलडी सेव था , सेव की खोज भील जनजाति ने करी थी [1]

रतलाम
—  शहर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य मध्य प्रदेश
महापौर ( डॉ॰ सुनीता यार्दे )
सांसद श्री गुमानसिंह डामोर
जनसंख्या
घनत्व
२६४९१४ (२०११ के अनुसार )
क्षेत्रफल ४० कि.मी²
आधिकारिक जालस्थल: ratlam.nic.in

निर्देशांक: 23°19′N 75°04′E / 23.31°N 75.07°E / 23.31; 75.07

महाराजा रतनसिंह और उनके पुत्र रामसिंह के नामों के संयोग से शहर का नाम रतनराम हुआ, जो बाद में अपभ्रंशों के रूप में बदलते हुए क्रमशः रतराम और फिर रतलाम के रूप में जाना जाने लगा।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

मुग़ल बादशाह शाहजहां ने रतलाम जागीर को रतन सिह को एक हाथी के खेल में, उनकी बहादुरी के उपलक्ष में प्रदान की थी। उसके बाद, जब शहजादा शुजा और औरंगजेब के मध्य उत्तराधिकारी की जों जंग शरू हुई थी, उसमे रतलाम के राजा रतन सिंह ने बादशाह शाहजहां का साथ दिया था। औरंगजेब के सत्ता पर असिन होने के बाद, जब अपने सभी विरोधियो को जागीर और सत्ता से बेदखल किया, उस समय, रतलाम के राजा रतन सिंह को भी हटा दिया था और उन्हें अपना अंतिम समय मंदसौर जिले के सीतामऊ में बिताना पड़ा था और उनकी मृत्यु भी सीतामऊ में भी हुई, जहाँ पर आज भी उनकी समाधी की छतरिया बनी हुई हैं।

औरंगजेब द्वारा बाद में, रतलाम के एक सय्यद परिवार, जों की शाहजहां द्वारा रतलाम के क़ाज़ी और सरवनी जागीर के जागीरदार नियुक्त किये गए थे, द्वारा मध्यस्ता करने के बाद, रतन सिंह के बेटे को उत्तराधिकारी बना दिया गया। इसके आलावा रतलाम जिले का ग्राम सिमलावदा अपने ग्रामीण विकास के लिये पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हे। यहाँ के ग्रामीणों द्वारा जनभागीदारी से गांव में ही कई विकास कार्य किये गए हे। रतलाम से 30 किलोमीटर दूर बदनावर इंदौर रोड पर सिमलावदा से 4 किलोमीटर दूर कवलका माताजी का अति प्राचीन पांडवकालीन पहाड़ी पर स्थित मन्दिर हे। यहाँ पर दूर दूर से लोग अपनी मनोकामना पूरी करने और खासकर सन्तान प्राप्ति के लिए यहाँ पर मान लेते हे| रतलाम से 30से35 किलोमीटर दूर जावरा शहर है जावरा में [अजमेर] शरीफ की तरह जावरा शरीफ हे , जहॉ दूर दुर से जायरीन लोग आते हे,

राजनीतिक क्षेत्र 2018 की विधानसभा

रतलाम जिला क्षेत्र के आधार पर जिले में कुल पाँच विधानसभा

रतलाम नगर(श्री चेतन्य कश्यप) सेेठजि

रतलाम ग्रामीण(श्री दिलीप मकवाना)

सेलाना(श्री हर्षविजय गहलोत गुड्डू)

जावरा(श्री राजेंद्र पांडे )

आलोट(श्री मनोज चावला)

किन्तु लोकसभा स्थिति अनुसार

रतलाम से तीन(रतलाम नगर,रतलाम ग्रामीणम शहर,सेलाना)

झाबुआ जिले कि तीन(झाबुआ,पेटलावद,थांदला)

अलीराजपुर जिले कि दो(अलीराजपुर व जोबट)

कुल 8 विधानसभा मिलकर रतलाम(24) लोकसभा बनती है। रतलाम की जावरा विधानसभा (जावरा, मंदसौर व नीमच) संसदीय क्षेत्र में शामिल है

पर्यटक स्थलसंपादित करें

JVL मंदिर:- JVL मंदिर या फिर कहै मांगल्य मंदिर भगवान श्री विष्णु सहित एक ही प्लेटफार्म पर बनाये गये सात देवताओ के प्रसिद्ध मंन्दीर है ।

जनजातियांसंपादित करें

  • भील - रतलाम की जनजातियों में भील प्रमुख जनजाति है , रतलाम की सेव प्रसिद्ध है और इस सेव के निर्माण सबसे पहले भील जनजाति ने ही किया था , इतिहास में वर्णन मिलता है कि एक भील सरदार ने मुगलों को सेव खिलाई थी ।


संदर्भसंपादित करें

  1. साँचा:Https://www.indiaspend.com/tribals-invented-sev-200-years-ago-now-sev-makers-are-evicting-them/