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रेज़ांग ला

जम्मू और कश्मीर का एक दर्रा
(रेजांग-ला से अनुप्रेषित)

रेज़ांग ला (Rezang La) भारत के लद्दाख़ क्षेत्र में चुशूल घाटी के दक्षिणपूर्व में उस घाटी में प्रवेश करने वाला एक पहाड़ी दर्रा है। यह २.७ किमी लम्बा और १.८ किमी चौड़ा है और इसकी औसत ऊँचाई १६,००० फ़ुट है।

रेज़ांग ला
Rezang La

चुशूल में रेज़ांग ला युद्ध स्मारक
ऊँचाई 5,000 m (16,404 ft)
स्थिति
स्थिति लेह ज़िला, Flag of India.svg भारत
शृंखला हिमालय
निर्देशांक 33°31′07″N 78°43′51″E / 33.518611°N 78.730833°E / 33.518611; 78.730833निर्देशांक: 33°31′07″N 78°43′51″E / 33.518611°N 78.730833°E / 33.518611; 78.730833

१९६२ युद्धसंपादित करें

१९६२ के भारत-चीन युद्ध में रेज़ांग ला कुमाऊं रेजिमेंट के १३ कुमाऊँ दस्ते(अहीर टुकड़ी) का अंतिम मोरचा था।[1] दस्ते का नेतृत्व मेजर शैतान सिंह कर रहे थे जिन्हें अपनी वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला।[2] यहाँ भारतीय और चीनी बलों के बीच मुठभेड़ में १२३ सैनिकों के भारतीय दस्ते में से १०९ ने अपनी जाने दी थीं। इनके लिए हरियाणा के रेवाड़ी गाँव में एक स्मारक बनाया गया है जहाँ से इस दस्ते के कई सिपाही आए थे। इस स्मारक पर दर्ज है की इसी लड़ाई में १,७०० चीनी सैनिक मारे गए थे।[3]

रेज़ांग ला पर भी एक युद्ध स्मारक है जिसपर थोमस बैबिंगटन मैकाले की कविता "होरेशियो" के कुछ अंश के साथ उस मुठभेड़ की स्मृति लिखी हुई है:[4][5][6]

अंग्रेज़ी
हिन्दी अनुवाद
How can a Man die Better than facing Fearful Odds,
For the Ashes of His Fathers and the Temples of His Gods,
To the sacred memory of the Heroes of Rezang La,
114 Martyrs of 13 Kumaon who fought to the Last Man,
Last Round, Against Hordes of Chinese on 18 November 1962.
Built by All Ranks 13th Battalion, The Kumaon Regiment.
अपने से कहीं अधिक बल से जूझकर मरने से अच्छी मृत्यु कोई नहीं
अपने पूर्वजों की अस्थियों और अपने देवताओं के मंदिरों के लिए मरने से अच्छी मृत्यु कोई नहीं
रेज़ांग ला के बहादुरों की पवित्र स्मृति को समर्पित
१३ कुमाऊँ के ११४ शहीद जो आख़री आदमी तक लड़े
१८ नवम्बर १९६२ को चीनी झुंडों से अंतिम गोली तक लड़े
१३वीं बटालियन, कुमाऊँ रेजिमेंट की सभी श्रेणियों द्वारा स्थापित

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Mohan Guruswamy. "Don't forget the heroes of Rezang La". The Hindu. अभिगमन तिथि 2016-04-08.
  2. Mohan Guruswamy (November 20, 2012). "Don't forget the heroes of Rezang La". The Hindu. अभिगमन तिथि 28 March 2015.
  3. "Nobody believed we had killed so many Chinese at Rezang La. Our commander called me crazy and warned that I could be court-martialled". Indianexpress.com. अभिगमन तिथि 2016-04-08.
  4. "Lays of Ancient Rome, by Thomas Babbington Macaulay". Gutenberg.org. अभिगमन तिथि 2016-04-08.
  5. "Archived copy". मूल से 28 January 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 January 2014.
  6. "Archived copy". मूल से 2 February 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 January 2014.