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रेवाड़ी एक ऐतिहासिक शहर है। बलराम भगवान की राजधानी और उनके बाद कृष्ण भगवान के प्रपौत्र महाराज बज्रभान आभीरीया शासन को आगे बढ़ाया। हालाँकि यह शहर अपनी पुरानी छवि खोता जा रहा है। खाने के हिसाब से यहाँ की रेवड़ियाँ बहुत मशहूर हैं। यहां पर भारत की सबसे पहली गौशाला सन1882 में बनाई गई थी जो कि राजा राव युधिष्ठिर यादव द्वारा बनाई गई थी

रेवाड़ी शब्द की उत्पत्तिसंपादित करें

रेवाड़ी अपने आप में बहु आयामी प्रतिभाओ, महान कलाकारों, कवियों, साहित्यकारों, शूरवीरो, धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक प्रतिष्ठानों, प्रकृतिं सौंदर्य से ओतप्रोत दक्षिणी हरियाणा का एक ऎसा स्थान है जहाँ आकर मन को सुकून और पवित्रता का बोध होता है। प्राचीन भारत में महाभारत काल के दौरान, रेवत नामक एक राजा था जिसकी पुत्री का नाम रेवती था।उसे सब रेवा कहकर बुलाते थे और उसके नाम पर एक शहर 'रेवा वाडी' नामक एक शहर की स्थापना की थी। वाडी और वाडा का मतलब हिंदी में पड़ोस (छोटे और बड़े, क्रमशः) और कई अन्य भारतीय भाषाओं में है। जब रेवा ने श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी से शादी की, तब राजा ने अपनी बेटी को 'रेवा वाडी' दान दिया। समय के दौरान, 'रेवा वाडी' का नाम रेवाड़ी बन गया। आज यह जगह हरीयाणा के एक जिले की तरह है। बलराम भगवान की राजधानी और उसके बाद बज्रनाभ जी का कुल ही मूल राजवंश आभीरिया शासन का।

सन्दर्भसंपादित करें