वार्ता:नव वर्ष

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भारतीय नववर्ष की शुरुआतसंपादित करें

चैत-शुक्ल-प्रतिपदा के दिन नव-संवत्सरोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता था। इस दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी तथा सृष्टि के समस्त अंगों के प्रति आभार व्यक्त किया जाता था। इसके तहत काल (समय) एवं सृष्टि के समस्त अंगों का पूजन भी किया जाता था। वस्तुत: सृष्टि के विभिन्न अंगों का पूजन करते समय पर्यावरण की शुद्धि और प्रदूषण की समाप्ति का विचार स्वत: आ जाता था। इसी कारण पूर्वकाल से ही मनुष्य इनके प्रति जागरूक था तथा वृक्ष, नदियों में देवत्व की भावना रखने के कारण इनकी सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान देता था। खुद सृष्टि पेड़ पर नई-नई नई पत्तियां लगाकर ,फलदार पौधों में मुजर लगाकर,फूलों में सुगंध बढ़ाकर 9 वर्ष आने का उद्घोषणा करती है रमेश कुमार सुदामा (वार्ता) 10:45, 4 अप्रैल 2019 (UTC)

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