"सन्त चरणदास" के अवतरणों में अंतर

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* षट्कर्म हठयोगवर्णन
 
अष्टांगयोग तथा षट्कर्म हठयोगवर्णन में प्रश्नोत्तर शैली में हैं। अष्टांगयोग में 153 [[दोहा]] और अष्टपदी छन्द में गुरु-शिष्य संवाद दिया गया है। इसी प्रकार षट्कर्म हठयोग ग्रंथ भी कुल 41 दोहा और अष्टपदी छन्द के रूप में गुरू शिष्य संवाद शैली में प्रस्तुत किया गया है। ग्रन्थ् में चरणदास जी की साधनानुभूति साधकों के लिए ग्रंथ को महत्व को स्वमेव बढ़ देती है।
 
==अष्टांगयोग ग्रंथ की विषयवस्तु==