"ट्राइऐसिक कल्प" के अवतरणों में अंतर

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== परिचय ==
राइऐसिक प्रणाली (Triassic System) पुराजीवकल्प के अपराह्न मे पृथ्वी की भौगोलिक और भौमिकीय स्थिति में अनेक परिवर्तन हुए। साथ ही [[विकासक्रमक्रमविकास]] की एक नई शृंख्ला आरंभ हुई, जिसमें आधुनिक वर्ग के पूर्वज [[जीव]] भी थे। उन जीवों का, जो पुराजीवी महाकल्प में अत्यधिक संख्या में थे, [[विलुप्ति|विलोप]] हो गया और उनके स्थान पर नए जीव प्रकट हुए। इन्हीं कारणों से इस [[महाकल्प (भूवैज्ञानिक)|महाकल्प]] को [[शैलस्तर-क्रम-विज्ञान]] में एक नवीन महाकल्प का प्रारंभ माना जात है। इस महाकल्प को [[मध्य-जीव-कल्प]] कहते हैं। इस महाकल्प के अंतर्गत तीन कल्प आते हैं, जिन्हें ट्राइऐसिक, जुरैसिक और [[क्रिटेशियस कल्प|क्रिटेशियस]] कहते हैं। ट्राइऐसिक कल्प इनमें सबसे प्राचीन है।
 
१८३४ ई. में दक्षिण-पश्चिमी [[जर्मनी]] में स्थित इस प्रणाली के तीन शैलसमूहों के आधार पर फॉन एलबर्टो ने इस प्रणाली को ट्राइऐसिक नाम दिया।