"राष्ट्रवाद" के अवतरणों में अंतर

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के पुनर्संयोजन की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है और मौजूदा राष्टोंं के अन्दर भी अलगाववादी संघर्ष आम बात है।
 
राष्ट्रवाद कई चरणों से गुजर चुका है। उदाहरण के लिए, उन्नीसवीं शताब्दी के यूरोप में इसने कई छोटी-छोटी रियासतों के एकीकरण से वृहत्तर राष्ट्र-राज्यों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। आज के [[जर्मनी]] और [[इटली]] का गठन एकीकरण और सुदृढ़ीकरण की इसी प्रक्रिया वेफके जरिए हुआ था। [[लातिन अमेरिका]] में बड़ी संख्या में नए राज्य भी स्थापित किए गए थे। राज्य की सीमाओं के सुदृढ़ीकरण के साथ स्थानीय निष्ठाएँ और बोलियाँ भी उत्तरोत्तर राष्ट्रीय निष्ठाओं एवं सर्वमान्य जनभाषाओं के रूप में विकसित हुईं। नए राष्ट्रों के लोगों ने एक नई राजनीतिक पहचान अर्जित की, जो राष्ट्र-राज्य की सदस्यता पर आधारित थी।
 
लेकिन राष्ट्रवाद बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन में भी सहभागी रहा है। यूरोप में बीसवीं शताब्दी के आरम्भ में ऑस्ट्रियाई-हंगेरियाई और [[रूसी साम्राज्य]] तथा इनके साथ एशिया और अप्रफीका में [[ब्रितानी साम्राज्य|ब्रिटिश]], [[प्रांसीसीफ्रांसीसी साम्राज्य|प्रफांसीसीफ्रांसीसी]], [[डच साम्राज्य|डच]] और [[पुर्तगाली साम्राज्य|पुर्तगाली साम्राज्यों]] के विघटन के मूल में राष्ट्रवाद ही था। [[भारत]] तथा अन्य भूतपूर्व उपनिवेशों के औपनिवेशिक शासन से स्वतन्त्र होने के संघर्ष भी राष्ट्रवादी संघर्ष थे। ये संघर्ष विदेशी नियंत्रण से स्वतन्त्र राष्ट्र-राज्य स्थापित करने की आकांक्षा से प्रेरित थे।
 
आमतौर से यह माना जाता है कि राष्ट्रों का निर्माण ऐसे समूह द्वारा किया जाता है जो कुल या भाषा अथवा धर्म या फिर जातीयता जैसी कुछेक निश्चित पहचानों में समानता हो। लेकिन ऐसे निश्चित विशिष्ट गुण वास्तव में हैं ही नहीं जो सभी राष्ट्रों में समान रूप से मौजूद हों। कई राष्ट्रों की अपनी कोई एकमात्र भाषा नहीं है। [[कनाडा]] का उदाहरण सामने है। कनाडा में अंग्रेजी