"अंग्रेजी शब्दकोशों का इतिहास" के अवतरणों में अंतर

इसके बाद १८वीं शती के अंत तक अंग्रेजी में अनेक कोश बने । विलियम कर्निक, विलियम पैरी, टामस शेरिडन और जान वाकर ने उच्चारण आदि की समस्या को सुलझाने का प्रयत्न किया । इन कोशों को 'जोँनसन ' के कोश का संक्षिप्त या लघु संस्करण कहा गया है । उच्चारण का ठीक ठीक स्वरुप बताने का कार्य समस्यात्मक था । उसका पूर्णतः समाधान करने की चेष्टा 'जांनसन' या बाद के कोशकारों ने की । जौंन वाकर ने उक्त दिशा में विशेष प्रयत्न किया । इन कारणों से 'जोंनसन' के कोश की कुछ आलोचना भी होती रही । पर १९ वीं शती के पूर्वार्ध से उसका संमान बढ़ गया, उसकी महत्ता स्वीकृत हो गई । उसमें नए शब्दों, अर्थों, उद्धरणों आदि के परिवर्धन- कारी परिशिष्टों कों, अनेक विद्वानों की सहायता से जोड़कर उक्त कोश के संशोधित और संवर्धित संस्करण प्रकाशित होते रहे । १८९८ में ऐसी ही एक संस्करण प्रकाशित हुआ जो अब तक मान्य बना हुआ है ।
 
==वेब्स्टर का अमरीकी अंग्रेजी का शब्दकोश==
इंग्लिस्तानियों के अंग्रेजी प्रयोगों से अमेरिकनों की अंग्रेजी को स्वतंत्र देखकर [[वेब्स्टर]] ने अमेरिकी अंग्रेजी का एक महत्वपूर्ण कोश बनाया । परंतु उनके कोश की बहुत सी व्युत्पत्तियाँ ऐतिहासिक प्रमाणो पर आधारित न होकर निज की स्वतंत्र कल्पना से आव्ष्कृत थीं । बाद के संस्करणों में भाषाविज्ञों ने उनका संशोधन कर दिया । आज भी वेब्स्टर के इस कोश का दो जिल्दों में 'इन्टरनैशनल' संस्करण प्रकाशित होता है और कुछ दृष्टियों से इसका आज भी महत्व बना हुआ है । इस युग का दूसरा कोशकार रिचर्डसन था । उसके कोश में उद्धरणों के द्वारा शब्दार्थबोध की युक्ति महत्वपूर्ण मानी गई और अर्थबोधक परिभाषाओं को हटाकर केवल उद्धरणों से अर्थ—प्रहत्यायन की पद्धति अपनाई गई । जांनसन से भी आगे बढ़कर — १३०० ईस्वी के पूर्ववर्ती चासर, गोवर आदि कलाकारों के लेखखंडों को उसने उदवृत किया । परंतु उद्धरणों की तिथि उन्होने नहीं दी । व्यावहारिक दृष्टि से अमसाध्य, अधिक व्यय— समय— साध्य यह पद्धति— शब्दकोश से अर्थज्ञान की कामना करनेवाले पाठकों के लिये उपयोगीऔर सुविधाजनक न हुई । सामान्य पाठकों के लिये यह अति क्लिष्ट भी थी तथा अर्थ तक पहुँचने में समय भी बहुत लगता था । फिर भी कभी- कभी अनिश्चय रह ही जाता था । जनता में अधिक उपयोगी और लोकप्रिय न होने परह भी इस कोश से एक बडा भारी लाभ हुआ । प्राचीन और प्रसिद्ध लेखकों के अत्यधिक उद्धरणों का इसमें संकलन हो गवा और वले स्थायी रूप में सुरक्षित भी हो गए ।
इंग्लिस्तानियों के अंग्रेजी प्रयोगों से अमेरिकनों की अंग्रेजी को स्वतंत्र देखकर [[वेब्स्टर]] ने अमेरिकी अंग्रेजी का एक महत्वपूर्ण कोश बनाया । परंतु उनके कोश की बहुत सी व्युत्पत्तियाँ ऐतिहासिक प्रमाणो पर आधारित न होकर निज की स्वतंत्र कल्पना से आविष्कृत थीं । बाद के संस्करणों में भाषाविज्ञों ने उनका संशोधन कर दिया । आज भी वेब्स्टर के इस कोश का दो जिल्दों में 'इन्टरनैशनल' संस्करण प्रकाशित होता है और कुछ दृष्टियों से इसका आज भी महत्व बना हुआ है ।
 
==रिचर्डसन का शब्दकोश==
इंग्लिस्तानियों के अंग्रेजी प्रयोगों से अमेरिकनों की अंग्रेजी को स्वतंत्र देखकर [[वेब्स्टर]] ने अमेरिकी अंग्रेजी का एक महत्वपूर्ण कोश बनाया । परंतु उनके कोश की बहुत सी व्युत्पत्तियाँ ऐतिहासिक प्रमाणो पर आधारित न होकर निज की स्वतंत्र कल्पना से आव्ष्कृत थीं । बाद के संस्करणों में भाषाविज्ञों ने उनका संशोधन कर दिया । आज भी वेब्स्टर के इस कोश का दो जिल्दों में 'इन्टरनैशनल' संस्करण प्रकाशित होता है और कुछ दृष्टियों से इसका आज भी महत्व बना हुआ है । इस युग का दूसरा कोशकार रिचर्डसन था । उसके कोश में उद्धरणों के द्वारा शब्दार्थबोध की युक्ति महत्वपूर्ण मानी गई और अर्थबोधक परिभाषाओं को हटाकर केवल उद्धरणों से अर्थ—प्रहत्यायनअर्थ-प्रहत्यायन की पद्धति अपनाई गई । जांनसन से भी आगे बढ़कर - १३०० ईस्वी के पूर्ववर्ती [[चासर]], [[गोवर]] आदि कलाकारों के लेखखंडों को उसने उदवृत किया । परंतु उद्धरणों की तिथि उन्होने नहीं दी । व्यावहारिक दृष्टि से अमसाध्यश्रमसाध्य, अधिक व्यय— समय— व्यय-समय-साध्य यह पद्धति—पद्धति शब्दकोश से अर्थज्ञान की कामना करनेवाले पाठकों के लिये उपयोगीऔरउपयोगी और सुविधाजनक न हुई । सामान्य पाठकों के लिये यह अति क्लिष्ट भी थी तथा अर्थ तक पहुँचने में समय भी बहुत लगता था । फिर भी कभी- कभी अनिश्चय रह ही जाता था । जनता में अधिक उपयोगी और लोकप्रिय न होने परह भी इस कोश से एक बडा भारी लाभ हुआ । प्राचीन और प्रसिद्ध लेखकों के अत्यधिक उद्धरणों का इसमें संकलन हो गवा और वले स्थायी रूप में सुरक्षित भी हो गए ।
 
==आक्सफोर्ड डिक्शनरी: योजना और निर्माण==