"उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ" के अवतरणों में अंतर

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'''उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान''' हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये कार्यरत प्रमुख संस्था है। अन्य कार्यक्रमों के अलावा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिये साहित्यकारों को यह कई पुरस्कार प्रदान करती है।
'''हिंदी''' के अखिल भारतीय स्वरूप को समस्तरीय बनाने के लिए तथा संपूर्ण राष्ट्र में इसके शिक्षण को मजबूत आधार प्रदान करने के उद्देश्य से १९ मार्च, १९६० ई० को [[भारत सरकार]] के तत्कालीन शिक्षा एवं समाज कल्याण मंत्रालय ने स्वायत्तशासी संस्था ''केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल'' का गठन किया और इसे ०१-११-१९६० को [[लखनऊ]] में पंजीकृत करवाया।
 
==लक्ष्य एवं कार्य==
मंडल के प्रमुख कार्य निम्नलिखित निर्धारित किए गए: -
उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान [[साहित्य]], [[कला]], [[विज्ञान]] के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान करती है। यह विदेशों में हिंदी के प्रसार में योगदान के लिए भी पुरस्कार देती है। [[पत्रकारिता]] के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान [[गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार]] प्रदान करती है। इसके अलावा [[भारत-भारती सम्मान]], [[लोहिया साहित्य सम्मान]], [[महात्मा गांधी सम्मान]], [[हिंदी गौरव सम्मान]], [[बालकृष्ण भट्ट पुरस्कार]], [[पत्रकारिता भूषण पुरस्कार]], [[प्रवासी भारतीय हिंदी भूषण सम्मान]], [[हिंदी विदेश प्रसार सम्मान]] आदि कई पुरस्कार दिये जाते हैं।
* हिंदी शिक्षकों को प्रशिक्षित करना।
 
* हिंदी शिक्षण के क्षेत्र में अनुसंधान हेतु सुविधाएँ उपलब्ध करवाना।
 
* उच्चतर हिंदी भाषा एवं साहित्य और भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी के तुलनात्मक भाषाशास्त्रीय अध्ययन के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करवाना।
 
* हिंदीतर प्रदेशो के हिंदी अध्येताओं की समस्याओं को सुलझाना।
 
* भारतीय संविधान के अनुच्छेद 351 में उल्लिखित हिंदी भाषा के अखिल भारतीय स्वरूप के विकास के लिए प्रदत्त निर्देशों के अनुसार हिंदी को अखिल भारतीय भाषा के रूप मे विकसित करने के लिए समुचित कार्रवाई करना।
 
भारत सरकार द्वारा ''केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल'' को [[अखिल भारतीय हिंदी प्रशिक्षण महाविद्यालय]] के संचालन का दायित्व सौंपा गया। इस महाविद्यालय का नाम १ जनवरी, १९६३ को '''[[केंद्रीय हिंदी शिक्षण महाविद्यालय]]''' रखा गया तथा दिनांक १९ अक्टूबर, १९६३ को संपन्न शासी परिषद् की बैठक में इसे बदलकर '''[[केंद्रीय हिंदी संस्थान]]''' कर दिया गया। केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्यालय [[आगरा]] में है। इसके आठ केंद्र- [[दिल्ली]], [[हैदराबाद]], [[गुवाहाटी]], [[शिलांग]], [[मैसूर]], [[दीमापुर]], [[भुवनेश्वर]] तथा [[अहमदाबाद]] हैं।
 
{{हिन्दी सेवी संस्थाएं‎}}