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वैष्णव पदावली

वैष्णव पदवली आंदोलन मध्ययुगीन बंगाली साहित्य में 15 वीं से 17 वीं शताब्दी तक की अवधि को संदर्भित करता है, जो कि राधा-कृष्ण कथा पर ध्यान केंद्रित करते हुए वैष्णव कविताओं के पुष्पक्रम से चिह्नित होता है।

बंगला साहित्य में वैष्णव कवियों द्वारा १५वीं शताब्दी से लेकर १७वीं शताब्दी तक रचित साहित्य वैष्णब पदावली नाम से जाना जाता है। इसमें प्रधानतः राधा और कृष्ण की प्रेमलीला को आधार बनाकर साहित्य रचा गया। यह आन्दोलन विद्यापति और चण्डीदास से आरम्भ हुआ, सोलहवीं शताब्दी में इसका विकास हुआ।