जल संकट से शहर तो या जंगलात भी चक्रव्यूह में! www.rashtrachandika.com जल संकट से शहर तो या जंगलात भी चक्रव्यूह में! शासकीय योजनाओं की खुली पोल : जल स्तर निचले स्तर पर राष्ट्रचंडिका सिवनी। गर्मी का मौसम अभी परवान नही चढ़ा है। अभी मार्च चल रहा है अपै्रल, मई और जून आने हैं। जिले में चारो ओर पानी की त्राही-त्राही मची हुई है। लाख दावों के बावजूद जल प्रबंधन का सिस्टम फेल हो चुका है। घोषणाऐं और योजनायें दम तोड़ चुकी हैं। पिछले साल वर्षा ऋतु के आगाज के साथ ही शासन और प्रशासन स्तर पर जल प्रबंधन और संरक्षण को लेकर शासकीय और जनसंपर्क विभाग के ढोल के माध्यम से आगामी दिनों के लिए योजनाओं की घोषणाएं की गई। स्थिति अब यह है कि संकट गहराते प्रशासन और जनप्रतिनिधि बगले झांक रहे हैं। योजनाएं या तो बनाई ही नही गई या फिर वह लालफीताशाही की भेंट चढ़ गई। स्थाई जल स्त्रोत सूख चुके हैं। झिरिया, कुएं, बावली में सूखी चट्टाने नजर आ रही हैं। जल स्तर के काफी और काफी निम्र स्तर पर चले जाने से बोर भी दम तोड़ चुके हैं। बैनगंगा नीद का भीमगढ़ बांध खतरनाक कम जल स्तर पर पहुंच गया हैं। जिससे सिवनी नगर में पेयजल संकट गहरा गया हें। आगे गर्मी में या हाल होगा इसकी भयावह कल्पना ही की जा सकती हैं। अब इस स्थिति में प्रशासन के हाथपैर फूल रहें हैं। टैंकरों से भी इतनी बड़ी आबादी को जल-प्रदाय संभव नही नजर आ रहा हैं। यह सब हुआ यों? पहले से इस ओर समय रहते यों नही ठोस कदम उठाये गये। शहरी निर्माण कार्यो पर ‘वाटर हार्वेस्टिंगÓ के टै स, तो लिए गए। पर या उनकी मुक मल निगरानी पालिका द्वारा की गई? तालाबों, जलाशयों, बांधों से गाद (स्लिट) निकाली गई? उनका गहरीकरण कराया गया? पानी रोको-पानी सोखो अभियान का या हुआ? यह तमाम वे यक्ष प्रश्र है जिसका जवाब जनता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से चिल्ला-चिल्ला कर मांग रही है। शहरी तो या ग्रामीण क्षेत्रों में भी जानलेवा हालात बनते जा रहे हैं। जंगलातों में भी यही स्थिति है। जल स्त्रोतों के असमय सूख जाने से जंगली जानवर रहवासी बसाहटों का रूख कर रहे हैं। कहां गई जंगली जानवरों की पानी योजनायें….।