सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत जिसे 'एन आई टी सूरत' के नाम से भी जाना जाता है, प्रौद्योगिकी एवम अभियांत्रिकी का राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है। यह भारत के लगभग तीस राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एन आई टी) में से एक है। इसे भारत सरकार ने १९६१ में स्थापित किया था। इसकी संगठनात्मक संरचना एवम स्नातक प्रवेश प्रक्रिया शेष सभी एन आई टी की तरह ही है। संस्थान में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, विज्ञान मानविकी और प्रबंधन में स्नातक, पूर्व स्नातक एवम डॉक्टरेट के पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, सूरत
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आदर्श वाक्य:विज्ञानम सारथि
स्थापित१९६१
प्रकार:शिक्षा और शोध संस्थान
अध्यक्ष:डॉ शेरेकर
निदेशक:डॉ पी डी पोरे
शिक्षक:२५०
स्नातक:५००० (अनुमानित)
स्नातकोत्तर:८०० (अनुमानित)
अवस्थिति:सूरत, गुजरात,, भारत
परिसर:२६० एकड़ (१.२ वर्ग किमी)
जालपृष्ठ:[1]

इतिहाससंपादित करें

यह पंडित जवाहर लाल नेहरू का सपना था कि भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एक नेता के रूप में उभरे। प्रशिक्षित गुणवत्ता एवम तकनीकी जनशक्ति की बढ़ती मांग को पुरा करने के लिये भारत सरकार ने १९५९ और १९६५ के बीच चौदह आरईसी शुरू की (भोपाल, इलाहाबाद, कालीकट, दुर्गापुर, कुरुक्षेत्र, जमशेदपुर, जयपुर, नागपुर, राउरकेला, श्रीनगर, सूरतकल, सूरत, त्रिची और वारंगल में स्थित एनआईटी)। सरदार वल्लभभाई रीजनल कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्ड टैक्नोलॉजी जून १९६१ में भारत सरकार और गुजरात की सरकार के बीच एक सहकारी उद्यम के रूप में स्थापित किया गया था। यह भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर है।

केंद्र सरकार ने १९९८ मे आरईसी की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया। डॉ॰ आर.ए माशेलकर की अध्यक्षता में समिति ने १९९८ में रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसका शीर्षक था ' भविष्य मे आरईसी का शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए सामरिक रोड मैप'। समीक्षा समिति की सिफारिशों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने मानकर सत्रह क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज (आरईसी) कालेजों को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (एनआईटी) मे प्रोन्नत कर दिया। २००३ मे यूजीसी / एआईसीटीई के अनुमोदन से संस्थान को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया एवम नाम बदलकर सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कर दिया गया। भारत की संसद ने ५ जून २००७ को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान अधिनियम पारित कर इन्हे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान घोषित किया।

प्रशासनसंपादित करें

 
स्वामी विवेकानन्द छात्रावास

परिसरसंपादित करें

परिसर मुम्बई के उत्तर मे २६५ किलोमीटर की दूरी पर सूरत मे स्थित है। परिसर 265 एकड़ में हरे भरे जंगल में फैला हुआ है। मुख्य प्रवेश द्वार परिसर के दक्षिणी छोर पर स्थित है और सूरत रेलवे स्टेशन से सूरत-ड्युमस राजमार्ग पर 13 किमी दूर स्थित है। १.१ वर्ग किलोमीटर (२६५ एकड़) परिसर में ५००० निवासियों जिसमे 210 संकाय सदस्यों और लगभग ४,००० परिसर हॉस्टल पर रहने वाले छात्र शामिल है।

प्रवेश और शिक्षासंपादित करें

छात्र जीवनसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

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  1. http://www.indianexpress.com/news/svnit-meet-on-progress-in-mechanical-engineering-education-research/498065/
  2. http://www.indianexpress.com/news/Meeting-chalks-out-strategy-to-bring-students--industry-closer/575294
  3. Thomas, Melvyn (3 फ़रवरी 2010). "SGCCI traffic cell to help cops solve city's traffic problem". The Times Of India.
  4. "Over 10,000 Run for Surat". The Times Of India. 31 जनवरी 2010.
  5. Mehta, Yagnesh (9 अगस्त 2010). "SVNIT measures ground water recharge". The Times Of India.
  6. "SVNIT, SKF Bearing join hands for short courses". The Times Of India. 15 अप्रैल 2010.
  7. "New journal to feature techies' innovations by SVNITian".
  8. Mehta, Yagnesh (3 नवम्बर 2009). "SVNIT to develop NIT in Meghalaya". The Times Of India.
  9. Bhatt, Himanshu (9 मई 2010). "SVNIT prof develops low-cost water softening system". The Times Of India.
  10. Mehta, Yagnesh (18 अक्टूबर 2006). "Google shortlists six from SVNIT". The Times Of India.
  11. "Autumnfest '09 inaugurated at SVNIT". The Times Of India. 31 अक्टूबर 2009.
  12. "SVNIT's autumn fest begins today". The Times Of India. 30 अक्टूबर 2009.
  13. "Over 15K students to participate in Mindbend". The Times Of India. 5 मार्च 2010.
  14. "TEQIP Phase II to create parity between NITs and IITs". The Hindu. Chennai, India. 3 नवम्बर 2008.