मुख्य मेनू खोलें

भोपाल भारत देश में मध्य प्रदेश राज्य की राजधानी है और भोपाल ज़िले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। भोपाल को राजा भोज की नगरी तथा झीलों की नगरी कहा जाता है क्योंकि यहाँ कई छोटे-बड़े ताल हैं। यह शहर अचानक सुर्ख़ियों में तब आ गया जब १९८४ में अमरीकी कंपनी, यूनियन कार्बाइड से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से लगभग बीस हजार लोग मारे गये थे। भोपाल गैस कांड का कुप्रभाव आज तक वायु प्रदूषण, भूमि प्रदूषण, जल प्रदूषण के अलावा जैविक विकलांगता एवं अन्य रूपों में आज भी जारी है। इस वजह से भोपाल शहर कई आंदोलनों का केंद्र है।

भोपाल
झीलोंं का शहर
शहर
NLIUGyanmandir3.JPGBhopal boat club 02.JPG
Taj-ul-masajid.jpgMantralaya, Vallabh Bhavan, Bhopal.jpg
Lakshmi Narayan Temple 01.jpgCheetal (spotted deer) at Van Vihar National Park.jpg
ऊपर से दक्षिणावर्त
भोज ताल, वल्लभ भवन (एम॰पी॰ सचिवालय), वन विहार, बिरला मंदिर, ताज-उल-मस्जिद तथा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी
देशभारत
राज्यमध्य प्रदेश
ज़िलाभोपाल
जनसंख्या (2011)[1]
 • शहर17,98,218
 • महानगर18,83,381
समय मण्डलआइएसटी (यूटीसी+5:30)
वेबसाइटwww.bhopalmunicipal.com

भोपाल में भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) का एक कारखाना है। हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ने अपना दूसरा 'मास्टर कंट्रोल फ़ैसिलटी' स्थापित की है। भोपाल में ही भारतीय वन प्रबंधन संस्थान भी है जो भारत में वन प्रबंधन का एकमात्र संस्थान है। साथ ही भोपाल उन छह नगरों में से एक है जिनमे २००३ में भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान खोलने का निर्णय लिया गया था तथा वर्ष २०१५ से यह कार्यशील है। इसके अतिरिक्त यहाँ अनेक विश्वविद्यालय जैसे NIT Bhopal,राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय,बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय,अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय,मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय,माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय,भारतीय राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय। इसके अतिरिक्त अनेक राष्ट्रीय संस्थान जैसे National Institute of Technology, Bhopal,अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान,भारतीय वन प्रबंधन संस्थान,भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान ,राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान मानित विश्वविद्यालय भोपाल इंजीनियरिंग महाविद्यालय,गाँधी चिकित्सा महाविद्यालय तथा अनेक शासकीय एवं पब्लिक स्कूल हैं।

इतिहाससंपादित करें

 
गोलघर

भोपाल का प्राचीन नाम भूपाल है अर्थात् भूपाल, भू-पाल भू = भूमि, पाल=दूध। एक दूसरा मत यह है कि इस शहर का नाम एक अन्य राजा भूपाल शाही के नाम पर पड़ा।

भोपाल की स्थापना परमार राजा भोज ने १०००-१०५५ ईस्वी में की थी। उनके राज्य की राजधानी धार थी, जो अब मध्य प्रदेश का एक जिला है। शहर का पूर्व नाम 'भोजपाल' था जो भोज और पाल के संधि से बना था। परमार राजाओं के अस्त के बाद यह शहर कई बार लूट का शिकार बना। परमारों के बाद भोपाल शहर में अफ़गान सिपाही दोस्त मोहम्मद (1708-1740) का शासन रहा; इसलिये भोपाल को नवाबी शहर माना जाता है,आज भी यहाँ मुगल संस्कृति देखी जा सकती है। मुगल साम्रज्य के विघटन का फ़ायदा उठाते हुए खान ने बेरासिया तहसील हड़प ली। कुछ समय बाद गोण्ड रानी कमलापती की मदद करने के लिए खान को भोपाल गाँव भेंट किया गया। रानी की मौत के बाद खान ने छोटे से गोण्ड राज्य पर कब्ज़ा जमा लिया।

१७२०-१७२६ के दौरान दोस्त मुहम्मद खान ने भोपाल गाँव की किलाबन्दी कर इसे एक शहर में तब्दील किया। साथ ही उन्होंने नवाब की पदवी अपना ली और इस तरह से भोपाल राज्य की स्थापना हुई। मुगल दरबार के सिद्दीकी बन्धुओं से दोस्ती के नाते खान ने हैदराबाद के निज़ाम मीर क़मर-उद-दीन (निज़ाम-उल-मुल्क) से दुश्मनी मोल ले ली। सिद्दीकी बन्धुओं से निपटने के बाद १७२३ में निज़ाम ने भोपाल पर हमला कर दिया और दोस्त मुहम्मद खान को निज़ाम का आधिपत्य स्वीकार करना पड़ा।

मराठाओं ने भी भोपाल राज्य से चौथ (कुल लगान का चौथा हिस्सा) वसूली की। १७३७ में मराठाओं ने मुगलों को भोपाल की लड़ाई में मात दी। खान के उत्तराधिकारियों ने १८१८ में ब्रिटिश हुकुमत के साथ सन्धि कर ली और भोपाल राज्य ब्रिटिश राज की एक रियासत बन गया। १९४७ में जब भारत को आज़ादी मिली, तब भोपाल राज्य की वारिस आबिदा सुल्तान पाकिस्तान चली गईं। उनकी छोटी बहन बेगम साजिदा सुल्तान को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया। १ जून १९४९ में भोपाल राज्य का भारत में विलय[2] हो गया।

भोपाल के स्थान -बड़ा तालाब भोपाल ,भोपाल oका मंदिर एवं भोपाल मंदिर

भोपाल मेट्रोसंपादित करें

भोपाल मेट्रो एक निर्माणाधीन रैपिड ट्रांजिट सिस्टम है[3]। फिलहाल भोपाल मेट्रो में दो रूट पर काम हो रहा है[4]अंगूठाकार|भोपाल मेट्रो रूट

रूट नंबर: लाइन २: करोंद चौराहा - भोपाल टॉकीज - रेलवे स्टेशन - भारत टॉकीज - पुल बोगदा - सुभाष नगर अंडरपास - डीबी मॉल - बोर्ड ऑफिस चौराहा - हबीबगंज नाका - अलकापुरी बस स्टॉप - ऐ आई आई ऍम स रूट की लम्बाई : १४. ९९ किमी

रूट नंबर: लाइन ५: डिपो चौराहा - जवाहर चौक - रोशनपुरा चौराहा - मिंटो हॉल - लिली टॉकीज़ - जिन्सी डिपो - बोगदा पुल - प्रभात चौराहा - अप्सरा टॉकीज - गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया - जे के रोड - रत्नागिरी चौराहा रूट की लम्बाई : १२ . ८८ किमी

भोपाल गैस त्रासदीसंपादित करें

 
भोपाल गैस त्रासदी

भोपाल गैस काण्ड विस्तार में देखें।

भौगोलिक स्थितिसंपादित करें

भोपाल भारत के मध्य भाग में स्थित है और इसके निर्देशांक २३.२७º उ. एवं ७७.४º पू. हैं। यह विंध्य पर्वत श्रृंखला के पूर्व में है। भोपाल एक पहाड़ी इलाक़े पर स्थित है किंतु इसका तापमान अधिकतर गर्म रहता है। इसका भू-भाग ऊँचा-नीचा है एवं इसके दायरे में कई छोटे पहाड़ हैं। उदाहरण के लिए श्यामला हिल, ईदगाह हिल, अरेरा हिल, कतारा हिल इत्यादि। यहाँ गर्मियाँ गर्म और सर्दियाँ सामान्य ठण्डी रहती हैं। बारिश का मौसम जून से ले के सितंबर-आक्टोबर तक रहता है और सामान्य वर्षा दर्ज की जाती है। २०१९ मानसून में भोपाल में ४० वर्षों में सबसे अधिक वर्षा हुई है [5]

नगर निगम की सीमा २८९ वर्ग कि. मी. है। शहरी सीमा के भीतर दो मानव निर्मित झीलें है जो संयुक्त रूप से भोज स्थल के नाम से जानी जाती हैं। बड़ी झील राजा भोज द्वारा निर्मित करवाई गई थी जिसका कुल जल ग्रहण क्षेत्र ३६१ वर्ग कि. मी. है। छोटी झील का निर्माण राजा भोज ने करवाया।

पर्यटनसंपादित करें

 
लक्ष्मीनारायण मंदिर

यहां का छोटा तालाब, बड़ा तालाब, भीम बैठका, अभयारण्य, शहीद भवन तथा भारत भवन देखने योग्य हैं। भोपाल के पास स्थित सांची का स्तूप भी पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। भोपाल से लगभग २८ किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर मन्दिर एक एतिहासिक दर्शनिय स्थल है।

 
मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की भोपाल दर्शन गाड़ी
लक्ष्मीनारायण मंदिर, भोपाल
भोपाल के अरेरा पहाड़ी पर पाँच दशक पूर्व स्थापित बिड़ला मंदिर वर्षों से धार्मिक आस्था का केन्द्र रहा है। मंदिर में स्थापित भगवान श्रीहरि विष्णु एवं लक्ष्मीजी की मनोहारी प्रतिमाएँ बरबस ही श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकृष्ट कर रही हैं। करीब 7-8 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र में फैले इस मंदिर की ख्याति देश व प्रदेश के विभिन्न शहरों में फैली हुई है।
जानकारों के अनुसार इस मंदिर का शिलान्यास वर्ष 1960 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ॰ कैलाशनाथ काटजू ने किया था और उद्‍घाटन वर्ष 1964 में मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के हाथों संपन्न हुआ। मंदिर के अंदर विभिन्न पौराणिक दृश्यों की संगमरमर पर की गई नक्काशी दर्शनीय तो है ही, उन पर गीता व रामायण के उपदेश भी अंकित हैं।
मंदिर के अंदर विष्णुजी व लक्ष्मीजी की प्रतिमाओं के अलावा एक ओर शिव तथा दूसरी ओर माँ जगदम्बा की प्रतिमा विराजमान हैं। मंदिर परिसर में हनुमानजी एवं शिवलिंग स्थापित हैं। वहीं मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के सामने बना विशाल शंख भी दर्शनीय है। मंदिर की स्थापना के समय पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश नाथ ने बिड़ला परिवार को शहर में उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन देने के साथ ही यह शर्त भी रखी थी कि वह इस दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में एक भव्य तथा विशाल मंदिर का निर्माण करवाएँ। मंदिर के उद्‍घाटन के समय यहाँ विशाल विष्णु महायज्ञ भी आयोजित किया गया था, जिसमें अनेक विद्वानों व धर्म शास्त्रियों ने भाग लिया था। आज भी यह मंदिर जन आस्था का मुख्य केन्द्र बिन्दु है। जन्माष्टमी पर यहाँ श्रीकृष्ण जन्म का मुख्य आयोजन होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर विष्णु की आराधना करते है।
भोजपुर
यह प्राचीन शहर दक्षिण पूर्व भोपाल से 28 किमी की दूरी पर स्थित है। यह शहर भगवान शिव को समर्पित भोजेश्‍वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर को पूर्व का सोमनाथ भी कहा जाता है। भोपाल से 28 किलोमीटर दूर स्थित भोजपुर की स्थापना गुर्जर परमार वंश के राजा भोज ने की थी। इसीलिए यह स्थान भोजपुर के नाम से चर्चित है। इस प्राचीन नगर को उत्तर भारत का सोमनाथ कहा जाता है। यह स्थान भगवान शिव के भव्य मंदिर और साईक्लोपियन बांध के लिए जाना जाता है। यहां के भोजेश्‍वर मंदिर की सुंदर सजावट की गई है। मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर बना है जिसके गर्भगृह में लगभग साढे तीन मीटर लंबा शिवलिंग स्थापित है। इसे भारत के सबसे विशाल शिवलिंगों में शुमार किया जाता है।
मोती मस्जिद, भोपाल
इस मस्जिद को कदसिया बेगम की बेटी सिकंदर जहां बेगम ने 1860 ई. में बनवाया था।
ताज-उल-मस्जिद, भोपाल
 
ताज-उल-मस्जिद, भोपाल
यह मस्जिद भारत की सबसे विशाल मस्जिदों में एक है। इस मस्जिद का निर्माण कार्य भोपाल के आठवें शासक शाहजहां बेगम के शासन काल में प्रारंभ हुआ था, लेकिन धन की कमी के कारण उनके जीवंतपर्यंत यह बन न सकी।
शौकत महल, भोपाल और सदर मंजिल, भोपाल
शौकत महल शहर के बीचोंबीच चौक एरिया के प्रवेश द्वार पर स्थित है।
गोहर महल, भोपाल
 
गौहर महल
झील के किनारे बना यह महल शौकत महल के पीछे स्थित है।
पुरातात्विक संग्रहालय, भोपाल
बनगंगा रोड पर स्थित इस संग्रहालय में मध्यप्रदेश के विभिन्‍न हिस्‍सों से एकत्रित की हुई मूर्तियों को रखा गया है।
भारत भवन, भोपाल
यह भवन भारत के सबसे अनूठे राष्‍ट्रीय संस्‍थानों में एक है। 1982 में स्‍थापित इस भवन में अनेक रचनात्‍मक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय

यह अनोखा संग्रहालय श्यामला की पहाडियों पर 200 एकड के क्षेत्र में फैला हुआ है।

भीमबेटका गुफाएं
दक्षिण भोपाल से 46 किलोमीटर दूर स्थित भीमबेटका की गुफाएं प्रागैतिहासिक काल की चित्रकारियों के लिए लोकप्रिय हैं। यह गुफाएं चारों तरफ से विन्‍ध्‍य पर्वतमालाओं से घिरी हुईं हैं, जिनका संबंध नवपाषाण काल से है। इन गुफाओं के अंदर बने चित्र गुफाओं में रहने वाले प्रागैतिहासिक काल के जीवन का विवरण प्रस्‍तुत करते हैं। यहां की सबसे प्राचीन चित्रकारी को 12 हजार वर्ष पूर्व की मानी जाती है।
शौर्य स्मारक
शौर्य स्मारक शहर के अरेरा हिल्स इलाके में स्थित है। इसका उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 14 अगस्त 2016 को किया गया। स्मारक 12 एकड़ में फैला हुआ है। इसे पार्क के रूप में विकसित किया गया है और पाकिस्तान व चीन से हुए युद्धों से संबंधित प्रदर्शनियां भी है।

भोपाल की वनस्पतियांसंपादित करें

मध्य प्रदेश का भोपाल शहर वनस्पतियों की दृष्टि से अत्यंत ही समृद्ध शहर है। यहाँ पर्याप्त हरियाली मौजूद है। प्रस्तुत लेख में भोपाल शहर के पादपों को उनके वैज्ञानिक नाम तथा हिंदी नाम सहित उनके चित्र को दर्शाया गया है।

भोपाल के पेड़ो की सूची
पादपों के नाम हिंदी नाम परिवार चित्र
अकेसिआ अरिकुलिफार्मिस

Acacia auriculiformis A. Cunn. Ex Benth.

माइमोसेसी

Mimosaceae

Aegle marmelos (L.) Correa. बिल्व रुटेसी

Rutaceae

एल्बिज़िया प्रोसेरा

Albizia procera (Roxb.) benth. 

सफ़ेद सिरिस माइमोसेसी

Mimosaceae

एलस्टोनिया स्कोलेरिस

Alstonia scholaris (L.)R.Br

सप्तपर्णी एपोसाएनेसी

Apocynaceae

एंथोसिफेलस कदंबा

Anthocephalus cadamba (Roxb.) Miq.

कदंब रूबिएसी

Rubiaceae

बाउहिनिया परप्यूरिया

Bauhinia purpurea Linn.

कचनार
बोंबेक्स सीबा

Bombax ceiba Linn.

सेमल बोम्बेकेसी

Bombacaceae

ब्यूटिया मोनोस्पर्मा

Butea monosperma (Lam.) Taub.

पलाश फेबेसी Fabaceae
केसिया फिस्टुला

Cassia fistula Linn.

अमलतास सिसलपिनियेसी

Caesalpiniaceae

केसिया रोक्सबरघाई

Cassia roxburghii  DC

सिसलपिनियेसी

Caesalpiniaceae

केसिया सियामिया

Cassia siamea Lamk.

सिसलपिनियेसी

Caesalpiniaceae

केस्युराईना इक्विसिटिफोलिया

Casuarina equisetifolia Linn.

डलबर्जिया पेनीकुलाटा

Dalbergia paniculata Roxb.

धोबन फेबेसी Fabaceae
डलबर्जिया सिस्सू

Dalbergia sissoo Roxb.

शीशम फेबेसी Fabaceae
डेलोनिक्स रेजिया

Delonix regia (Bojer ex Hook.)Raf.

गुलमोहर
डिलेनिया इंडिका

Dillenia indica Linn.

चालता Dilleniaceae
इरिथ्रिना सुबरोसा

Erythrina suberosa Roxb.

पांगरा फेबेसी

Fabaceae

फाइकस बेंघालेन्सिस

Ficus benghalensis Linn.

बरगद मोरेसी

Moraceae

फाइकस बेंजामिना

Ficus benjamina Linn.

मोरेसी

Moraceae

फाइकस ग्लोमेरटा

Ficus glomerata Roxb.

गूलर मोरेसी

Moraceae

फाइकस रेलीजिओसा

Ficus religiosa Linn.

पीपल मोरेसी

Moraceae

जेकेरंडा

Jacaranda

काईगेलिया पिन्नाटा

Kigelia pinnata

बिग्नोनिएसी Bignoniaceae
लेगार्स्ट्रोमिया स्पेसिओसा

Lagerstromea speciosa

Jharul लिथरेसी Lythraceae
लेयूसीना लेयूकोफ़्लोइया

Leucina leucophloea

रिउंझा माइमोसेसी Mimosaceae
मेंगीफेरा इंडिका

Mangifera indica

आम एनकार्डिएसी Anacardiaceae
मेलिया अज़ाडरक

Melia azadarach

बकायन

Bakayan

मेलिएसी Meliaceae
माइकेलिया चंपाका

Michelia champaca

चम्पा मेग्नोलिएसी Magnoliaceae
मिलिंग्टोनीया होर्टेन्सिस

Millingtonia hortensis

आकाशनीम बिग्नोनिएसी Bignoniaceae
माइमुसोप्स इलेंगी

Mimusaps elengi

मौलश्री सेपोटेसी
मिट्रागायना पर्वीफ्लोरा

Mitragyna parviflora

कैम रूबीएसी Rubiaceae
पोलिएल्थिया लोंगिफोलिया

Polyalthia longifolia

आसोपालव एन्नोनेसी Annonaceae
पोंगामिया पिन्नाटा

Pongamia pinnata

करंज फेबेसी

Fabaceae

स्पेथोडिया केम्पेन्यूलेटा

Spathodia campanulata

बिग्नोनिएसी Bignoniaceae
साईजीजियम क्यूमिनी

Syzygium cumini

जामुन Myrtaceae
टबेबुईया अर्जेंशिया

Tabebuia argentea

बिग्नोनिएसी Bignoniaceae
टबेबुईया रोशिया

Tabebuia rosea

बिग्नोनिएसी Bignoniaceae
टेमेरिंडस इंडिका

Tamarindus indica

ईमली Caesalpiniaceae
टेकोमा स्टेंस

Tecoma stans

बिग्नोनिएसी Bignoniaceae
टर्मिनेलिया कटप्पा

Terminaloa cattapaa

काब्रिटेसी Combretaceae
वाईटेक्स निगुंडो

Vitex negundo

निर्गुंडी वेर्बिनेसी Verbenaceae

आवागमनसंपादित करें

वायु मार्ग

भोपाल का राजा भोज हवाई अड्डा शहर से १२ कि॰मी॰ की दूरी पर है। दिल्‍ली, मुंबई, इंदौर, अहमदाबाद, चेन्नई, चंडीगढ़, हैदराबाद, कोलकाता, रायपुर से यहां के लिए एयर इंडिया एवम अन्य निजी एयरलाइन्स कंपनियों की नियमित उडान सेवाएँ हैं।

रेल मार्ग

भोपाल का रेलवे स्थानक देश के विविध रेलवे स्थानकों से जुडा हुआ है। यह रेलवे स्थानक भारतीय रेल के दिल्‍ली-चैन्‍नई मुख्य मार्ग पर पड़ता है। शताब्‍दी एक्‍सप्रेस भोपाल को दिल्‍ली से सीधा जोडती है। साथ ही यह शहर मुम्‍बई, आगरा, ग्‍वालियर, झांसी, उज्‍जैन, कोलकाता, चेन्नै, बंगलूरू, हैदराबाद आदि शहरों से अनेक रेलगाडियों के माध्‍यम से जुडा हुआ है।

सडक मार्ग
 
कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राज्यीय बस अड्डा
 
कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राज्यीय बस अड्डा (सम्पूर्ण दृश्य)

सांची, इंदौर,उज्जैन, खजुराहो, पंचमढी, जबलपुर आदि शहरों से आसानी से सडक मार्ग से भोपाल पहुंचा जा सकता है। मध्‍यप्रदेश और पड़ोसी राज्‍यों के अनेक शहरों से भोपाल के लिए नियमित बसें चलती हैं।

चित्र दीर्घासंपादित करें

जनसंख्यासंपादित करें

भोपाल शहर की कुल जनसंख्या (२०११ की जनगणना के अनुसार) कुल १७,९५,६४८ है। भोपाल जिले की कुल जनसंख्या २३,६८,१४५ है। जिसमे करीब ५६% हिन्दू, ४०% मुस्लिम हैं। पुरुषों की संख्या १२,३९,३७८ तथा महिलाओं की संख्या ११,२८,७६७ है। कुल साक्षरता ८२.२६% है (पुरुष: ८७.४४%, महिला: ७६.५७%)।


महत्वपूर्ण व्यक्तिसंपादित करें

  • संभागायुक्त---श्री एसबी सिंह
  • उपायुक्त - श्रीमती उर्मिल मिश्र
  • उपायुक्त राजस्व - श्रीमती उर्मिला सुरेन्द्र शुक्ला
  • उपायुक्त विकास - श्री सी एल डोडियार
  • कलेक्टर---- तरुण पिथोठे
  • सहायक जिलाधीश - श्रीमती शिल्पा
  • आयुक्त नगर निगम -
  • महापौर -आलोक शर्मा

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें