भोपाल का इतिहास

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का इतिहास

भोपाल शहर का स्थापना गोंड राजवंश राजा भूपाल शाह सल्लाम ने 669-679CE में किया था। उनके राज्य की राजधानी भूपाल ही था, जो अब मध्य प्रदेश का एक जिला और राजधानी है। शहर का पूर्व नाम 'भूपाल' था जो राजा भूपाल शाह सल्लाम के नाम पर बना था। गोंड राजवंश राजाओं के अस्त के बाद यह शहर कई बार लूट का शिकार बना।


भूपाल शाह सल्लम
भूपाल शाह साल्लम ,भोपाल के राजा
शासनावधिसन् 650 ई.


भूपाल शाह सल्लाम 6 वि शताब्दी के एक गोंड राजवंश के राजा थे, जिन्होंने भोपल शहर को बासाया। कहा जाता है कि 350 ईस्वी में भोपाल क्षेत्र की जमीन गोंड राजाओं के अधीन हो गई थी परंतु तब यहां पर कोई रिहायशी बस्ती नहीं थी । 650 ईसवी के आसपास एक प्रसिद्ध गोंड राजा हुए जिनका नाम था भूपाल शाह। कहते हैं कि भूपाल शाह प्रजापालक राजा थे और काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने ही इस जमीन को रेजिडेंशियल एरिया घोषित किया और लोगों को रहने एवं खेती करने के लिए जमीन आवंटित।


इसके बाद लगभग 1400 सालों तक भोपाल पर गोंड राजाओं का शासन रहा। भोपाल के आखरी गोंड राजा का नाम निजाम शाह था जिन के सौंदर्य का वर्णन कथाओं में मिलता है, रानी कमलापति इन्हीं की पत्नी थी और भोपाल की आखरी रानी। भोपाल में इन्हीं के नाम पर कमला पार्क बनाया गया जो रानी के महल की छत पर बना हुआ है। भोपाल शहर में स्थित वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का नाम भी रानी कमलापति रेलवे स्टेशन है

राजा भोजपाल आगमन

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भोपाल से करीब 50 किलोमीट दूर राजा भोज एक बार यहां इलाज कराने आए थे बीमारी से निजात पाने के बाद राजा भोज यहां पर एक शिव मंदिर का निर्माण कराना चाहा, लेकिन मंदिर के निर्माण के पहले उनका देहांत हो गया। शिव मंदिर का निर्माण करने के कारण लोगो को लगता है की भोपाल शहर का स्थापना राजा भोज ने कराया था जो की पूर्णतः सही नहीं है!

मुगल आक्रमण

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इसके बाद भोपाल शहर की स्थापना अफ़गान सिपाही दोस्त मुहम्मद ख़ान ने (1708-1740) में की थी। औरंगजेब की मृत्यु के बाद की अफ़रातफ़री में जब दोस्त मोहम्मद दिल्ली से भाग रहा था, तो उसकी मुलाकात गिन्नौरगढ़ की गोंड रानी कमलापती से हुई जिसने दोस्त मोहम्मद से मदद माँगी। वह अपने साथ इस्लामी सभ्यता ले कर आया जिसका प्रभाव उस काल के महलों और दूसरी इमारतों मे साफ़ दिखाई देता है। आज़ादी के पहले भोपाल हैदराबाद के बाद सबसे बड़ा मुस्लिम राज्य था। सन् 1819 ईस्वी से ले के 1926 ईस्वी तक भोपाल का राज चार बेगमों ने संभाला। कुदसिया बेगम सबसे पहली महिला शासक बनीं। वे गौहर बेगम के नाम से भी मशहूर थीं। उनके बाद, उनकी इकलौती संतान, नवाब सिकंदर जहां बेगम शासक बनीं। सिकंदर जहां बेगम के बाद उनकी पुत्री शाहजहांँ बेगम ने भोपाल रियासत की बागडोर संभाली। अंतिम मुस्लिम महिला शासक पुत्री सुल्तान जहाँ बेगम बेगम थीं। बाद में उनके पुत्र हमीदुल्लाह ख़ान गद्दीनशीं हुए, जिन्होंने मई १९४९ तक भोपाल रियासत के विलीनीकरण तक शासन किया। बेगमों के राज मे भोपाल राज्य को रेलवे, डाक-विभाग जैसे अनेक उपहार मिले। सन् 1903 मे नगर निगम का भी गठन हुआ।