यथार्थवाद के प्रवर्त्तक हंगरी के प्रसिद्ध दार्शनिक और साहित्यिक आलोचक जॉर्ज लुकाच माने जाते हैं। यथार्थवाद मुख्य रूप से सत्य पर बल देने वाली विचारधारा है। इस विचारधारा के अंतर्गत यथार्थवाद के कई रूप देखने को मिलते हैं। जैसे-

  1. समाजवादी यथार्थवाद
  2. अतियथार्थवाद
  3. जादुई यथार्थवाद
  4. आदर्शोन्मुख यथार्थवाद

इन्हें भी देखेंसंपादित करें