पाहाड़पुर बौद्धबिहार या सोमपुर बिहार या सोमपुर महाविहार एक प्राचीन बौद्ध बिहार है जो बर्तमान में ध्वंस अवस्था में है। यह बांग्लादेश के नवगाँव जिले के बादलगाछी उपजिले के पहाड़पुर में स्थित है। यह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे प्रसिद्ध बौद्ध बिहारों में से एक है। १८७९ में कनिंघम ने इसकी खोज की थी। वर्ष १९८५ में यूनेस्को ने इसे विश्व विरासत स्थल घोषित किया।

पहाड़पुर बौद्ध बिहार
स्थानीय नाम:
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View of the central shrine
View of the central shrine
स्थान: Naogaon, Bangladesh
निर्देशांक: 25°01′52″N 88°58′38″E / 25.031095°N 88.977284°E / 25.031095; 88.977284
समुद्र सतह से ऊंचाई: 80 फीट (24 मी॰)
निर्माण: 8th century AD
हेतु: Dharama Pala
वास्तु शैली(याँ): Gupta, Pala
यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
प्रकार: Archaeological
मापदंड: i, ii, iv
निर्दिष्ट: 1985 (9th session)
संदर्भ सं: 322
State Party: बांग्लादेश
Region: Asia-Pacific
सोमपुर महाविहार की बांग्लादेश के मानचित्र पर अवस्थिति
सोमपुर महाविहार
Paharpur vihara is in Naogaon, Bangladesh में पहाड़पुर बौद्ध बिहार की अवस्थिति

पालवंश के द्बितीय राजा धर्मपाल देव ने ८वीं शताब्दी के अन्तिम काल में या ९वीं शताब्दी में इस बिहार का निर्माण कराया था। इस बिहार के पास ही स्थित हलूद विहार और सीताकोट विहार (दिनाजपुर जिला) भी उसी काल के हैं। पहाडपुर के बौद्धबिहार को संसार का सबसे बड़ा बौद्ध बिहार कहा जा सकता है। आकार में इसकी तुलना नालन्दा महाविहार से की जा सकती है। यहाँ केवल भारतीय उपमहाद्वीप के ही नहीं बल्कि चीन, तिब्बत, बर्मा, मलेशिया, इन्डोनेशिया आदि देशों के बौद्ध भी धर्मचर्चा एवं धर्मज्ञान करने के लिये यहाँ आते थे। १०वीं शताब्दी में अतीश दीपंकर श्रीज्ञान इस बिहार के आचार्य थे।