स्वरोचिष मनु द्वितीय मनु थे।[1] प्रथम मनु का नाम स्वायम्भूव मनु था।[2] स्वरोचिष मनु अग्नि देव तथा प्रजापति दक्ष की पुत्री स्वाहा से उत्पन्न हुए तथा मनु के पद पर आसीन हुए।[3][4]

मन्वन्तराधिकारी महापुरुषों का वर्णनसंपादित करें

नियमतः हर मनु के कार्यकाल में भगवान का रक्षक के रूप में अंशावतार, इंद्र तथा अलग सप्तर्षि होते हैं। स्वरोचिष मनु में पारावत तथा तुषिगण नाम के अंशावतार रहे। इंद्र के रूप में महाबली पिपश्चित् आसीन रहे। सप्तर्षिमंडल के ऋषिगण प्राण, बृहस्पति, दत्तात्रेय, अत्रि, च्यवन, वायुप्रोक्त तथा महाव्रत रहे। इन मनु के पुत्र हविर्ध्र, सुकृति, ज्योति, आप, मूर्ति, प्रतीत, नभस्य, नभ तथा ऊर्ज हुए।[5]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. हिन्दू इतिहास : ब्रह्म काल की भूमिका[मृत कड़ियाँ]
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 10 नवंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जून 2020.
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 29 अप्रैल 2015 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 4 मई 2015.
  4. भागवत
  5. विष्णु पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें