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अखरोट (अंग्रेजी: Walnut, वैज्ञानिक नाम : Juglans Regia) पतझड़ करने वाले बहुत सुन्दर और सुगन्धित पेड़ होते हैं। इसकी दो जातियां पाई जाती हैं। 'जंगली अखरोट' 100 से 200 फीट तक ऊंचे, अपने आप उगते हैं। इसके फल का छिलका मोटा होता है। 'कृषिजन्य अखरोट' 40 से 90 फुट तक ऊंचा होता है और इसके फलों का छिलका पतला होता है। इसे 'कागजी अखरोट' कहते हैं। इससे बन्दूकों के कुन्दे बनाये जाते हैं।

अखरोट
Juglans major Morton.jpg
Juglans major
Morton Arboretum acc. 614-47*1
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: पादप
विभाग: मैग्नोलियोफ़ाय्टा
वर्ग: मैग्निलियोप्सीडा
गण: फ़ागालेस (Fagales)
कुल: जग्लैंडासीए (Juglandaceae)
वंश: जग्लान्स (Juglans)
L.
Species

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अखरोट का फल एक प्रकार का सूखा मेवा है जो खाने के लिये उपयोग में लाया जाता है। अखरोट का बाह्य आवरण एकदम कठोर होता है और अंदर मानव मस्तिष्क के जैसे आकार वाली गिरी होती है। अखरोट (के वृक्ष) का वानस्पतिक नाम जग्लान्स निग्रा (Juglans Nigra) है। आधी मुट्ठी अखरोट में 392 कैलोरी ऊर्जा होती हैं, 9 ग्राम प्रोटीन होता है, 39 ग्राम वसा होती है और 8 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। इसमें विटामिन ई और बी6, कैल्शियम और मिनेरल भी पर्याप्तं मात्रा में होते है।

विशेषतासंपादित करें

अखरोट का वानस्पतिक नाम जग्लांस निग्रा है और अखरोट का वृक्ष, एक पतझड़ करने वाला वृक्ष है, जिसकी दो प्रजातियाँ पाई जाती हैं I अखरोट का फल गोल आकर का, एकल बीज वाला, एक बहुत ही कड़े खोल वाला  फल होता है I पहले ये फल हरे रंग का होता है, लेकिन आमतौर पर पूरी तरह से पकने के बाद भूरे रंग का दिखाई देता है। फिर छिलका हटाने से अखरोट का खोल का दिखाई देता है, इस कड़े खोल को हटानें पर भूरे रंग के बीज एक दूसरे में संलग्न होते हैं जिसमें एंटीऑक्सिडेंट होते हैं। [1]

प्रकारसंपादित करें

अखरोट की दो सबसे आम प्रमुख प्रजातियां बीज के लिए उगाई जाती हैं - फारसी या अंग्रेजी अखरोट और काले अखरोट। अंग्रेजी अखरोट(जग्लांस रेजिया) फारस में उत्पन्न हुआ, और काले अखरोट (जग्लांस निग्रा)  पूर्वी उत्तर अमेरिका में उत्पन्न हुआ। काला अखरोट स्वाद में ज्यादा अच्छा होता है, लेकिन इसके उत्पादन में कड़ी मेहनत और खराब हुल्लिंग विशेषताओं के कारण, व्यावसायिक स्तर पर, इसका उत्पादन नहीं किया जाता। पर इसके कई संकरों को व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन के लिए विकसित किया गया है, जो लगभग अंग्रेजी अखरोट के समान ही होते हैं। [2]

अन्य प्रजातियों में, कैलिफोर्निया का काला अखरोट, जिसे जग्लांस कैलिफोर्निका कहते है, के अलावा जग्लांस सिनेराय(बर्टनट्स) और जग्लांस एरिजोना पाए जाते हैं।

उत्पादनसंपादित करें

अखरोट के उत्पादन में चीन सबसे आगे हैंs और इसका उत्पादन करने वाले अन्य देशों में प्रमुख हैं - ईरान, अमेरिका, तुर्की और यूक्रेन I पूर्वी यूरोपीय देशों में सबसे ज्यादा उपज होती है जिनमें प्रमुख्य हैं , स्लोवेनिया और रोमानिया। भारत मे कश्मीर घाटी मे इसकी उपज होती है [3] संयुक्त राज्य अमेरिका अखरोट का विश्व का सबसे बड़ा निर्यातक है और उसके बाद तुर्की का स्थान है। [4]

भंडारणसंपादित करें

अखरोट जैसे फलों को अच्छी तरह से संसाधित और संग्रहित किया जाना चाहिए। खराब तरीके से भंडारण के कारण कीट और फफूंदी के होने से अखरोट ख़राब हो जाता है।[1] अखरोट के लंबे समय तक भंडारण के लिए आदर्श तापमान -3 से 0 डिग्री सेल्सियस है। औद्योगिक और घरेलू भंडारण के लिए आद्रता कम होनी चाहिए। [5]

पोषण मूल्यसंपादित करें

बिना खोल के अखरोट में 4% पानी, 15% प्रोटीन, 65% वसा और 14% कार्बोहाइड्रेट और 7% फाइबर पाया जाता है। अखरोट में कई आहार खनिजों की समृद्धता होती है, विशेषकर , मैंगनीज और विटामिन बी भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। [6] अधिकतर कड़े खोल वाले फलों में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड पाया जाता है, इसके विपरीत, अखरोट का तेल मुख्यतः पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड (कुल वसा का 72%), विशेष रूप से अल्फा-लिनोलेनिक एसिड (14%) और लिनोलिक एसिड (58%) से बना है, हालांकि इसमें ओलीक एसिड भी कुल वसा का 13% तक पाया जाता है। [6]

उपयोगसंपादित करें

भोजन में अखरोट का उपयोग

अखरोट को छीलकर ऐसे ही या भून कर खाया जाता है या इसका प्रयोग अन्य खाद्य पदार्थों में एक घटक के रूप में किया जाता है। कई मिठाइयों और अन्य व्यंजनों में इसका प्रयोग किया जाता है। अखरोट बटर और अखरोट तेल के भी बहुत उपयोग हैं। डॉ.पंकज नरम के अनुसार अखरोट का सेवन करने से वृद्धावस्था में भी शरीर की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलती है। [7] डॉ मेर्कल के अनुसार अखरोट वजन कम करने में और दिल की बीमारियों से बचाने में सहायक करता है। [8]

अन्य उपयोग या गैर-खाद्य अनुप्रयोगसंपादित करें

स्याही और रंजक                                                                                                                                                                             

काले अखरोट जग्लांस निग्रा का प्रयोग लिखने और ड्राइंग के लिए उपयोग की जाने वाली एक स्याही को बनाने में किया जाता था। [9] अखरोट के खोल की भूसी बनाकर इसका उपयोग, रंजक के रूप में, कपड़ों के लिए, एक भूरे रंग की डाई के रूप में किया जाता है। [10]

रासायनिक विश्लेषणसंपादित करें

अखरोट के खोल में पोलिफिनाल्स पाए जाते हैं। अखरोट की भूसी में फेरिलिक एसिड, वनिलिक एसिड, कोमेंरिक एसिड, सिरिंजिक एसिड, माइिरिसिटीन, जुगलोन सहित सात फीनोलिक यौगिकों की पहचान की गई है। [11][12]

सन्दर्भसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें