अन्नम भट्ट, सोलहवीं -सत्रहवीं शताब्दी के भारतीय दार्शनिक हैं। उन्होने न्याय और वैशिक दर्शनों से सम्बन्धित अनेक संस्कृत ग्रन्थों की रचना की है जिनमें तर्कसंग्रह और 'तर्कसंग्रहदीपिका' प्रमुख हैं।अन्नम्भट्ट ने बालकों को सुखपूर्वक न्यायपदार्थों का ज्ञान कराने के उद्देश्य से तर्कसंग्रह नामक अन्वर्थ लघुग्रंथ की रचना की तथा इसके अतिसंक्षिप्त अर्थ को स्पष्ट करने के अभिप्राय से स्वयं दीपिका नामक व्याख्या ग्रंथ की भी रचना की।[1]

जीवनसंपादित करें

अन्नाभट्ट तिरुमूलाचार्य के पुत्र थे।एक पांडुलिपि में दीपिका का कॉलोफोन इस प्रकार है अन्नाभट्ट ने अपने पूर्वज राघव के लिए सोम यज्ञ किया था। लेकिन हम उसके बारे में इसके अलावा कुछ नहीं जानते।वह तत्कालीन आंध्र प्रदेश राज्य के उत्तरी आरकोट जिले के तलंगना ब्राह्मण थे, जो बनारस में बस गए थे।उसके पिता तिरुमाला एक ऋग्वेदी स्मार्ट ब्राह्मण थे जो वेदांत दर्शन में पारंगत थे। अन्नामभट्ट पारंपरिक विद्वता के कई क्षेत्रों में एक विद्वान व्यक्ति थे, अर्थात् न्याय, व्याकरण, वेदांत और पूर्व-मीमांसा मे।[2]

अन्य ग्रन्थसंपादित करें

  • मिताक्षरा
  • तत्त्व-बोधिनी-टीका
  • न्याय-परिशिष्ट-प्रकाश
  • सुबोधिनी-सुधासार
  • कात्यायन-प्रतिसाख्य-व्याख्यान
  • महाभाष्य-विवर्णोद्यतन
  • तत्त्वचिन्तामन्यालोक-सिद्धज्ञान
  • ब्रह्मसूत्र-वृत्ति

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "तार संग्रह द्वारा अन्नम भट्ट हिंदी में पीडीएफ मुफ्त डाउनलोड" (अंग्रेज़ी में). 2021-08-07. अभिगमन तिथि 2022-04-08.
  2. "Tarkasamgraha of Ananmbhatta | Exotic India Art". www.exoticindiaart.com (हिंदी में अनुवादित में). अभिगमन तिथि 2022-04-08.सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)