आल्ह-खण्ड

हिंदी में काव्य कृतियाँ, १२वीं शताब्दी के बनाफर नायकों, आल्हा और उदल की वीर कृत्यों का वर्णन करती हैं

आल्ह-खण्ड लोक कवि जगनिक द्वारा लिखित एक वीर रस प्रधान काव्य हैं जिसमें आल्हा और ऊदल की ५२ लड़ाइयों का रोमांचकारी वर्णन हैं। [1] ये दोनों राजपूतों के बनाफर वंश से संबंधित हैं[2]

आल्हखण्ड के नायकों में से एक वीरवर ऊदल

पं० ललिता प्रसाद मिश्र ने अपने ग्रन्थ आल्हखण्ड की भूमिका में आल्हा को युधिष्ठिर और ऊदल को भीम का साक्षात अवतार बताते हुए लिखा है -

"यह दोनों वीर अवतारी होने के कारण अतुल पराक्रमी थे। ये प्राय: १२वीं विक्रमीय शताब्दी में पैदा हुए और १३वीं शताब्दी के पुर्वार्द्ध तक अमानुषी पराक्रम दिखाते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये। वह शताब्दी वीरों की सदी कही जा सकती है और उस समय की अलौकिक वीरगाथाओं को तब से गाते हम लोग चले आते हैं। आज भी कायर तक उन्हें (आल्हा) सुनकर जोश में भर अनेकों साहस के काम कर डालते हैं। यूरोपीय महायुद्ध में सैनिकों को रणमत्त करने के लिये ब्रिटिश गवर्नमेण्ट को भी इस (आल्हखण्ड) का सहारा लेना पड़ा था।"[3]

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Gupta, Asha (1999). Alha Khand (अंग्रेज़ी में). Vani Prakashan.
  2. Patang, Acharya Mayaram (2018). Alha Udal ki Veergatha (hindi में). Prabhat Prakashan. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9789387980006. मूल से 24 सितंबर 2016 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 25 मई 2020.सीएस1 रखरखाव: नामालूम भाषा (link)
  3. मिश्र, पं० ललिता प्रसाद (2007). आल्हखण्ड (15 संस्करण). पोस्ट बॉक्स 85 लखनऊ 226001: तेजकुमार बुक डिपो (प्रा०) लि०. पृ॰ 1 (भूमिका).सीएस1 रखरखाव: स्थान (link)

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें

  • मिश्र, पं० ललिता प्रसाद (2007). आल्हखण्ड (15 संस्करण). पोस्ट बॉक्स 85 लखनऊ 226001: तेजकुमार बुक डिपो (प्रा०) लि०. पृ॰ 614.सीएस1 रखरखाव: स्थान (link)