कुल्लू (Kullu) भारत के हिमाचल प्रदेश राज्य के कुल्लू ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। यह कुल्लू घाटी में ब्यास नदी के किनारे बसा हुआ है। कुल्लू उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है।[1][2]

कुल्लू
Kullu
कुल्लू का दृश्य
कुल्लू का दृश्य
कुल्लू की हिमाचल प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
कुल्लू
कुल्लू
हिमाचल प्रदेश में स्थिति
निर्देशांक: 31°57′36″N 77°06′50″E / 31.960°N 77.114°E / 31.960; 77.114निर्देशांक: 31°57′36″N 77°06′50″E / 31.960°N 77.114°E / 31.960; 77.114
देशFlag of India.svg भारत
प्रान्तहिमाचल प्रदेश
ज़िलाकुल्लू ज़िला
जनसंख्या (2011)
 • कुल18,536
भाषा
 • प्रचलितपहाड़ी, हिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड175101
दूरभाष कोड01902
वाहन पंजीकरणHP 34, HP 66
लिंगानुपात1.17 (1000/852) /
वेबसाइटwww.hpkullu.gov.in
कुल्लू ब्यास नदी के किनारे बसा हुआ है
कुल्लू में पतझड़


विवरणसंपादित करें

कुल्‍लू घाटी को पहले कुलंथपीठ कहा जाता था। कुलंथपीठ का शाब्दिक अर्थ है रहने योग्‍य दुनिया का अंत। कुल्‍लू घाटी भारत में देवताओं की घाटी रही है। हिमाचल प्रदेश में बसा एक खूबसूरत पर्यटक स्‍थल है कुल्‍लु। बरसों से इसकी खूबसूरती और हरियाली पर्यटकों को अपनी ओर खींचती आई है। विज नदी के किनारे बसा यह स्‍थान अपने यहां मनाए जाने वाले रंगबिरंगे दशहरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां 17वीं शताब्‍दी में निर्मित रघुनाथजी का मंदिर भी है जो हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्‍थान है। सिल्‍वर वैली के नाम से मशहूर यह जगह केवल सांस्‍कृतिक और धार्मिक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्‍पोर्ट के लिए भी प्रसिद्ध है।

पर्यटन स्थलसंपादित करें

कुल्‍लू गर्मी के मौसम में लोगों का एक मनपसंद गंतव्‍य है। मैदानों में तपती धूप से बच कर लोग हिमाचल प्रदेश की कुल्‍लू घाटी में शरण लेते हैं। यहां के मंदिर, सेब के बागान और दशहरा हजारों पर्यटकों को कुल्‍लू की ओर आकर्षित करते हैं। यहां के स्‍थानीय हस्‍तशिल्‍प कुल्‍लू की सबसे बड़ी विशेषता है।

रघुनाथजी मंदिरसंपादित करें

इस मंदिर का निर्माण राजा जगत सिंह ने 17वीं शताब्‍दी में करवाया था। कहा जाता है कि एक बार उनसे एक भयंकर भूल हो गई थी। उस गलती का प्रायश्चित करने के लिए उन्‍होंने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। यहां श्री रघुना‍थ अपने रथ पर विराजमान हैं। इस मंदिर में स्‍थापित रघुनाथ जी की प्रतिमा राजा जगत सिंह ने अयोध्‍या से मंगवाई थी। आज भी इस मंदिर की शोभा देखते ही बनती है।

बिजली महादेव मंदिरसंपादित करें

कुल्‍लू से 1४ किलोमीटर दूर पहाडी पर बना यह मंदिर यहां का प्रमुख धार्मिक स्‍थल है। मंदिर तक पहुंचने के लिए कठिन चढ़ाई चढ़नी होती है। यहां का मुख्‍य आकर्षण 100 मी. लंबी ध्वज़(छड़ी) है। इसे देखकर ऐसा ल्रगता है मानो यह सूरज को भेद रही हो। इस ध्वज़ (छड़ी) के बारे में कहा जाता है बिजली कड़कने पर इसमें जो तरंगे उठती है वे भगवान का आशीर्वाद होता है। इस ध्वज पर लग़भग हर साल बिजली गिरती है। कभी-कभी मंदिर के अन्दर शिवलिन्ग पर भी बिजली गिरती है जिस से शिवलिन्ग खऩ्डित हो जाता है। पुजारी खऩ्डित शिवलिन्ग को मक्खन से जोडता है जिस से शिवलिन्ग फिर सामान्य हो जाता है। इस मंदिर से कुल्‍लू और पार्वती घाटी का खुबसूरत नजारा देखा जा सकता है।

कुल्‍लु दशहरासंपादित करें

कुल्‍लु का दशहरा पूरे देश में प्रसि‍द्ध है। इसकी खासियत है कि जब पूरे देश में दशहरा खत्‍म हो जाता है तब यहां शुरु होता है। देश के बाकी हिस्‍सों की तरह यहां दशहरा रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करके नहीं मनाया जाता। सात दिनों तक चलने वाला यह उत्‍सव हिमाचल के लोगों की संस्‍कृति और धार्मिक आस्‍था का प्रतीक है। उत्‍सव के दौरान भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा निकाली जाती है। यहां के लोगों का मानना है कि करीब 1000 देवी-देवता इस अवसर पर पृथ्‍वी पर आकर इसमें शामिल होते हैं।

वॉटर और एडवेंचर स्‍पोर्टसंपादित करें

कुल्‍लु घाटी में अनेक जगह हैं जहां मछली पकड़ने का आनंद उठाया जा सकता है। इन जगहों में पिरडी, रायसन, कसोल नागर और जिया प्रमुख हैं। इसके साथ ही ब्यास् नदी में वॉटर राफ्टिंग का मजा लिया जा सकता है। इन सबके अलावा यहां ट्रैकिंग भी की जा सकती है।

कुल्‍लु के आसपास दर्शनीय स्‍थलसंपादित करें

नग्गरसंपादित करें

यह स्‍थान करीब 1400 वर्षों तक कुल्‍लु की राजधानी रही है। यहां 16वीं शताब्‍दी में बने पत्‍थर और लकड़ी के आलीशान महल आज होटल में बदल चुके हैं। इन होटलों का संचालन हिमाचल पर्यटन निगम करता है। यहां रूसी चित्रकार निकोलस रोएरिक की एक चित्र दीर्घा है। इन सबके अलावा यहां विष्‍णु, त्रिपुरा सुंदरी और भगवान कृष्‍ण के प्राचीन मंदिर भी हैं।

जगतसुखसंपादित करें

जगतसुख कुल्‍लु की सबसे प्राचीन राजधानी है। यह विज नदी के बायीं ओर नागर और मनाली के बीच स्थित है। यहां दो प्राचीन मंदिर हैं। पहला छोटा सा गौरीशंकर मंदिर और दूसरा संध्‍या देवी का मंदिर है।

देव टिब्‍बासंपादित करें

समुद्र से 2953 मी. की ऊंचाई पर स्थित इस जगह को इंद्रालिका के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि महर्षि वशिष्‍ठ ने अर्जुन को पशुपति अस्‍त्र पाने के लिए तप करने का परामर्श दिया था। इसी स्‍थान पर अर्जुन ने इंद्र से यह अस्‍त्र पाने के लिए तप किया था।

बंजारसंपादित करें

यहां श्रृंग ऋषि का प्रसिद्ध मंदिर है। इन्‍हीं ऋषि की याद में यहां प्रति वर्ष मई के महीने में एक उत्‍सव का आयोजन किया जाता है। ठहरने के लिए पीडब्‍ल्‍यूडी का रेस्‍ट हाउस उपलब्‍ध है। कुछ दूरी पर ही जलोरी पास हे जो बन्जार से सिर्फ् १९ किलोमीट‍र दूर् हे जो गर्मियों में भी बर्फ् की चादर से लिप्त रह्ता हे। यहां से कुछ दू‍री प‍र सरयोलसर नाम की झील है, जो देवदार के उंचे-उंचे पेडों के हरे भरे जंगल से घिरी हुई है जो बेह्द सुन्दर है और यहां पर एक नदी बहती है, जिसका नाम तीर्थन नदी है।

मणिकर्णसंपादित करें

यह स्‍थान कुल्‍लु से 43 किलोमीटर दूर है। यह जगह गर्म पानी के झरने के लिए प्रसिद्ध है। हजारों लोग इस पवित्र गर्म पानी में डुबकी लगाते हैं। यहां का पानी इतना गर्म होता है कि इसमें दाल और सब्‍जी पकायी जा सकती हैं। यह हिंदुओं और सिक्‍खों का प्रसिद्ध धार्मिक स्‍थल है। यहां गुरुद्वारे के साथ रामचंद्र और शिवजी का प्राचीन मंदिर भी है।

रुमसूसंपादित करें

यह स्‍थान कुल्‍लु से 25 कि॰मी॰ दूर नग्गर से पूर्व की और 7 कि॰मी॰ जाकर है। एस गाँव से होकर चन्द्राखनी और मलाणा जाते है। इस गाँव में बहुत सारे देवी देवता है पर इनमे प्रमुख भगवान शुभ नारायण है।

 
कुल्लू, लहसनी से एक सुंदर प्रकृति का दृश्य

आवागमनसंपादित करें

वायु मार्ग

कुल्लू-मनाली विमानक्षेत्र निकटतम हवाई अड्डा है, जो कुल्‍लू से 10 किलोमीटर दूर भुंतर में है। यहाँ के लिए दिल्‍ली से नियमित उड़ानें हैं। भुंतर से कुल्‍लू घाटी के लिए बस और टैक्सियां मिल जाती हैं।

रेल मार्ग

निकटतम रेलहेड कालका, चंडीगढ़ और पठानकोट हैं जहां से कुल्‍लू सड़क के रास्‍ते पहुंचा जा सकता है।

सड़क मार्ग

राष्ट्रीय राजमार्ग 3 यहाँ से गुज़रता है। कुल्‍लू दिल्‍ली, अंबाला, चंडीगढ़, शिमला, देहरादून, पठानकोट, धर्मशाला और डलहौजी समेत हिमाचल और देश के अन्‍य भागों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। इन जगहों से कुल्‍लु के लिए नियमित रूप से बसें चलती हैं।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "Himachal Pradesh, Development Report, State Development Report Series, Planning Commission of India, Academic Foundation, 2005, ISBN 9788171884452
  2. "Himachal Pradesh District Factbook," RK Thukral, Datanet India Pvt Ltd, 2017, ISBN 9789380590448