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खलनायक

किसी कहानी में दुष्ट किरदार

खलनायक किसी कहानी में "बुराई" का चरित्र होता है, चाहे वह कोई ऐतिहासिक कथा हो या विशेष रूप से, कपोलकल्पना की कोई कृति हो। खलनायक, नायक का विरोधी होता है (हालाँकि कभी-कभार खलनायक ही नायक होता है[1]) जो अन्य पात्रों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। किसी महिला खलनायक को खलनायिका कहा जाता है। एक विरोधी के रूप में उसकी भूमिका में, खलनायक एक बाधा के रूप में कार्य करता है और नायक को उसे पराजित करने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। खलनायक उन विशेषताओं की मिसाल बनता है जो नायक के विरोध में हैं और इससे खलनायक और नायक के लक्षणों में भेद स्थापित होता है।

अन्य बताते हैं कि खलनायकों के कई कृत्यों में इच्छा-पूर्ति का संकेत होता है, जिससे कुछ लोग नायकों के मुकाबले खलनायक के पात्रों से अपनापन महसूस करते हैं। इस वजह से, निर्विवाद खलनायक का गलत करने के लिए उद्देश्य प्रदान करना चाहिए, साथ ही नायक के लिए वो एक योग्य प्रतिद्वंद्वी होना चाहिए। अपनी कहानियों में यथार्थवाद जोड़ने के प्रयास में, कई लेखक "सहानुभूतिपूर्ण" खलनायक बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में खलनायक दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाना चाहते हैं लेकिन ऐसा करने के लिए वो विरोधपूर्ण तरीके इस्तेमाल करते हैं।

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सन्दर्भसंपादित करें

  1. "समय के साथ बदलते रहे खलनायक". बीबीसी हिन्दी. 2 अगस्त 2007. अभिगमन तिथि 25 अक्टूबर 2018.