पाली, राजस्थान

राजस्थान का एक नगर

पाली भारत के राजस्थान राज्य का एक संभाग मुख्यालय है। यह राज गांव बड़ा जिला पाली तहसील बाल नरेगा कार्ड बताएं स्थान के दक्षिण पश्चिमी भाग में बांडी नदी के किनारे पर बसा। यहाँ राजस्थान की सबसे बड़ी सूती वस्त्र का कारखाना स्थित है। पाली शहर का रंगाई-छपाई और वस्त्र उद्योग प्रसिद्ध है।

पाली
पाली is located in राजस्थान
पाली
पाली
राजस्थान में स्थिति
निर्देशांक: 25°46′N 73°20′E / 25.77°N 73.33°E / 25.77; 73.33निर्देशांक: 25°46′N 73°20′E / 25.77°N 73.33°E / 25.77; 73.33
देश भारत
प्रान्तराजस्थान
ज़िलापाली ज़िला
जनसंख्या (2011)
 • शहर229,956
 • महानगर286,214
भाषा
 • प्रचलितराजस्थानी, हिन्दी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड306401
दूरभाष कोड02932
वाहन पंजीकरणRJ-22
लिंगानुपात916 /
वेबसाइटpali.rajasthan.gov.in
पाली स्थित हनुमान जी की विशाल मूर्ति

पाली शहर राष्ट्रीय राजमार्ग १४ पर स्थित है। जोधपुर संभाग के इस जिले की संभाग मुख्यालय से दूरी 75 किमी है। पाली का इतिहास अतिप्राचीन हैं। पाली शहर पर्यटन दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। यहाँ पर बांगड़ म्यूजियम, नवलखा जैन मंदिर, लोडिया तालाब जैसे बहुत सारी घूमने के स्थान हैं। कपड़ा व्यवसाय के लिए प्रसिद्द पाली से तैयार कपड़ा पूरे देश में जाता है। इतिहासकार विजय नाहर के अनुसार पाली महाराणा प्रताप की जन्मस्थली एवं महाराणा उदयसिंह का ससुराल है।[1]

पाली पर भील राजा का आधिपत्य था उनके पुत्र का नाम 'राजकुमार जावा' था , उन्हें एक ब्राह्मण लड़की से प्यार हो गया था उन्होंने यह बात उस ब्राह्मण को बताई, ब्राह्मण भील राजा से युद्ध नहीं कर सकता था उसने भील राजा को हाँ कर दी , लेकिन वह दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद गोरी से सहायता लेने पहुंचा लेकिन दिल्ली के राजा और भील राजा एक दूसरे के मित्र थे उन्होंने ब्राह्मण को सहायता देने से मना कर दिया तब वह ब्राह्मण कन्नौज के सलखोजी राठौर के पास गया , सलखोजी राठौर और ब्राहमण ने षड़यंत्र रचा और भील राजा को खूब मदिरापान कराया और उनकी हत्या कर दी , और सलखोजी ने पाली पर अधिकार कर लिया [2]

मोहम्मद गोरी के खिलाफ महान योद्धा पृथ्वीराज चौहान की हार के बाद क्षेत्र की राजपूत शक्ति का विघटन हो गया और मेवाड़ और पाली का गोडवाड़ क्षेत्र मेवाड़ के तत्कालीन शासक महाराणा कुंभा के अधीन हो गया। लेकिन पाली शहर जिस पर उसके ब्राह्मण शासकों का शासन था, जिसे अब पालीवाल ब्राह्मण (राजपुरोहित) के रूप में जाना जाता है, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील बना रहा।

16वीं और 17वीं शताब्दी में पाली के आसपास के क्षेत्रों में कई युद्ध हुए। गिन्नी के युद्ध में शेरशाह सूरी को राजपूत शासकों ने हराया था, मुगल बादशाह अकबर की सेना का गोडवाड क्षेत्र में महाराणा प्रताप से लगातार युद्ध हुआ था। एक बार फिर मुगलों द्वारा लगभग पूरे राजपुताना पर विजय प्राप्त करने के बाद, मारवाड़ के वीर दुर्गा दास राठौड़ ने अंतिम मुगल बादशाह औरंगजेब से मारवाड़ क्षेत्र को छुड़ाने के लिए संगठित प्रयास किए। तब तक पाली मारवाड़ राज्य के राठौरों के अधीन हो गया था। महाराजा विजय सिंह द्वारा पाली का पुनर्वास किया गया और जल्द ही यह एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्र बन गया।

स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका: ब्रिटिश शासन के तहत पाली ने मारवाड़ में स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करके एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आउवा के ठाकुर, जो सबसे शक्तिशाली थे, के नेतृत्व में पाली के विभिन्न ठाकुरों ने ब्रिटिश शासन का सामना किया। आउवा किला ब्रिटिश सेना से घिरा हुआ था और फिर 5 दिनों तक संघर्ष चला, जब अंत में किले पर ब्रिटिश सेना का कब्जा हो गया। लेकिन आउवा की इस वीरतापूर्ण कार्रवाई ने स्वतंत्रता के लिए निरंतर और संगठित संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया।

पाली एक जिला है जहाँ वर्तमान में श्री लक्ष्मीनारायण मंत्री 8जन 2024 से कलेक्टर के रूप में एवं श्री चुना राम जाट पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत है। रेखा भार्गव पाली की जिला न्यायाधीश है। वर्तमान मे यहां नगर परिषद सभापति श्री netal मेवाड़ा है, जो कि 17feb 2023 में निर्वाचित हुए है। यह एक विधान सभा क्षेत्र भी है, जहां से श्री अविनाश जी गेहलोत सन 2023 से विधायक है। उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री प्रेम प्रकाश चौधरी वर्तमान में पाली से संसद सदस्य है वहीँ रश्मि सिंह जिला प्रमुख है।

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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  1. "आज वीरता के महानायक महाराणा प्रताप की जयंती". www.sanjeevnitofay.com. अभिगमन तिथि 9 May 2019.[मृत कड़ियाँ]
  2. साँचा:Cite book= Indian Antiquery Part 3

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