मरियम (ईसा मसीह की माँ)

मरियम यीशु मसीह की माँ का नाम था, जिन्हें कुँवारी माता, ख़ुदावंद की माँ या मुक़द्दस कुँआरी मरियम भी कहलातीं हैं। उनकी कहानी बाईबल के नया नियम में बताई गई है, जिसके अनुसार वो फ़िलिस्तीन के इलाक़े गलील के शहर नासरत में रहनेवाली एक यहूदी औरत थीं।[1] इंजील ब-मुताबिक़ मत्ती, इंजील ब-मुताबिक़ लूक़ा और क़ुरान में बताया गया है कि वे कुँआरी थीं।[2] उनके व्यक्तित्व को ईसाई धर्म तथा इस्लाम में भी पवित्र और आदरणीय माना जाता है।

मरियम
मरियम की तस्वीर

ईसाईयों की मान्यता है कि किसी इंसानी दख़्ल के बिना, मरियम पवित्र आत्मा के क़ुदरत से गर्भवती हुईं थीं, तथा उन्हें ईश्वर ने स्वयं अपने पुत्र के जन्मे जाने के लिए चुना था। इस्लाम, जो पवित्र आत्मा की मान्यता नहीं रखता है, में माना जाता है कि मरियम केवल ईश्वर की अभिलाषा से गर्भवती हुईं थीं।[3] उस समय, मरियम की मंगनी यूसुफ़ से हो चुकी थी। यूसुफ़ के साथ शादी करने के बाद वे बैतलहम चलीं गईं, जहां पर ईसा मसीह पैदा हुआ। ईसाई धर्म में माना जाता है कि पुराने नियम (पुराने अहदनामा) में नबियों ने कुँआरी गर्भ से जन्म होने की भविष्यवाणी भी की है:

देखो, कुँआरी पेट रहेगी और उसको बेटा होगा
—(अशाया 14:7)

नये नियम में मरियम की कहानी शुरु होती जब जिब्राइल फ़रिश्ता उनके सामने प्रकट होकर उन्हें ऐलान करता है कि ईश्वर ने उनको आनेवाले मसीह की माँ बनने के लिए चुना है। कलीसियाई परंपराओं और चंद प्राचीन अपोक्रिफ़ा के मुताबिक़, मरियम के माँ-बाप हन्ना और योआकीम नामी दो बुज़ुर्ग लोग थे।

पूजनीयता

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ईसाई धर्म में मरियम के प्रति मान्यताएं विभिन्न हैं,[4][5] जैसे कि मरियम की "बेदाग़ पैदाइश" और "जन्नत में चढ़ाव" विशेषकर, रोमन कैथोलिक मरियम की भक्ति करते हैं और उन्हें "आसमान की मलिका" और "कलीसिया की जननी" की रूप में उनके लिए विशेष श्रद्धा रखते हैं।[6][7] औस्तन, प्रोटेस्टैन्ट मरियम को इस भूमिका तक नहीं चढ़ाते हैं क्योंकि उनकी नज़रिए में, मरियम की भूमिका बाइबल में ही छोटी है। मरियम को इस्लाम में भी महिलाओं में उच्चतम स्थान हासिल है।[8][9] कुरान में मरियम का उल्लेख अनेकों बार आता है। बल्कि क़ुरान में मरियम का उल्लेख बाइबल से अधिक बार है।[10]

इन्हें भी देखें

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  1. Raymond Edward Brown; Joseph A. Fitzmyer; Karl Paul Donfried (1978). "consonant+with" Mary in the New Testament. NJ: Paulist Press. पृ॰ 140. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780809121687. मूल से 20 नवंबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 जून 2020. consonant with Mary's Jewish background
  2. (साँचा:Lang-gr) Matthew 1:23 9 uses Greek parthénos virgin, whereas only the Hebrew of Isaiah 7:14 HE, from which the New Testament ostensibly quotes, as Almah young maiden. See article on parthénos in Bauercc/(Arndt)/Gingrich/Danker, A Greek-English Lexicon of the New Testament and Other Early Christian Literature, Second Edition, University of Chicago Press, 1979, p. 627.
  3. Ruiz, Jean-Pierre. "Between the Crèche and the Cross: Another Look at the Mother of Jesus in the New Testament". New Theology Review; Aug. 2010, Vol. 23, Issue 3, pp. 3–4
  4. Burke, Raymond L.; et al. (2008). Mariology: A Guide for Priests, Deacons, Seminarians, and Consecrated Persons ISBN 978-1-57918-355-4 page 178
  5. Mary for evangelicals by Tim S. Perry, William J. Abraham 2006 ISBN 0-8308-2569-X page 142
  6. Munificentissimus Deus: Dogma of the Assumption by Pius XII, 1950, 17
  7. Holweck, Frederick (1907), The Feast of the Assumption,(The Catholic Encyclopedia), 2, New York: Robert Appleton Company, मूल से 7 जनवरी 2020 को पुरालेखित, अभिगमन तिथि 26 फ़रवरी 2020, access date April 18, 2015
  8. Quran 3:42; cited in Stowasser, Barbara Freyer, “Mary”, in: Encyclopaedia of the Qurʾān, General Editor: Jane Dammen McAuliffe, Georgetown University, Washington DC.
  9. J.D. McAuliffe, Chosen of all women
  10. Esposito, John. What Everyone Needs to Know About Islam. New York: University Press, 2002. P31.; cf. Stowasser, Barbara Freyer, “Mary”, in: Encyclopaedia of the Qurʾān, General Editor: Jane Dammen McAuliffe, Georgetown University, Washington DC.

बाहरी कड़ियाँ

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