महाराजा चंदू लाल उर्दू के प्रमुख शायर थे। यह तीसरे निज़ाम - मीर अकबर अली खान सिकंदर जाह, आसिफ़ जाह तृतीय के समय में हैदराबाद दकन के प्रधानमंत्री रहे। इनका जन्म 1766 में हुआ और इनकी मृत्यु 15 अप्रैल 1845 को हुई।[1]

परिवारसंपादित करें

उनका परिवार निजाम उल मुल्क, आसिफ़ जाह प्रथम के शासन के दौरान हैदराबाद दकन में "दफ्तर-ए-माल" (वित्त विभाग) का संस्थापक था।

कविसंपादित करें

एक विद्वान व्यक्ति के रूप में चंदू लाल (जो क़लमी नाम सदन का इस्तेमाल करते थे), उर्दू कविता और साहित्य का एक महान संरक्षक थे। उनकी उदारता ने उर्दू कवियों और उस समय के लेखकों को अपनी अदालत में आकर्षित किया।

उन्होंने दिल्ली के जौक़ और बखेश नाशिख जैसे उत्तर प्रदेश के कवियों को भी हैदराबाद राज्य में आमंत्रित किया लेकिन वे कुछ कारणों से नहीं आ सके। अपने प्रधान मंत्री कार्यालय की ज़िम्मेदारी के बावजूद वह नियमित रूप से मुशायरों को आयोजित करते और उनमें स्वयं भाग भी लेते थे।

स्मृतिसंपादित करें

इनकी स्मृति में हैदराबाद का एक मोहल्ला चन्दुलाल बारहदरी आज भी हैदराबाद में मौजूद है।

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 1 सितंबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 15 अगस्त 2017.