वृष्णि

यादवों का एक कुल या वंश
(यदुकुल से अनुप्रेषित)

वृष्णि एक प्राचीन वैदिक भारतीय चरवाहा-ग्वाला जनजाति थे,[1] जिन्हें वृष्णि का वंशज माना जाता था। ऐसा माना जाता है कि वृष्णि ययाति के पुत्र यदु के वंशज सात्वत के के पुत्र थे। कृष्ण आभीरों की एक खानाबदोश जनजाति से हैं, जिन्हें सात्वत के नाम से जाना जाता है, जो मथुरा के पास देश में रहते थे। इन सातत्वों या अधिक उचित रूप से कहें तो जिन यादवों की वे एक शाखा थे, उनका उल्लेख पाणिनि ने किया था।[2]

वृष्णियों, यौधेयों, पौरवों व अन्य कुलों की भूमि।

सम्भवतः वृष्णि आभीर जाति की ही प्रशाखा थी जिसमें, गोपालक[3] होने के कारण गोधन की बड़ी महिमा थी और न्यग्रोध वृक्ष, यमुनादि नदियों की पूजन-परम्परा थी।[4][5]

सन्दर्भ संपादित करें

  1. Katragadda, Gopichand (2008). S.M.A.S.H: Innovation: Smashing The Hand-Mind-Market Barrier (अंग्रेज़ी में). Wiley India Pvt. Limited. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-265-1906-4.
  2. Mitra, Khagendranath (1952). The Dynamics of Faith: Comparative Religion (अंग्रेज़ी में). University of Calcutta. Krishna belongs to a nomadic tribe of Abhiras known as Sāttvatas who inhabited the country near Mathura. These Sāttvatas or more properly the Yadavas of whom they were a branch were mentioned by Panini.
  3. Katragadda, Gopichand (2008). S.M.A.S.H: Innovation: Smashing The Hand-Mind-Market Barrier (अंग्रेज़ी में). Wiley India Pvt. Limited. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-265-1906-4.
  4. Vāgvikalpa: Ḍô. Ānandaprakāśa Dīkshita abhinandana-grantha : kāvyaśāstra, bhaktikāvya, Śailīvijñāna, evaṃ samīkshā se sambandhita maulika lekhoṃ kā sandarbha grantha. Vibhūti Prakāśana. 1986.
  5. Parishad, Bihar Purāvid (1992). The Journal of the Bihar Purāvid Parishad (अंग्रेज़ी में). Bihar Puravid Parishad.