विशाल चींटीखोर (Myrmecophaga tridactyla), जिसे चींटी भालू भी जाना जाता हैं, एक विशाल कीटभक्षी स्तनधारी हैं, जो मध्य और दक्षिण अमेरिका का मूल निवासी हैं। यह चींटीखोरों की चार जीवित प्रजातियों में से एक है और पिलोसा प्रकार में स्लोथ के साथ वर्गीकृत किया गया हैं।[3] अन्य जीवित चींटीखोरों और स्लोथ के विपरीत जो वानस्पतिक या अर्ध-वानस्पतिक होते हैं, यह प्रजाति ज्यादातर स्थलीय हैं।[4] अपने परिवार का सबसे बड़ा सदस्य, विशाल चींटीखोर की लम्बाई [convert: invalid number] तथा नर और मादा का वज़न क्रमशः [convert: invalid number] और [convert: invalid number] होता हैं। यह अपनी लम्बी थूथन, जंगली पूँछ, लंबे सामने के पंजे, और विशिष्ट रंग के ऊर्णाजिन से पहचानने योग्य हैं।

विशाल चींटीख़ोर
Giant anteater
Myresluger2.jpg
एक चिड़ियाघर में विशाल चींटीख़ोर
वैज्ञानिक वर्गीकरण
जगत: जंतु
संघ: रज्जुकी (Chordata)
वर्ग: स्तनधारी (Mammalia)
उपवर्ग: थेरिया (Theria)
अध:वर्ग: युथेरिया (Eutheria)
अधिगण: ​ ज़ीनारथ्रा (Xenarthra)
गण: ​ पिलोसा (Pilosa)
उपगण: वर्मिलिंगुआ (Vermilingua)
कुल: मिरमेकोफ़ेजिडाए (Myrmecophagidae)
वंश: मिरमेकोफ़ेजा (Myrmecophaga)
जाति: M. tridactyla
द्विपद नाम
Myrmecophaga tridactyla
(लीनियस, १७५८) [2]
Giant Anteater area.png
विशाल चींटीख़ोर का विस्तार
नीला - जहाँ अभी भी अस्तित्व में है
नारंगी - जहाँ से यह लुप्त हो चुका है

इन्हें भी देखेंसंपादित करें

सन्दर्भसंपादित करें

  1. Miranda, F., Bertassoni, A. & Abba, A.M. (2014). "Myrmecophaga tridactyla Archived 9 अप्रैल 2009 at the वेबैक मशीन.". IUCN Red List of Threatened Species. Version 2014.1. International Union for Conservation of Nature. Retrieved 2014-07-07.
  2. Linnæus, Carl (1758). Systema naturæ per regna tria naturæ, secundum classes, ordines, genera, species, cum characteribus, differentiis, synonymis, locis. Tomus I (लैटिन में) (10 संस्करण). Holmiæ: Laurentius Salvius. पृ॰ 35. मूल से 8 नवंबर 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 November 2012.
  3. Myrmecophaga tridactyla Archived 26 सितंबर 2013 at the वेबैक मशीन., Fauna of Paraguay
  4. Mammal Species of the World: A Taxonomic and Geographic Reference, Volume 1 Archived 13 नवम्बर 2012 at the वेबैक मशीन., edited by Don E. Wilson, DeeAnn M. Reeder, The Johns Hopkins University Press, 2005