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श्याम बहादुर वर्मा (जन्म: 10 अप्रैल 1932 बरेली मृत्यु: 20 नवम्बर 2009 दिल्ली) हिन्दी के उद्भट विद्वान थे। उन्होंने विवाह नहीं किया। पुस्तकें ही उनकी जीवन संगिनी थीं। तीन कमरों वाले फ्लैट में श्याम बहादुर अकेले रहते थे। उनके प्रत्येक कमरे में फर्श से लेकर छत तक पुस्तकें ही पुस्तकें नज़र आती थीं। उन्होंने हिन्दी साहित्य को कई शब्द कोश प्रदान किये। दिल्ली विश्वविद्यालय से विजयेन्द्र स्नातक के मार्गदर्शन में उन्होंने हिन्दी काव्य में शक्तितत्व विषय पर शोध करके पीएच॰डी॰ की और डी॰ए॰वी॰ कॉलेज में प्राध्यापक हो गये। परन्तु अध्ययन का क्रम फिर भी न टूटा। गणित में एम॰एससी॰ से लेकर अंग्रेजी, संस्कृत, हिन्दी और प्राचीन भारतीय इतिहास जैसे अनेकानेक विषयों में उन्होंने एम॰ए॰ की परीक्षाएँ न केवल उत्तीर्ण कीं अपितु प्रथम श्रेणी के अंक भी अर्जित किये। बौद्धिक साधना के साक्षात् स्वरूप थे।

उनकी सम्पूर्ण साहित्यिक सेवाओं के लिये हिन्दी अकादमी, दिल्ली ने वर्ष 1997-98 में साहित्यकार सम्मान प्रदान किया। 20 नवम्बर 2009 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ।

संक्षिप्त परिचयसंपादित करें

श्याम बहादुर वर्मा का जन्म 10 अप्रैल 1932 को बरेली जिले के आँवला (नगर) में विद्यावती और लाल बहादुर वर्मा के यहाँ हुआ था। पिता की मृत्यु के बाद उनकी माँ विद्यावती ने बड़ी कठिन परिस्थितियों में भी न केवल परिवार को चलाया अपितु बच्चों को श्रेष्ठ संस्कार भी दिये। श्याम बहादुर सन् 1946 में मात्र 14 वर्ष की आयु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और दो वर्ष बाद 1948 में संघ पर प्रतिबन्ध के विरोध में सत्याग्रह करके जेल गये। उन दिनों वे शाहजहाँपुर में बी॰एससी॰ के छात्र थे। बी॰एससी॰ करने के बाद उन्होंने एम॰.एससी॰ में प्रवेश न लेकर एक वर्ष तक अपना पूरा समय अपने संघ कार्य में लगाया। फिर वे अपने गृह जनपद बरेली आ गये और वहीं रहते हुए उन्होंने सन् 1952 में साहित्यरत्न और आयुर्वेदरत्न की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं।[1]

1953 में गणित से एम॰एससी॰ करके अल्मोड़ा जिले के नारायण विद्यालय में शिक्षक बन गये। परन्तु ईसाई मिशनरियों के मतान्तरण प्रयासों का विरोध करने के कारण अगले ही वर्ष हल्द्वानी आये और शिशु मन्दिर प्रारम्भ किया। सन् 1956 में मैनपुरी जिले के भोगाँव कालेज में गणित के शिक्षक नियुक्त हुए। अध्यापन कार्य के साथ संघ कार्य में पूरी शक्ति लगाते हुए उन्होंने अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं में एम॰ए॰ की परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। 1963 में उनकी नियुक्ति बिजनौर जिले के रणजीत सिंह मेमोरियल डिग्री कालेज धामपुर में अंग्रेजी के प्राध्यापक के रूप में हुई। धामपुर में रहते हुए उन्होंने 20 वर्ष बाद हिन्दी विषय में एम॰ए॰ की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। तदन्तर वे उसी कॉलेज के हिन्दी विभाग में पहले प्राध्यापक और फिर विभागाध्यक्ष हुए।[1]

संघकार्य और शिक्षक की दोहरी भूमिका का निर्वाह करते हुए उन्होंने 1967 में आगरा विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति विषय में प्रथम श्रेणी के साथ एम॰ए॰ किया। मेरठ विश्वविद्यालय के लाजपतराय कालेज (साहिबाबाद) में हिन्दी के विभागाध्यक्ष के पद पर कुछ समय कार्य करके वे 1967में दिल्ली आ गये। और जीवन के शेष 42 वर्ष उन्होंने दिल्ली में ही बिताये। दिल्ली आकर भी उनका विद्याध्ययन बराबर जारी रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय से डॉ॰ विजयेन्द्र स्नातक के निर्देशन में उन्होंने हिन्दी काव्य में शक्तितत्व विषय पर शोध करके पीएच॰डी॰ की उपाधि अर्जित की।[1]

20 नवम्बर 2009 को नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर 77 वर्ष की आयु में हृदयाघात (हार्ट अटैक) से उनका निधन हुआ। मयूर विहार स्थित उनके आवास में अब उनके छोटे भाई डॉ॰ धर्मेन्द्र, छोटे भाई की पत्नी और उन दोनों के बच्चे रहते हैं।[1]

कृतियाँसंपादित करें

राम, स्वामी विवेकानन्द और अरविन्द घोष के जीवन-दर्शन, सूक्तिशब्दकोश पर लिखी उनकी प्रमुख कृतियाँ निम्न हैं:[1]

  • क्रान्ति योगी श्री अरविन्द
  • महायोगी श्री अरविन्द
  • श्री अरविंद साहित्य दर्शन
  • श्री अरविन्द विचारदर्शन
  • राष्ट्र निर्माता स्वामी विवेकानन्द
  • युग पुरुष श्री राम
  • बृहत विश्व सूक्ति कोश (तीन खण्डों में)
  • बृहत हिन्दी शब्द कोश (दो खण्डों में)

सन्दर्भसंपादित करें

  1. स्व. डॉ॰ श्याम बहादुर वर्मा - बौद्धिक साधना में लीन स्वयंसेवक - देवेन्द्र स्वरूप पाञ्चजन्य, 6 दिसम्बर 2009, अभिगमन तिथि: 27 दिसम्बर 2013

बाहरी कड़ियाँसंपादित करें