सस्ता साहित्य मण्डल, भारत का एक प्रमुख पुस्तक प्रकाशक संस्था है। इस संस्था की स्थापना सन् १९२५ में महात्मा गांधी की प्रेरणा से हुई जिसमें जमनालाल बजाज एवं घनश्यामदास बिड़ला की प्रमुख भूमिका थी। यह एक धर्मार्थ संस्था है जो बिना लाभ कमाए (no-profit) काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य कम मूल्य पर उच्चस्तरीय साहित्य का प्रकाशन करना है। मंडल ने अब तक लगभग २००० से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया है। आरम्भ में इसके कार्यों का केन्द्र अजमेर था किन्तु १९३४ में यह दिल्ली आ गया था। इस प्रकाशन ने जो सबसे पहली पुस्तक छापी वह गांधीजी द्वारा रचित "दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह का इतिहास" थी।

मंडल द्वारा प्रकाशित पुस्तकें अनेकानेक विषयों - इतिहास, अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, महापुरुषों की जीवनियाँ आदि होती हैं। बहुत सी पुस्तकें गांधीजी एवं गांधी-साहित्य से सम्बन्धित होती हैं। इसके कई प्रकाशनों को भारत के केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकारों से पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

सस्ता साहित्य मंडल कोई साधारण प्रकाशक नहीं है। इसकी स्थापना के पीछे वही तत्व सक्रिय थे जिन्होंने आगे चलकर आज़ादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गांधीजी के अनन्य अनुयायी और उनके पांचवें पुत्र के नाम से विख्यात सेठ जमनालाल बजाज इसके मुख्य प्रेरक थे और घनश्यामदास बिड़ला, हरिभाऊ उपाध्याय, वियोगी हरि आदि इसके सक्रिय सहयोगी थे।

हिन्दी सेवासंपादित करें

सस्ता साहित्य मण्डल ने हिन्दी की स्तरीय किन्तु अत्यन्त सस्ती पुस्तकें छापकर हिन्दी साहित्य एवं हिन्दीभाषी जनता का उपकार किया है। इसने अन्य भाषाओं का उत्तम साहित्य भी अनुवाद करके हिन्दी में उपलब्ध कराया है। इसके इस कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा हुई है।

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